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भारतीय ईटीएफ (ETF) निवेश में वित्त वर्ष 2026 में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ ने इक्विटी को पीछे छोड़ते हुए ₹1.81 लाख करोड़ के कुल निवेश में प्रमुख भूमिका निभाई।
भारत में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) के लिए वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। जीरोधा फंड हाउस (Zerodha Fund House) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारतीय निवेशकों ने इस साल ईटीएफ में अभूतपूर्व रुचि दिखाते हुए ₹1.81 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश किया है। यह किसी भी एक वित्तीय वर्ष में दर्ज किया गया अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यहाँ इस वित्तीय उछाल और निवेशकों के बदलते रुझान का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
वित्तीय वर्ष 2025-26: ईटीएफ निवेश के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त
वित्त वर्ष 2026 में हुआ निवेश न केवल रिकॉर्ड-ब्रेकिंग है, बल्कि यह पिछले वर्षों की तुलना में एक बड़ी छलांग को दर्शाता है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल का ₹1.81 लाख करोड़ का निवेश, वित्त वर्ष 2021-22 में देखे गए ₹83,390 करोड़ के पिछले उच्च स्तर से दोगुने से भी अधिक है।
अगर हम पिछले पांच वर्षों (FY21-FY25) के रुझान को देखें, तो वार्षिक निवेश आमतौर पर ₹46,000 करोड़ से ₹83,000 करोड़ के दायरे में रहा था। लेकिन FY26 ने इन सभी सीमाओं को तोड़ते हुए एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारतीय निवेशक अब केवल पारंपरिक निवेश विकल्पों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ईटीएफ जैसे आधुनिक और तरल (liquid) साधनों को तेजी से अपना रहे हैं।
कमोडिटी ईटीएफ का दबदबा: इक्विटी को पीछे छोड़ा
वित्त वर्ष 2026 की सबसे चौंकाने वाली और परिभाषित विशेषता कमोडिटी-लिंक्ड ईटीएफ (Commodity ETFs) का दबदबा रहा। लंबे समय से निवेशकों की पहली पसंद रहने वाले इक्विटी ईटीएफ इस बार गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ से पीछे रह गए। कुल निवेश का आधे से अधिक हिस्सा (लगभग 55 प्रतिशत) सोने और चांदी के ईटीएफ में आया, जो कुल ₹99,280 करोड़ था।
जीरोधा फंड हाउस के सीईओ विशाल जैन के अनुसार, यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक अब ईटीएफ का उपयोग केवल शेयर बाजार में निवेश के लिए नहीं, बल्कि अपने पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) लाने के लिए कर रहे हैं। सोने और चांदी के प्रति यह बढ़ता आकर्षण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की तलाश का परिणाम माना जा रहा है।
सोने की चमक: 5 साल का निवेश एक साल में हुआ पार
गोल्ड ईटीएफ की मांग में आई तेजी वास्तव में असाधारण है। वित्त वर्ष 2026 में हुआ ₹68,868 करोड़ का शुद्ध निवेश, पिछले पांच वर्षों (FY21-FY25) के कुल संचयी निवेश (लगभग ₹30,200 करोड़) से भी दोगुने से अधिक है।
मांग में इस उछाल के कारण गोल्ड ईटीएफ की प्रबंधनाधीन संपत्ति (AUM) में भी भारी वृद्धि हुई है। मार्च 2025 में जो एयूएम ₹59,000 करोड़ था, वह मार्च 2026 तक बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ के पार पहुँच गया। इसके पीछे मुख्य कारण सोने की बढ़ती कीमतें और निवेशकों का सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर झुकाव है।
टैक्स दक्षता और सुगमता: ईटीएफ की लोकप्रियता के मुख्य कारण
ईटीएफ की इस भारी सफलता के पीछे केवल बाजार की स्थिति नहीं, बल्कि इसके टैक्स लाभ भी हैं। गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ भौतिक सोने (Physical Gold) की तुलना में अधिक टैक्स-कुशल हैं। जहां भौतिक सोने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के लिए 24 महीने की होल्डिंग अवधि आवश्यक है, वहीं ईटीएफ में यह अवधि केवल 12 महीने है।
इसके अतिरिक्त, ईटीएफ को स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदना और बेचना बेहद आसान है, इसमें सुरक्षा की चिंता नहीं होती और निवेश की लागत (Expense Ratio) भी कम होती है। इन्ही कारणों से भारतीय निवेशकों के लिए ईटीएफ अब ‘न्यू नॉर्मल’ बनता जा रहा है।