प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत-सेशेल्स ने 19 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए। रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हुई यह तीन दिवसीय राजकीय यात्रा केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक भविष्योन्मुखी साझेदारी की नींव है। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद, दोनों देशों ने 19 प्रमुख समझौतों और विकास पहलों की घोषणा की, जो रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों को कवर करते हैं।
रणनीतिक सुरक्षा और समुद्री सहयोग
हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच सेशेल्स के साथ भारत का रक्षा सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत ने सेशेल्स को एक ‘फास्ट पेट्रोल वेसल’ (Fast Patrol Vessel) उपहार में देने की घोषणा की है, जो सेशेल्स की समुद्री सीमाओं की रक्षा और समुद्री डकैती जैसे खतरों से निपटने में सक्षम होगा। इसके अलावा, सेशेल्स डिफेंस फोर्स को 10 यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल क्लास की नावें सौंपना सुरक्षा सहयोग को और अधिक व्यावहारिक बनाता है। सेशेल्स कोस्ट गार्ड के लिए ‘PS जोरोएस्टर’ की मरम्मत और डोर्नियर विमान के अपग्रेड का निर्णय इस बात को सुनिश्चित करता है कि सेशेल्स के पास हिंद महासागर की सुरक्षा के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध हों। ये कदम भारत के ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) विजन को मजबूती प्रदान करते हैं।
आर्थिक कनेक्टिविटी और डिजिटल क्रांति
इस यात्रा का एक और मुख्य आकर्षण डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में हुई प्रगति है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सेंट्रल बैंक ऑफ सेशेल्स के बीच हुआ समझौता भारत की ‘डिजिटल सॉफ्ट पावर’ का विस्तार है। इससे सेशेल्स में UPI आधारित भुगतान प्रणाली लागू होगी, जो न केवल वहां के स्थानीय व्यापार को डिजिटल बनाएगी बल्कि भारत से जाने वाले पर्यटकों और वहां रहने वाले प्रवासियों के लिए आर्थिक लेनदेन को बेहद सुगम कर देगी। 1,250 करोड़ रुपये की ‘अंब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट’ (Line of Credit) के माध्यम से भारत सेशेल्स को प्राथमिकता वाले विकास प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता देगा, जो वहां की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।
स्वास्थ्य सेवा में आत्मनिर्भरता: ‘जन औषधि’ का विस्तार
स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की मदद से सेशेल्स के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है। भारत के ‘जन औषधि योजना’ के तहत HLL लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुआ समझौता, वहां उच्च गुणवत्ता वाली सस्ती भारतीय दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, नए नेशनल हॉस्पिटल के निर्माण की दिशा में शुरुआती तैयारियां शुरू करना भारत की ‘हेल्थ डिप्लोमेसी’ का हिस्सा है। भारतीय पैरामेडिक्स की तैनाती और टेक्नीशियनों को ट्रेनिंग देना यह दर्शाता है कि भारत केवल संसाधन नहीं दे रहा, बल्कि सेशेल्स में तकनीकी क्षमता (Capacity Building) का निर्माण भी कर रहा है।
शिक्षा, कृषि और भविष्योन्मुखी तकनीक
भारत और सेशेल्स ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और नाविकों की ट्रेनिंग जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग का विस्तार किया है। ‘प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर’ के वर्चुअल शिलान्यास से युवाओं के कौशल विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही, बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए हुआ समझौता दोनों देशों को तकनीकी रूप से और करीब लाएगा। राष्ट्रपति हर्मिनी का साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर बनाने का प्रस्ताव और भारत द्वारा उस पर सकारात्मक विचार व्यक्त करना यह स्पष्ट करता है कि यह साझेदारी केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार है।
साझा भविष्य की ओर बढ़ते कदम
यह 50 वर्षों की साझेदारी का एक तार्किक निष्कर्ष है कि भारत आज सेशेल्स के लिए केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि विकास का एक भरोसेमंद साथी बन गया है। जहां एक ओर 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट जैसी सामग्री से बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल पेमेंट जैसे समझौतों से दोनों देशों की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूती मिल रही है। यह दौरा इस बात को पुख्ता करता है कि हिंद महासागर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और सेशेल्स का साथ आना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। आने वाले वर्षों में, ये 19 समझौते न केवल द्विपक्षीय संबंधों को गहराई देंगे, बल्कि दोनों देशों को एक ‘रंगले और विकसित भविष्य’ की ओर ले जाएंगे।