जुलाई की शुरुआत के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों में मानसून ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। यहाँ मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी की गई चेतावनियों और राज्यवार मौसम के मिजाज का विस्तृत विवरण दिया गया है:
जुलाई का महीना शुरू होते ही पूरे देश में मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है, लेकिन इसका सबसे विकराल रूप महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने 7 जुलाई के लिए महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का ‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है। मूसलाधार बारिश की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और लोगों को बिना किसी जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन टीमों को भी तैनात कर दिया गया है।
महाराष्ट्र में अचानक क्यों बढ़ी आफत?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अप्रत्याशित और भीषण बारिश के पीछे दो मुख्य मौसमी प्रणालियाँ (Weather Systems) काम कर रही हैं। पहला, झारखंड और छत्तीसगढ़ के ऊपर बना एक कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) तेजी से आगे बढ़ रहा है। दूसरा, अरब सागर से आने वाली अत्यधिक नमी वाली तेज हवाएं इस सिस्टम को लगातार ऊर्जा दे रही हैं। इन दोनों के संयोजन के कारण महाराष्ट्र के तटीय इलाकों और विशेष रूप से घाट क्षेत्रों में बारिश का सिस्टम बेहद मजबूत हो गया है। इसी का नतीजा है कि राज्य के बड़े हिस्से में रिकॉर्ड तोड़ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है।
मुंबई, ठाणे और कोंकण क्षेत्र में भारी जलभराव की आशंका
मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ जैसे तटीय जिलों में सुबह से ही घने काले बादलों ने डेरा डाल रखा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इन क्षेत्रों में दिनभर रुक-रुक कर तेज और मूसलाधार बारिश होती रहेगी। मुंबई, ठाणे, पालघर के साथ-साथ कोंकण क्षेत्र के रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और पुणे के घाट क्षेत्रों में ‘अत्यधिक भारी बारिश’ होने की प्रबल संभावना है। तटीय इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठने की भी आशंका है, जिसके कारण मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। शहरी इलाकों में स्थानीय ट्रेनों और सड़क यातायात पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
दिल्ली-NCR में सुहावना मौसम और तेज हवाओं का दौर
देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मानसून की दस्तक के बाद से ही मौसम काफी खुशनुमा बना हुआ है। तपती गर्मी से राहत मिलने के बाद अब यहां नियमित अंतराल पर बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, 7 जुलाई को दिल्ली-NCR में सुबह या दोपहर के समय हल्की से मध्यम स्तर की बारिश होने के आसार हैं। इस दौरान करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं (Gusty Winds) चल सकती हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। आंधी और पानी का यह सिलसिला 8 और 9 जुलाई को भी जारी रहने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में आकाशीय बिजली का खतरा
उत्तर प्रदेश और बिहार में भी मानसून की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। यूपी के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और मेरठ समेत पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही क्षेत्रों में 7 से 12 जुलाई तक लगातार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दूसरी ओर, बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में मौसम विभाग ने एक विशेष चेतावनी जारी की है। बिहार में आज भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने की गंभीर आशंका है। इसके साथ ही 40 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं आम जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए लोगों को पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने को कहा गया है।
राजस्थान और झारखंड में मौसम का मिजाज बिगड़ा
रेगिस्तानी राज्य राजस्थान में भी इस बार मानसून मेहरबान दिख रहा है। जयपुर, उदयपुर और जोधपुर समेत राज्य के कई जिलों में 7 से 12 जुलाई तक मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी राजस्थान में 9 जुलाई तक अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के शुष्क इलाकों में भी 7-8 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। उधर झारखंड में, रांची और जमशेदपुर समेत कई हिस्सों में बने डिप्रेशन (Depression) के असर से 12 जुलाई तक लगातार बारिश का दौर जारी रहेगा। इस दौरान बिजली गिरने और 40 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है।
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन (Landslide) का हाई अलर्ट
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मानसून हमेशा अपने साथ बड़ी चुनौतियाँ लेकर आता है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही राज्यों में 7 से 12 जुलाई तक व्यापक और भीषण बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड और हिमाचल में 7 जुलाई को कुछ स्थानों पर ‘बादल फटने’ जैसी स्थिति या अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है। इसके कारण संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslide) और अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) का खतरा काफी बढ़ गया है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदी-नालों के पास न जाने और पहाड़ों की यात्रा से बचने की सलाह दी है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर और जम्मू समेत कई जिलों में भी 12 जुलाई तक गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।