ज्वेलरी शेयरों में बड़ी गिरावट: सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने से कल्याण ज्वेलर्स और टाइटन के शेयर टूटे

ज्वेलरी शेयरों में बड़ी गिरावट: सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने से कल्याण ज्वेलर्स और टाइटन के शेयर टूटे

ज्वेलरी शेयरों पर ‘गोल्ड ड्यूटी’ का प्रभाव: आयात शुल्क में वृद्धि से बाजार में गिरावट, कल्याण ज्वेलर्स सबसे अधिक प्रभावित

बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में जवेरात और आभूषण (Jewellery) क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली हुई। निवेशकों की धारणा मंगलवार देर रात केंद्र सरकार द्वारा सोने, चांदी और अन्य महंगी धातुओं पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाने के निर्णय से प्रभावित हुई है। आभूषण कंपनियों की आयात लागत पर वित्त मंत्रालय की इस कार्रवाई का सीधा असर पड़ेगा, जिससे आगामी तिमाहियों में मांग और मुनाफे के मार्जिन पर दबाव आने की आशंका है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि ज्वेलरी रिटेलर्स की कार्यशील पूंजी (WACC) की मांग बढ़ सकती है क्योंकि इनपुट लागत में अचानक हुई वृद्धि हुई है।

कल्याण ज्वेलर्स में 4 प्रतिशत से अधिक की कमी:

बाजार खुलने के साथ ही लिस्टेड ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में लाल निशान दिखाई देने लगे, जिसमें सेनको और टाइटन भी शामिल थे। इस खबर ने कल्याण ज्वेलर्स (Kalyan Jewellers) के शेयरों पर सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव डाला। यह लिस्टेड ज्वेलरी फर्मों में सर्वश्रेष्ठ बन गया, जब उसके शेयर 4.33% गिरकर 346.15 रुपये पर आ गए। टाइटिन कंपनी, उद्योग की सबसे बड़ी कंपनी, 0.43% गिरकर 4,037.80 रुपये पर कारोबार कर रही थी। साथ ही, सेनको गोल्ड (Senco Gold) के शेयरों में 0.19% की छोटी गिरावट हुई, जो 312.15 रुपये के स्तर पर बना रहा। यह गिरावट बाजार को चिंतित करती है कि बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों की मांग को कम कर सकती हैं।

वित्त मंत्रालय की देर रात की अधिसूचना के अनुसार, सोने और चांदी पर बुनियादी आयात शुल्क में बदलाव किया गया है. आयात शुल्क में वृद्धि का गणित और उद्योग पर प्रभाव भारत आयात से बहुत कुछ खरीदता है। घरेलू बाजार में सोने की कीमतें हर बार बढ़ती हैं जब आयात शुल्क बढ़ते हैं। इससे ज्वेलरी कंपनियों को दो महत्वपूर्ण परिणाम होते हैं:

  • इन्वेंट्री के लिए खर्च: अब कंपनियों को नए स्टॉक खरीदने के लिए अधिक धन खर्च करना पड़ेगा।
  • मांग में गिरावट: सोने की कीमतों में उछाल आने से मध्यम वर्ग की खरीद क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे त्योहारों और शादियों के दौरान मांग कम हो सकती है।

मार्जिन पर दबाव और निवेशकों की चिंता

शेयर बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ज्वेलरी उद्योग पहले से ही उच्च कीमतों और कठोर प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। आयात शुल्क में बढ़ोतरी अब कंपनियों के EBITDA मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डालती हैं, तो उनके मुनाफे में कमी आ जाएगी। वहीं, वे कीमतें बढ़ाते हैं, तो बिक्री की मात्रा में कमी आने का खतरा है। कल्याण ज्वेलर्स जैसे बड़े रिटेलर्स के लिए यह नीतिगत बदलाव अल्पकालिक चुनौतियों का कारण बन सकता है।

अगले कदम: ज्वेलरी शेयरों का क्या होगा?

बुधवार को बाजार में भारी गिरावट देखी गई, लेकिन उद्योग जगत के कुछ जानकारों का मानना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं हो सकती है। भारत में सोने की संस्कृति इतनी गहरी है कि एक छोटी सी मूल्यवृद्धि भी इसकी मांग को पूरी तरह कम नहीं कर सकती। यदि सोने की कीमतें आने वाले महीनों में स्थिर रहती हैं, तो ज्वेलरी शेयरों में फिर से रिकवरी हो सकती है। फिलहाल, निवेशकों को इन शेयरों में निवेश करने से पहले आगामी तिमाही नतीजों और सरकार का अगला रुख देखने की सलाह दी जा रही है।

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