Masik Shivratri 2026: ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि कब है? जानें सही डेट, निशिता काल मुहूर्त और 2 शुभ संयोगों का महत्व

Masik Shivratri 2026: ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि कब है? जानें सही डेट, निशिता काल मुहूर्त और 2 शुभ संयोगों का महत्व

ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त यहाँ देखें। जानें 14 मई को बनने वाले सर्वार्थ सिद्धि और प्रीति योग का महत्व और निशिता काल पूजा विधि।

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। ज्येष्ठ मास की मासिक शिवरात्रि का अपना एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि इस समय गर्मी अपने चरम पर होती है और महादेव को जल अर्पित कर शीतलता प्रदान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि पर ग्रहों की स्थिति और नक्षत्रों के मेल से अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। यहाँ इस विशेष दिन की तिथि, मुहूर्त और दुर्लभ संयोगों पर विस्तृत जानकारी दी गई है:

ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 14 मई 2026, गुरुवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि की पूजा मध्य रात्रि (निशिता काल) में की जाती है, इसलिए 14 मई की रात को ही शिव पूजन का मुख्य विधान होगा।

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 14 मई 2026 को दोपहर से।
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 15 मई 2026 की दोपहर तक।

निशिता काल पूजा मुहूर्त: 14 मई की रात 11:56 PM से 12:40 AM (15 मई) तक।

यह 44 मिनट का समय महादेव की गुप्त साधना और विशेष सिद्धियों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

बन रहे हैं 2 दुर्लभ संयोग: सर्वार्थ सिद्धि और प्रीति योग

इस बार की ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन दो अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं। पहला है ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस योग में की गई पूजा और शुरू किए गए कार्य निश्चित रूप से सफलता प्रदान करते हैं। दूसरा है ‘प्रीति योग’, जो आपसी प्रेम और संबंधों में मधुरता लाने वाला माना जाता है। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या पारिवारिक कलह रहती है, तो इन दो संयोगों में शिव आराधना करने से मानसिक शांति और सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

निशिता काल पूजा का महत्व

मासिक शिवरात्रि में रात्रि के आठवें मुहूर्त को निशिता काल कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इसी समय भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। इस काल में की गई पूजा से साधक को भय, रोग और दोषों से मुक्ति मिलती है। ज्येष्ठ की गर्मी में इस समय शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और गन्ने का रस अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। जो भक्त पूरे वर्ष की शिवरात्रि का व्रत नहीं कर पाते, उनके लिए ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि का व्रत रखना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

पूजन विधि: पंचोपचार और अभिषेक

ज्येष्ठ शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन मन ही मन ‘नमः शिवाय’ का जाप करें। शाम के समय या निशिता काल मुहूर्त में भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, श्वेत चंदन और भस्म अर्पित करें। ज्येष्ठ मास के कारण भगवान को ठंडे फलों का भोग लगाना और शीतल जल से अभिषेक करना श्रेष्ठ है। अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती उतारें।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

शिवरात्रि की पूजा में कुछ सावधानियां अत्यंत आवश्यक हैं। शिवलिंग पर कभी भी तुलसी दल, हल्दी या सिंदूर न चढ़ाएं। अभिषेक के लिए तांबे के पात्र का उपयोग जल के लिए करें, लेकिन यदि दूध से अभिषेक कर रहे हैं, तो स्टील या चांदी के पात्र का प्रयोग करें, क्योंकि तांबे में दूध डालना वर्जित माना गया है। साथ ही, इस दिन सात्विक आहार लें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

यह मासिक शिवरात्रि आपके जीवन में नई रोशनी और महादेव की असीम कृपा लेकर आए, इसी मनोकामना के साथ भक्त इस पावन पर्व की तैयारी कर रहे हैं। 2026 की यह तिथि उन लोगों के लिए विशेष है जो लंबे समय से किसी कार्य की सिद्धि की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Related posts

गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री 2026: गणपति बप्पा की पूजा के लिए A to Z पूरी लिस्ट

घर की नेमप्लेट के लिए लकड़ी, मेटल या पत्थर? जानें वास्तु के अनुसार कौन-सा है शुभ

वराह जयंती 2026 कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More