ITR Refund में देरी क्यों? इन 5 वजहों से अटक सकता है Income Tax Refund

ITR Refund में देरी क्यों? इन 5 वजहों से अटक सकता है Income Tax Refund

 

ITR दाखिल करने के बाद Income Tax Refund नहीं आया? जानिए ई-वेरिफिकेशन, बैंक अकाउंट, IFSC और प्री-वैलिडेशन से जुड़ी कौन-सी गलतियां रिफंड में देरी कर सकती हैं।

इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करने के बाद अगर आपने रिफंड का दावा किया है, तो स्वाभाविक है कि आप उसके बैंक खाते में आने का इंतजार करें। कई टैक्सपेयर्स को रिटर्न प्रोसेस होने के कुछ समय बाद रिफंड मिल जाता है, जबकि कुछ मामलों में इसमें ज्यादा वक्त लग सकता है। हालांकि, ITR दाखिल करने के बाद रिफंड आने में देरी का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आपके रिटर्न में कोई गलती है। कई बार विभागीय प्रोसेसिंग, ई-वेरिफिकेशन, बैंक खाते की जानकारी या अन्य तकनीकी कारणों से रिफंड में समय लग सकता है। इनकम टैक्स विभाग के अनुसार, रिफंड की प्रोसेसिंग तभी शुरू होती है जब ITR का ई-वेरिफिकेशन पूरा हो जाता है। आम तौर पर रिफंड क्रेडिट होने में करीब चार से पांच सप्ताह का समय लग सकता है। इसलिए अगर आपने हाल ही में ITR दाखिल किया है और अभी तक रिफंड नहीं मिला है, तो तुरंत परेशान होने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि आपका रिटर्न सही तरीके से वेरिफाई हुआ है या नहीं और बैंक खाते की जानकारी ठीक है या नहीं।

ITR का ई-वेरिफिकेशन नहीं हुआ तो रिफंड अटक सकता है

ITR दाखिल करना प्रक्रिया का पहला चरण है। केवल रिटर्न फाइल कर देने से रिफंड की प्रक्रिया अपने आप शुरू नहीं होती। इसके लिए ITR का ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी है। अगर किसी कारण से टैक्सपेयर्स ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन नहीं करते हैं, तो उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत हस्ताक्षर किया हुआ ITR-V सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर यानी CPC तक भेजना होता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, ITR दाखिल करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन या ITR-V जमा करना जरूरी है। अगर रिटर्न समय पर वेरिफाई नहीं हुआ है, तो रिफंड की प्रोसेसिंग शुरू नहीं होगी। इसलिए रिटर्न दाखिल करने के बाद टैक्सपेयर्स को अपने ई-फाइलिंग अकाउंट में जाकर यह जरूर देख लेना चाहिए कि उनका ITR सफलतापूर्वक वेरिफाई हुआ है या नहीं।

बैंक खाते की जानकारी में गलती भी बन सकती है वजह

इनकम टैक्स रिफंड में देरी या रिफंड फेल होने की एक बड़ी वजह बैंक खाते से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी हो सकती है। रिटर्न दाखिल करते समय टैक्सपेयर्स को उस बैंक खाते की जानकारी देनी होती है, जिसमें वह रिफंड प्राप्त करना चाहते हैं। अगर बैंक अकाउंट नंबर, IFSC कोड या अन्य विवरण गलत दर्ज हो गया है, तो रिफंड उस खाते में क्रेडिट होने में परेशानी आ सकती है। इसलिए ITR दाखिल करने से पहले बैंक डिटेल्स को अच्छी तरह जांचना जरूरी है।

बैंक अकाउंट का Pre-Validation है जरूरी

टैक्सपेयर्स को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि रिफंड पाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बैंक अकाउंट इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड हो। विभाग की ओर से भी बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट करने की सलाह दी जाती है। प्री-वैलिडेशन से बैंक खाते की जानकारी को सत्यापित करने में मदद मिलती है और रिफंड क्रेडिट की प्रक्रिया सुचारु हो सकती है। अगर बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट नहीं है, तो टैक्सपेयर्स को ई-फाइलिंग पोर्टल पर इसकी स्थिति जांचनी चाहिए। किसी दूसरे खाते में रिफंड लेने की जरूरत होने पर उपलब्ध विकल्पों के अनुसार बैंक खाते की जानकारी अपडेट भी की जा सकती है।

गलत अकाउंट नंबर या IFSC से फेल हो सकता है रिफंड

अगर ITR में दिया गया बैंक अकाउंट नंबर गलत है या IFSC कोड में गलती है, तो रिफंड क्रेडिट होने में समस्या आ सकती है। कई बार बैंक खाते से जुड़ी अन्य तकनीकी वजहों के कारण भी भुगतान सफल नहीं हो पाता। इसलिए टैक्सपेयर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बैंक खाते की जानकारी बिल्कुल सही हो। खासतौर पर रिफंड की उम्मीद रखने वाले लोगों को ITR फाइल करने के बाद अपने बैंक अकाउंट और ई-फाइलिंग पोर्टल पर दर्ज जानकारी का मिलान कर लेना चाहिए।

रिफंड में देरी हो तो तुरंत घबराने की जरूरत नहीं

ITR दाखिल करने और रिफंड प्राप्त होने के बीच कुछ समय लगना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक, रिटर्न के ई-वेरिफिकेशन के बाद रिफंड प्रोसेस होने में सामान्य तौर पर चार से पांच सप्ताह तक का समय लग सकता है। इसलिए अगर इस अवधि के भीतर रिफंड नहीं आया है, तो पहले अपने ITR का स्टेटस और ई-वेरिफिकेशन की स्थिति जांचें। इसके बाद बैंक अकाउंट की जानकारी और प्री-वैलिडेशन स्टेटस भी देखना चाहिए।

ITR फाइल करने के बाद इन बातों का रखें ध्यान

टैक्सपेयर्स को ITR दाखिल करने के बाद कुछ जरूरी चीजों की जांच जरूर करनी चाहिए। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि ITR सफलतापूर्वक ई-वेरिफाई हो गया है। अगर ई-वेरिफिकेशन नहीं हुआ है, तो निर्धारित समयसीमा के भीतर इसे पूरा करें। इसके बाद रिफंड पाने के लिए चुने गए बैंक अकाउंट का नंबर, IFSC और अन्य विवरण जांचें। साथ ही यह भी देखें कि बैंक अकाउंट ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड है या नहीं। अगर रिफंड फेल हो जाता है, तो टैक्सपेयर्स को पोर्टल पर उपलब्ध रिफंड स्टेटस और संबंधित निर्देशों के अनुसार जरूरी कदम उठाने चाहिए।

कुल मिलाकर, ITR दाखिल करने के तुरंत बाद रिफंड न मिलना अपने आप में किसी गलती का संकेत नहीं है। ई-वेरिफिकेशन में देरी, बैंक खाते की गलत जानकारी या अकाउंट के प्री-वैलिडेशन से जुड़ी समस्या रिफंड को प्रभावित कर सकती है। इसलिए टैक्सपेयर्स को धैर्य रखने के साथ-साथ अपने ITR और बैंक डिटेल्स की स्थिति नियमित रूप से जांचनी चाहिए। अगर सामान्य प्रोसेसिंग अवधि बीतने के बाद भी रिफंड नहीं मिलता है, तो इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिफंड स्टेटस और संबंधित कारण की जांच करना सबसे सही कदम होगा।

 

 

 

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