भारत और इंग्लैंड के बीच महिला टी20 सीरीज का निर्णायक मुकाबला आज। टीम इंडिया की मध्यक्रम की समस्याओं और विश्व कप की तैयारियों पर एक नज़र।
महिला क्रिकेट के रोमांचक दौर में, भारतीय टीम मंगलवार को इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के तीसरे और अंतिम निर्णायक मुकाबले के लिए मैदान पर उतरेगी। फिलहाल सीरीज 1-1 की बराबरी पर है, और यह मैच केवल एक द्विपक्षीय सीरीज जीतने का अवसर नहीं है, बल्कि यह इस महीने के अंत में होने वाले महिला टी20 विश्व कप से पहले टीम इंडिया के लिए एक ‘ड्रेस रिहर्सल’ भी है। अंग्रेजी परिस्थितियों में अपनी सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग इलेवन और सही संयोजन की पहचान करने के लिए यह मैच भारतीय प्रबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बल्लेबाजी में निरंतरता: यस्तिका और जेमिमा की शानदार फॉर्म
सीरीज के पहले दो मैचों में भारतीय बल्लेबाजों ने मिले-जुले संकेत दिए हैं। यस्तिका भाटिया इस सीरीज में भारत की सबसे निरंतर बल्लेबाज के रूप में उभरी हैं, जिन्होंने एक अर्धशतक और एक उपयोगी 30-प्लस की पारी खेलकर टीम को अच्छी शुरुआत दी है। उनके अलावा, जेमिमा रोड्रिग्स ने भी एक अर्धशतक जड़कर अपनी फॉर्म का परिचय दिया है। वहीं, अनुभवी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और युवा तूफानी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने दूसरे मैच में अच्छी शुरुआत के संकेत दिए हैं। हालांकि, टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलना और अंतिम ओवरों में गति बनाए रखना है।
मध्यक्रम और ‘फिनिशर’ की चिंता
टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी समस्या अंतिम पांच ओवरों में रन गति का गिरना है। पहले मैच में, जहां भारत 188 के स्कोर तक पहुंचा था, वहीं अंतिम पांच ओवरों में केवल 40 रन ही बन सके। दूसरे मैच में स्थिति और भी खराब रही, जहां भारत एक समय 169 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 70/1 की मजबूत स्थिति में था, लेकिन अंतिम ओवरों में टीम का पतन हुआ और 16 से 20 ओवर के बीच केवल 28 रन पर पांच विकेट गिर गए।
इन चुनौतियों को देखते हुए अब टीम प्रबंधन की निगाहें दीप्ति शर्मा और ऋचा घोष पर टिकी हैं। ऋचा घोष, जिन्हें टीम की ‘बिग-हिटर’ माना जाता है, अब तक इस सीरीज में कोई बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ पाई हैं। भारत के पास निचले मध्यक्रम में साबित हो चुके ‘सिक्स-हिटर्स’ की कमी है, जो अंतिम ओवरों में टीम के स्कोर को 190-200 के जादुई आंकड़े तक पहुँचा सकें। महिला क्रिकेट में यह स्कोर अक्सर मैच जीतने वाला होता है, और इसके लिए कप्तान हरमनप्रीत कौर को खुद जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्हें क्रीज पर टिककर पारी को अंत तक ले जाने और बड़े शॉट्स लगाने की भूमिका निभानी होगी।
पिच और परिस्थितियों का फायदा
जेमिमा रोड्रिग्स, जिन्हें ‘वीमेंस सुपर लीग’ में खेलने का अच्छा खासा अनुभव है, का मानना है कि मैदान की पिच बल्लेबाजी के लिए बेहद अनुकूल है। मैच से पहले संवाददाताओं से बात करते हुए जेमिमा ने कहा, “मैंने यहां पहले भी सुपर लीग में खेला है और मुझे यहां बल्लेबाजी करने की अच्छी यादें हैं। पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत शानदार है और परिस्थितियां भी खेल के अनुकूल हैं।” जेमिमा का यह सकारात्मक नजरिया टीम इंडिया के लिए प्रेरणा का काम कर सकता है। अगर भारतीय बल्लेबाज इस पिच पर अपनी तकनीक और संयम का सही तालमेल बिठा पाएं, तो वे एक बड़ा स्कोर खड़ा करने में सक्षम हैं।
विश्व कप की तैयारियों की परीक्षा
यह सीरीज भारत के लिए यह समझने का बेहतरीन अवसर है कि इंग्लैंड की तेज और उछाल भरी पिचों पर भारतीय खिलाड़ी कैसे ढलती हैं। विश्व कप से पहले, टीम इंडिया की कमजोरियों को दूर करना ही इस सीरीज का मुख्य उद्देश्य है। निर्णायक मैच में जीत का मतलब न केवल सीरीज जीतना होगा, बल्कि खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी सातवें आसमान पर होगा, जो आगामी विश्व कप के बड़े टूर्नामेंट से पहले बहुत जरूरी है।
जीत का मंत्र
तीसरे टी20 में भारत के लिए जीत की कुंजी मध्यक्रम की स्थिरता और अंतिम ओवरों में आक्रामकता है। दीप्ति शर्मा की बल्लेबाजी और ऋचा घोष की पावर-हिटिंग टीम के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। अगर कप्तान हरमनप्रीत कौर और अन्य बल्लेबाज जिम्मेदारी के साथ खेलें, तो भारतीय महिला टीम इस सीरीज को अपने नाम कर सकती है। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत अपनी गलतियों से सबक लेकर निर्णायक मुकाबले में एक बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर पाता है या नहीं।