कंगना रनौत ने झारखंड छात्रों के प्रदर्शन पर बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने जंतर-मंतर विरोध और Gen-Z पर अपने पुराने बयान को लेकर भी सफाई दी।
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर बॉलीवुड की कथित चुप्पी पर सवाल उठाते हुए फिल्म इंडस्ट्री पर जमकर निशाना साधा है। एएनआई को दिए हालिया इंटरव्यू में कंगना से उनके उस बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहा था। इसी दौरान उन्होंने छात्र आंदोलनों और फिल्म इंडस्ट्री के रवैये पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। कंगना का कहना था कि जब किसी मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन होता है, तो बॉलीवुड के कुछ लोग अपनी संवेदनाएं और चिंता जाहिर करते हैं, लेकिन झारखंड के छात्रों के मामले में वही समर्थन और चिंता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने इसे फिल्म इंडस्ट्री का ‘दोगलापन’ करार दिया।
‘फिल्म इंडस्ट्री का यह दोगलापन नहीं चलेगा’
कंगना रनौत ने कहा कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है और फिल्म इंडस्ट्री का एक वर्ग पहले भी इसी तरह का रवैया अपनाता रहा है। उन्होंने अपने बयान के समर्थन में संसद पर हुए हमले के बाद की परिस्थितियों और अपने निजी अनुभवों का भी जिक्र किया। कंगना ने दावा किया कि उनके कई सांसद मित्रों की गाड़ियों पर प्रदर्शनकारियों ने चढ़ाई की और उनकी गाड़ियों की खिड़कियां तक तोड़ी गईं। उन्होंने कहा कि उस समय भी फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों के प्रति सहानुभूति दिखाई थी। कंगना ने अपने घर के बाहर हुए विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग उनके आवास के बाहर जमा हुए थे और स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था। उनके मुताबिक, उस दौरान उनके परिवार और आसपास के लोगों को रात में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
झारखंड के छात्रों को लेकर उठाया सवाल
कंगना ने सवाल किया कि यदि छात्र किसी अन्य स्थान पर अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करते हैं तो उनके समर्थन में आवाज उठाई जाती है, लेकिन झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के लिए वही चिंता क्यों नहीं दिखाई जा रही। उन्होंने कहा कि वहां भी बच्चे और युवा अपनी समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और उनकी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कंगना ने बॉलीवुड के उन लोगों को निशाने पर लिया, जिन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अपनी चिंता व्यक्त की थी। उनका कहना था कि यदि उस समय छात्रों के प्रति संवेदना दिखाई गई थी, तो अब झारखंड के छात्रों के साथ भी उसी तरह खड़ा होना चाहिए।
कंगना ने इसी संदर्भ में ‘कुदरती आंसू’ या ‘कांप्लेक्स’ जैसे आरोपों की बजाय ‘कॉकटेल’ नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ‘क्रोकोडाइल टीयर्स’ यानी मगरमच्छ के आंसू वाली राजनीति की आलोचना की। उनका संदेश साफ था कि छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक या वैचारिक नजरिए से अलग रखकर देखा जाना चाहिए और यदि कहीं युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो उनके मुद्दे को सुना जाना चाहिए।
Gen-Z पर दिए बयान की सफाई
इंटरव्यू के दौरान कंगना से उनके पहले के उस विवादित बयान पर भी सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने कुछ युवाओं को ‘जेनरेशन गटर’ कहा था। यह टिप्पणी कथित तौर पर कॉकroach जनाता पार्टी यानी सीजेपी से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सामने आई थी। कंगना ने अब अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी युवा पीढ़ी को ‘गटर’ नहीं कहा था। उनके मुताबिक, उन्होंने कुछ खास लोगों और कुछ महिलाओं के संदर्भ में यह टिप्पणी की थी।
कंगना ने अपनी बात समझाने के लिए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल करने वाले लोगों पर ही तंज किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को कॉकरोच कहता है, तो उनके अनुसार उसका ‘गटर’ से जुड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई उन्हें कॉकरोच या गटर से जोड़ने की कोशिश करे, तो वह खुद ऐसी पहचान को स्वीकार नहीं करेंगी। इस तरह कंगना ने अपने पुराने बयान को युवाओं के खिलाफ सामान्य टिप्पणी मानने से इनकार किया।
बॉलीवुड और छात्र आंदोलनों पर फिर बहस
कंगना के ताजा बयान ने एक बार फिर बॉलीवुड की सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता को लेकर बहस छेड़ दी है। अभिनेत्री लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री के भीतर मौजूद कथित दोहरे मानदंडों की आलोचना करती रही हैं। इस बार उनका निशाना उन सेलिब्रिटीज पर है, जिनके बारे में उनका मानना है कि वे कुछ आंदोलनों पर मुखर होते हैं, लेकिन दूसरे छात्र आंदोलनों के दौरान चुप रहते हैं।
हालांकि, बॉलीवुड के सभी कलाकारों की राय एक जैसी नहीं है और किसी भी आंदोलन को लेकर अलग-अलग लोगों के अपने राजनीतिक और सामाजिक विचार हो सकते हैं। ऐसे में कंगना की टिप्पणी को उनके व्यक्तिगत राजनीतिक दृष्टिकोण और सार्वजनिक बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनका मुख्य सवाल यही है कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर समर्थन किसी विशेष विचारधारा या आंदोलन तक सीमित क्यों होना चाहिए।
कंगना के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि सार्वजनिक हस्तियों को छात्र आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों पर कब और किस तरह अपनी आवाज उठानी चाहिए। जहां उनके समर्थक इसे बॉलीवुड के कथित दोहरे रवैये के खिलाफ जरूरी सवाल मान सकते हैं, वहीं आलोचक इसे उनके राजनीतिक और वैचारिक विवादों की निरंतरता के रूप में देख सकते हैं। फिलहाल, झारखंड के छात्रों को लेकर कंगना का यह बयान सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में चर्चा का विषय बना हुआ है।