रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साइप्रस के रक्षा मंत्री वासिलिस पाल्मास से मुलाकात की। दोनों देशों ने रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
भारत और साइप्रस ने रक्षा और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाओं पर जोर दिया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साइप्रस के रक्षा मंत्री वासिलिस पाल्मास से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की संभावनाओं को विस्तार देने और नए क्षेत्रों में साझेदारी विकसित करने पर चर्चा की। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों ने स्वीकार किया कि रक्षा और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग की अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका पूरा लाभ उठाया जाना बाकी है। बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। इस दौरान समुद्री सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के बीच साझा हितों के प्रमुख क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह 12 से 15 अक्टूबर तक साइप्रस और ग्रीस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करना, रक्षा उद्योग में सहयोग की संभावनाएं तलाशना और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाना है। रक्षा मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को यात्रा से संबंधित जानकारी साझा करते हुए कहा था कि साइप्रस और ग्रीस के साथ होने वाली चर्चाओं में समुद्री सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग प्रमुख विषय रहेंगे। भारत की यह पहल यूरोप के मित्र देशों के साथ रक्षा संबंधों को विस्तार देने और साझा सुरक्षा हितों पर सहयोग बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।
समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर भारत का विशेष जोर
साइप्रस के रक्षा मंत्री वासिलिस पाल्मास के साथ बैठक में समुद्री सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। भारत ने साइप्रस के साथ समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, विशेषज्ञ स्तर पर संवाद और तकनीकी सहायता के माध्यम से सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत अपने तटीय सुरक्षा अनुभव और समुद्री सहयोग से जुड़ी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए साइप्रस के साथ साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहता है। समुद्री सुरक्षा आज अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, तटीय क्षेत्रों की निगरानी, समुद्री गतिविधियों से जुड़ी चुनौतियों का सामना और संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। भारत के लिए भी समुद्री सुरक्षा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसका व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक समुद्री मार्गों पर निर्भर है। ऐसे में मित्र देशों के साथ अनुभव और विशेषज्ञता साझा करना व्यापक समुद्री सहयोग को मजबूत करने में मददगार हो सकता है। साइप्रस के साथ बातचीत में इसी दिशा में संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया। हालांकि, बैठक में किसी विशेष नई रक्षा परियोजना या समझौते की घोषणा नहीं की गई, लेकिन दोनों पक्षों ने सहयोग के मौजूदा ढांचे को आगे बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित किया।
रक्षा उद्योग में साझेदारी को मजबूत करने की तैयारी
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 13 अक्टूबर को साइप्रस गणराज्य के स्थायी सचिव स्टेलियोस काउंटूरिस और वहां के आयुध निदेशालय के अधिकारियों से भी मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। रक्षा उद्योग किसी भी देश की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इस क्षेत्र में साझेदारी से तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने, रक्षा उपकरणों से जुड़ी क्षमताओं को विकसित करने और संबंधित संस्थाओं के बीच संपर्क बढ़ाने के अवसर पैदा हो सकते हैं। भारत पिछले कुछ वर्षों में अपने रक्षा उत्पादन और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर देता रहा है। ऐसे में साइप्रस जैसे मित्र देशों के साथ रक्षा उद्योग से जुड़े संवाद का विस्तार दोनों पक्षों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग की मौजूदा संभावनाओं और उन्हें आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया गया। भारत ने समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और तकनीकी सहायता के माध्यम से सहयोग करने की अपनी तत्परता भी जाहिर की। इस तरह दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को केवल उच्चस्तरीय बैठकों तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों और संस्थागत संपर्कों के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
साइप्रस नेशनल गार्ड के प्रमुख से भी मिले रक्षा सचिव
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साइप्रस गणराज्य के नेशनल गार्ड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इमैनुएल थियोडोरू के साथ भी अलग से बैठक की। इस दौरान द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा सहयोग तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। नेशनल गार्ड साइप्रस की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उसके प्रमुख के साथ हुई बातचीत से दोनों पक्षों को सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताओं और सहयोग की संभावनाओं पर विचार साझा करने का अवसर मिला। भारत और साइप्रस के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए इस तरह का संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में देशों के बीच नियमित संपर्क और विचारों का आदान-प्रदान साझा चुनौतियों को समझने में मदद करता है। रक्षा सचिव की यात्रा में राजनीतिक नेतृत्व, रक्षा मंत्रालय और सैन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठकों ने सहयोग के विभिन्न स्तरों को शामिल किया है।
भारत-साइप्रस रक्षा संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश
राजेश कुमार सिंह की साइप्रस यात्रा भारत और यूरोपीय देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा और द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों पक्षों ने माना कि मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। समुद्री सुरक्षा में क्षमता निर्माण, विशेषज्ञों के बीच संपर्क और तकनीकी सहयोग ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भविष्य में व्यावहारिक प्रगति की जा सकती है। इसके साथ ही रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने से दोनों देशों के संबंधित संस्थानों के बीच संवाद और व्यापक हो सकता है। रक्षा सचिव की 12 से 15 अक्टूबर तक निर्धारित साइप्रस और ग्रीस यात्रा में समुद्री सुरक्षा और रक्षा उद्योग प्रमुख विषय बने हुए हैं। आने वाले समय में इन चर्चाओं का वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश पहचाने गए अवसरों को किस तरह ठोस सहयोग कार्यक्रमों में बदलते हैं। फिलहाल, भारत और साइप्रस ने रक्षा संबंधों को मजबूत करने और साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा स्पष्ट की है।