जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की बस के सामने खड़े होने पर डारेज गौर ने अपने कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उन्हें घटना का कोई अफसोस नहीं है और वह अपने अधिकारों के लिए दोबारा भी ऐसा कर सकती हैं।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की बस के सामने खड़े होने को लेकर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर डारेज गौर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन डारेज ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें इस घटना का कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें लगा कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना जरूरी है, तो वह दोबारा भी ऐसा कदम उठा सकती हैं।
दिल्ली पुलिस की बस के सामने क्यों खड़ी हुईं डारेज गौर?
डारेज गौर ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की एक बस के सामने खड़ी दिखाई दे रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के बाद उन्होंने कुछ लोगों को पुलिस की बस को रोकने की कोशिश करते हुए देखा था। उनके अनुसार, बाद में उन लोगों को पुलिस ने बस के अंदर बैठा लिया था।
डारेज ने दावा किया कि उन्हें लगा कि पुलिस की बस का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए किया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने बस के सामने जाकर खड़े होने का फैसला किया। उनका कहना था कि वह जानती थीं कि वह किस स्थिति में खड़ी हो रही हैं और उन्होंने अपनी सामाजिक स्थिति को लेकर भी बात की।
‘पुलिस मुझे छूने से पहले दो बार सोचेगी’
डारेज गौर ने अपने कदम के पीछे अपनी सोच बताते हुए कहा कि उन्हें लगता था कि पुलिस उनके खिलाफ शारीरिक कार्रवाई करने से पहले दो बार सोचेगी। उन्होंने कहा कि उनके पास इतना विशेषाधिकार है कि पुलिस उन्हें छूने से पहले भी विचार करेगी। इसी वजह से उन्होंने बस के ठीक सामने जाकर खड़े होने का फैसला किया।
डारेज के मुताबिक, उनके इस कदम की वजह से बस करीब 10 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने अपने इस कदम को प्रदर्शन के दौरान अपनी ओर से किया गया एक विरोध बताया और कहा कि उन्होंने जो किया, उसके पीछे उनका उद्देश्य अपनी बात रखने और प्रदर्शनकारियों के मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करना था।
वायरल वीडियो पर उठे सवालों का दिया जवाब
डारेज गौर ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर हो रही आलोचना का भी जवाब दिया। कुछ लोगों ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने केवल सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और ध्यान हासिल करने के लिए पुलिस की बस रोकी। इस पर डारेज ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि इस तरह आसानी से ध्यान आकर्षित किया जा सकता है, तो उन्हें भी ऐसा करके देखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वह जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों में करीब 30 बार शामिल हो चुकी हैं। हालांकि, यह पहली बार था जब प्रदर्शन स्थल पर उनकी मौजूदगी से जुड़ा कोई वीडियो इस तरह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। उन्होंने इसी बात का हवाला देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल वायरल होना नहीं था।
‘मेरे वीडियो से आगे मुद्दे को समझिए’
डारेज गौर ने लोगों से अपील की कि वे केवल उनके वायरल वीडियो पर चर्चा करने के बजाय उस मुद्दे पर भी ध्यान दें, जिसके लिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जा रहा था। यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर किया गया था।
डारेज ने अपने बयान में मतदान और विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोग तब तक आवाज नहीं उठाएंगे, जब तक प्रभावित मतदाताओं की संख्या 100 प्रतिशत तक नहीं पहुंच जाती। उनका कहना था कि किसी मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए उसके पूरी तरह गंभीर होने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।
अधिकारों के लिए दोबारा भी ऐसा कदम उठाने की बात
अपने वीडियो के अंत में डारेज गौर ने साफ किया कि वह अपने किए गए कदम को लेकर पछता नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना का कोई अफसोस नहीं है और अगर उन्हें अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना जरूरी लगा तो वह भविष्य में भी ऐसा कदम उठा सकती हैं।
डारेज ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह अपने अधिकारों के लिए एक नहीं, बल्कि कई बसों को रोकने तक के लिए तैयार हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर उनके वायरल वीडियो को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है।
सोशल मीडिया पर जारी है बहस
जंतर-मंतर की घटना से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने डारेज के कदम की आलोचना की, जबकि उन्होंने खुद इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने के तौर पर पेश किया। फिलहाल, उनका बयान इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस को एक नया संदर्भ देता है।
डारेज गौर ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अपने किए गए काम पर कायम हैं। उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक विरोध में मुद्दे पर ध्यान देना जरूरी है और नागरिकों को अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए।