जम्मू-कश्मीर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, 40 देशों की 135 फिल्में होंगी प्रदर्शित

जम्मू-कश्मीर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, 40 देशों की 135 फिल्में होंगी प्रदर्शित

 

जम्मू-कश्मीर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव IFFJK-2026 का आयोजन होगा। श्रीनगर में 40 देशों की करीब 135 फिल्में प्रदर्शित होंगी और बॉलीवुड सितारे शामिल होंगे।

जम्मू-कश्मीर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। घाटी में होने वाला यह आयोजन न सिर्फ सिनेमा प्रेमियों के लिए खास होगा, बल्कि जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय फिल्म पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जम्मू एंड कश्मीर (IFFJK-2026) का आयोजन श्रीनगर में किया जाएगा। चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में भारत समेत करीब 40 देशों की लगभग 135 फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी। आयोजन में देश-विदेश से फिल्म निर्माता, कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ और सिनेमा से जुड़े अन्य मेहमान हिस्सा लेंगे। बॉलीवुड की कई चर्चित हस्तियों के भी इस महोत्सव में पहुंचने की उम्मीद है।

‘रंग-ए-सिनेमा’ थीम पर होगा आयोजन

IFFJK-2026 का विषय ‘रंग-ए-सिनेमा’ रखा गया है, जिसका अर्थ है सिनेमा के रंग। महोत्सव का मुख्य आयोजन सोमवार से श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में होगा। इसके अलावा जम्मू, गुलमर्ग और श्रीनगर के एकमात्र मल्टीप्लेक्स इनॉक्स में भी कुछ कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

आयोजकों के मुताबिक, महोत्सव में करीब 300 मेहमानों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें भारत के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले फिल्मकार और कलाकारों के अलावा कई देशों के अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माता भी शामिल होंगे। स्पेन, जापान, जर्मनी, मैक्सिको, जॉर्डन, फ्रांस और कनाडा समेत कई देशों से फिल्म जगत से जुड़े लोगों के आने की संभावना है।

रमेश सिप्पी और पंकज त्रिपाठी समेत कई सितारों के पहुंचने की उम्मीद

महोत्सव में बॉलीवुड की कई जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें फिल्म निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता पंकज त्रिपाठी और गायिका पलक मुछाल जैसे नाम प्रमुख हैं। रमेश सिप्पी को ‘शोले’ जैसी ऐतिहासिक फिल्म के निर्देशन के लिए जाना जाता है, जबकि पंकज त्रिपाठी हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं।

चार दिवसीय महोत्सव में केवल फिल्मों की स्क्रीनिंग ही नहीं होगी, बल्कि सिनेमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर पैनल चर्चा, मास्टरक्लास और फिल्म निर्माण से संबंधित संवाद भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए फिल्मकारों और सिनेमा के विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण की प्रक्रिया, तकनीक और बदलते फिल्म उद्योग को समझने का अवसर मिलेगा।

जम्मू-कश्मीर की संस्कृति को भी मिलेगा मंच

इस फिल्म महोत्सव का उद्देश्य केवल फिल्मों का प्रदर्शन करना नहीं है। जम्मू-कश्मीर सरकार चाहती है कि देश-विदेश से आने वाले मेहमान यहां की संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय परंपराओं से भी परिचित हों। यही वजह है कि आयोजन स्थलों की सजावट में स्थानीय सांस्कृतिक विषयों और फूलों को प्रमुखता देने की योजना बनाई गई है।

जम्मू-कश्मीर सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) की ओर से इस आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। DIPR की निदेशक श्रेया सिंघल के मुताबिक, देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक मेहमानों के आने की उम्मीद है। सरकार का प्रयास है कि आयोजन में शामिल होने वाले मेहमान जम्मू-कश्मीर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक खूबसूरती का अनुभव कर सकें।

स्थानीय विभाग भी तैयारियों में जुटे

महोत्सव की तैयारियों में जम्मू-कश्मीर के पुष्प विभाग और संस्कृति विभाग भी DIPR का सहयोग कर रहे हैं। मेहमानों के स्वागत और आयोजन स्थलों पर सांस्कृतिक माहौल तैयार करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रमुख स्थानों, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर सांस्कृतिक दलों की तैनाती भी की गई है, ताकि बाहर से आने वाले मेहमानों को शुरुआत से ही जम्मू-कश्मीर की स्थानीय संस्कृति की झलक मिल सके।

सरकार का मानना है कि इस तरह के आयोजन से जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा सकता है। साथ ही, यह क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों को भी देश-विदेश के लोगों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर देगा।

फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश

जम्मू-कश्मीर सरकार इस फिल्म महोत्सव को फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने की बड़ी पहल के तौर पर देख रही है। अधिकारियों का मानना है कि कश्मीर लंबे समय से फिल्मों की शूटिंग के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के जरिए एक बार फिर इस क्षेत्र को फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

DIPR अधिकारियों के मुताबिक, सिनेमा और पर्यटन को एक साथ बढ़ावा देकर जम्मू-कश्मीर में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। सरकार को उम्मीद है कि फिल्मकारों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के अवसर भी विकसित होंगे।

स्थानीय कलाकारों और फिल्मकारों को मिलेगा फायदा

महोत्सव का एक अहम उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के स्थानीय फिल्मकारों, कलाकारों और तकनीशियनों के लिए नए अवसर पैदा करना भी है। अधिकारियों का मानना है कि अगर क्षेत्र में नियमित रूप से फिल्म से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर एक मजबूत और आत्मनिर्भर फिल्म उद्योग का माहौल तैयार हो सकता है।

DIPR के संयुक्त निदेशक शहनवाज बुखारी ने कहा कि सरकार बॉलीवुड और फिल्मों के साथ जम्मू-कश्मीर के पुराने जुड़ाव को फिर से मजबूत करना चाहती है। उनके अनुसार, यह आयोजन फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की गंभीर पहल है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष नजर

इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से कार्यक्रम को सुरक्षित तरीके से आयोजित कराने के लिए तैयारियों की समीक्षा की गई है। कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक सुजीत कुमार ने हाल ही में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक की और महोत्सव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देशों पर चर्चा की।

कुल मिलाकर, IFFJK-2026 जम्मू-कश्मीर में सिनेमा, संस्कृति और पर्यटन को एक साथ जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रहा है। यदि यह आयोजन सफल रहता है, तो इसे भविष्य में वार्षिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किए जाने की उम्मीद है। इससे जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय फिल्म जगत से जोड़ने और स्थानीय प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।

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