धूम्रपान छोड़ने के 20 मिनट बाद ही फेफड़ों की रिकवरी शुरू हो जाती है। जानें 15 साल तक शरीर में होने वाले बदलाव और क्या फेफड़े 100% पहले जैसे हो सकते हैं।
धूम्रपान छोड़ना जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन सबसे फलदायी निर्णयों में से एक है। सिगरेट का धुआं फेफड़ों की कोमल कोशिकाओं को जला देता है और शरीर में जहरीले रसायनों का प्रवेश कराता है, लेकिन मानव शरीर की मरम्मत करने की क्षमता अद्भुत है। जैसे ही आप सिगरेट का आखिरी कश छोड़ते हैं, आपके शरीर के भीतर एक ‘हीलिंग प्रोसेस’ (स्वस्थ होने की प्रक्रिया) शुरू हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सिगरेट छोड़ने के फायदे तात्कालिक भी हैं और दीर्घकालिक भी।
रिकवरी की शुरुआत: पहले 20 मिनट से 24 घंटे तक
धूम्रपान छोड़ने का सकारात्मक असर आपके शरीर पर उम्मीद से कहीं ज्यादा जल्दी दिखने लगता है।
- 20 मिनट के भीतर: आपकी हृदय गति (Heart Rate) और रक्तचाप सामान्य होने लगता है। निकोटीन का प्रभाव कम होते ही रक्त वाहिकाएं शिथिल होने लगती हैं।
- 12 से 24 घंटे: सिगरेट के धुएं में मौजूद जहरीली गैस ‘कार्बन मोनोऑक्साइड’ का स्तर खून में कम होने लगता है और ऑक्सीजन का स्तर सामान्य हो जाता है। इससे शरीर के अंगों, विशेषकर मस्तिष्क और मांसपेशियों को अधिक ऊर्जा मिलने लगती है।
सफाई की प्रक्रिया: 2 से 4 सप्ताह का समय
- फेफड़ों के भीतर ‘सिलिया’ (Cilia) नामक सूक्ष्म बाल होते हैं, जिनका काम फेफड़ों से बलगम और गंदगी को बाहर धकेलना होता है। धूम्रपान के कारण ये बाल सुन्न या पैरालाइज्ड हो जाते हैं।
- सिगरेट छोड़ने के कुछ हफ्तों बाद ये सिलिया फिर से जीवित हो जाते हैं और तेजी से सफाई शुरू करते हैं।
- यही कारण है कि स्मोकिंग छोड़ने के बाद शुरुआती दिनों में खांसी बढ़ सकती है। यह असल में फेफड़ों द्वारा सालों से जमा कचरे को बाहर निकालने का एक तरीका है।
फेफड़ों की मजबूती: 1 से 9 महीने
इस अवधि में फेफड़ों की कार्यक्षमता (Lung Capacity) में महत्वपूर्ण सुधार होता है।
- फेफड़ों में सूजन (Inflammation) कम होने लगती है, जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।
- सांस फूलने की समस्या में कमी आती है और फेफड़ों के संक्रमण (Infection) का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। व्यक्ति पहले से अधिक सक्रिय महसूस करने लगता है और शारीरिक व्यायाम करने की उसकी क्षमता बढ़ जाती है।
लंबी अवधि के फायदे: 1 से 15 साल
धूम्रपान छोड़ने के बाद मिलने वाले लाभ सालों-साल बढ़ते रहते हैं:
- 1 साल बाद: कोरोनरी हार्ट डिजीज (दिल का दौरा) का खतरा धूम्रपान करने वालों की तुलना में आधा रह जाता है।
- 10 साल बाद: फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मृत्यु का जोखिम एक सक्रिय स्मोकर के मुकाबले 50% तक कम हो जाता है। साथ ही मुंह, गले और अन्नप्रणाली के कैंसर का खतरा भी घट जाता है।
- 15 साल बाद: दिल का दौरा पड़ने का जोखिम उतना ही रह जाता है, जितना कि एक ऐसे व्यक्ति का जिसने कभी धूम्रपान नहीं किया हो।
कड़वा सच: क्या फेफड़े 100% पहले जैसे हो सकते हैं?
फेफड़ों की रिकवरी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति ने कितने समय तक और कितनी मात्रा में धूम्रपान किया है।
- स्थायी क्षति: यदि फेफड़ों में ‘स्कारिंग’ (निशान पड़ना) हो गई है या एम्फिसीमा (Emphysema) जैसी बीमारी ने वायुकोशों (Alveoli) को नष्ट कर दिया है, तो वह हिस्सा दोबारा पहले जैसा नहीं हो सकता। फेफड़े लीवर की तरह पूरी तरह से नए नहीं बन सकते।
- सीओपीडी (COPD) से बचाव: यदि कोई व्यक्ति क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी गंभीर स्थिति पैदा होने से पहले ही सिगरेट छोड़ देता है, तो उसके फेफड़ों की सूजन खत्म हो सकती है और बचे हुए स्वस्थ ऊतक बहुत अच्छी तरह से काम कर सकते हैं।
कभी भी देर नहीं हुई है
धूम्रपान छोड़ना केवल फेफड़ों की ही नहीं, बल्कि पूरे जीवन की सुरक्षा है। भले ही फेफड़े पूरी तरह ‘नए’ न बन पाएं, लेकिन स्मोकिंग बंद करने से आगे होने वाली क्षति तुरंत रुक जाती है। शरीर को मिलने वाली अतिरिक्त ऑक्सीजन और कम होता कैंसर का खतरा एक स्वस्थ और लंबी जिंदगी की गारंटी देता है।