किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते को CM नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यमुना जल उपलब्धता बढ़ने और भविष्य की जरूरतें पूरी होने की बात कही।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के समझौते को राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। 15 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली ने किशाऊ परियोजना को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह परियोजना लंबे समय से विभिन्न राज्यों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बातचीत, सहयोग और आपसी सहमति के जरिए वर्षों से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के प्रयासों के लिए आभार जताया।
हरियाणा को पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद
“आज किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर समझौता हरियाणा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वर्षों से लंबित इस परियोजना को संवाद, सहयोग और सहमति के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री श्री @narendramodi और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah का विशेष रूप से धन्यवाद। उनकी पहल… pic.twitter.com/Y6V0k9kUpu
— DPR Haryana (@DiprHaryana) September 15, 2026
नायब सिंह सैनी ने कहा कि यमुना के पानी में हरियाणा की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत है। ऐसे में यमुना में पानी की उपलब्धता बढ़ने का लाभ हरियाणा को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लिए पानी की जरूरत केवल मौजूदा समय तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को देखते हुए भी जल संसाधनों को मजबूत करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, रेणुका जी और लखवाड़ परियोजनाओं पर पहले से काम चल रहा है, जबकि अब किशाऊ परियोजना को भी आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने इन परियोजनाओं को हरियाणा की दीर्घकालिक जल जरूरतों से जोड़ा।
तीन परियोजनाओं से 1,143 MCM पानी में हरियाणा की हिस्सेदारी का दावा
नायब सिंह सैनी ने कहा कि रेणुका जी, लखवाड़ और किशाऊ परियोजनाओं के जरिए हरियाणा के हिस्से में करीब 1,143 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी आएगा। उन्होंने यह भी बताया कि तीनों परियोजनाओं से कुल जल उपलब्धता में लगभग 2,676 क्यूसेक की बढ़ोतरी होगी, जिसमें हरियाणा की हिस्सेदारी करीब 1,280 क्यूसेक होगी।
उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त जल राज्य की वर्तमान जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
छह राज्यों के बीच बनी सहमति
किशाऊ परियोजना को लेकर हुए समझौते में हरियाणा के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं। परियोजना का उद्देश्य ऊपरी यमुना बेसिन में जल प्रबंधन को मजबूत करना है। किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है।
केंद्र सरकार के अनुसार, किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है और जल घटक की करीब 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार की ओर से वहन की जाएगी।
हरियाणा की भविष्य की जल जरूरतों पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाना हरियाणा के लिए दीर्घकालिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने किशाऊ समझौते को राज्यों के बीच संवाद और सहमति के जरिए आगे बढ़ी प्रक्रिया के रूप में बताया।
किशाऊ परियोजना के आगे बढ़ने से जल भंडारण, सिंचाई और क्षेत्रीय जल प्रबंधन से जुड़े लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजना से संबंधित विस्तृत लाभ और राज्यवार जल हिस्सेदारी समझौते तथा परियोजना के क्रियान्वयन के अनुसार लागू होंगे।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाना वर्तमान जरूरतों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अहम है।