असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग की। उन्होंने बहुविवाह, मुस्लिम महिलाओं के अधिकार और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर भी बयान दिया।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने देशभर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के अभाव में मुस्लिम महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरमा के मुताबिक, विवाह, तलाक और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर एक समान कानून होना जरूरी है, ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में रविवार शाम पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बयान दिया। हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम में समान नागरिक संहिता को लेकर कदम उठाए जा चुके हैं और इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से बहुविवाह जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था इन समस्याओं से निपटने में मददगार हो सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है। यूसीसी का उद्देश्य विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में समान नियम लागू करना है। हालांकि, इसके स्वरूप और संभावित प्रभावों को लेकर राजनीतिक दलों तथा विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं।
क्या है समान नागरिक संहिता और क्यों हो रही है चर्चा?
समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड ऐसी कानूनी व्यवस्था की अवधारणा है, जिसके तहत देश के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत नागरिक मामलों में समान नियम लागू किए जाने की बात कही जाती है। वर्तमान में भारत में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े कुछ मामलों में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं। यूसीसी के समर्थकों का तर्क है कि एक समान कानून से लैंगिक समानता मजबूत होगी और महिलाओं को समान अधिकार मिल सकेंगे। वहीं, इसके आलोचक धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक विविधता और समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर सवाल उठाते हैं। हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने बयान में मुस्लिम महिलाओं की स्थिति पर जोर देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता के अभाव में उन्हें अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बहुविवाह को उन मुद्दों में शामिल किया, जिनके समाधान के लिए साझा कानूनी व्यवस्था की जरूरत है। गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अंतर्गत उल्लिखित है। इसमें राज्य से नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने की अपेक्षा की गई है।
विपक्ष पर भी साधा निशाना, बोले- वोट से मिलती है सत्ता
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध और सरकार बदलने की मांग से जुड़े राजनीतिक बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता वोटों के माध्यम से मिलती है, न कि दबाव या जोर-जबरदस्ती के जरिए। सरमा ने कहा कि जो लोग डराने-धमकाने के माध्यम से सरकार बदलने की उम्मीद करते हैं, उन्हें बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रम पर नजर डालनी चाहिए। उनके इस बयान का उद्देश्य विपक्ष के उन राजनीतिक प्रयासों पर सवाल उठाना था, जिनके तहत सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर दावा किया कि इसमें केवल 5,000 से 10,000 लोग शामिल हुए थे। हालांकि, यह संख्या उनके द्वारा दिया गया दावा है। एसआईआर को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दल मतदाता सूची की प्रक्रिया, उसके प्रभाव और चुनावी पारदर्शिता से संबंधित मुद्दे उठा रहे हैं, जबकि इस प्रक्रिया के समर्थक इसे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने का प्रयास बताते हैं। सरमा के बयान से स्पष्ट है कि उन्होंने इस विवाद को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनाव के जरिए सत्ता हासिल करने के सिद्धांत से जोड़कर पेश किया।
कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर जताया दुख
हिमंत बिस्वा सरमा ने कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि घटना के बाद सरकार ने तत्काल संज्ञान लिया और घायलों के उपचार की व्यवस्था की। मुख्यमंत्री के मुताबिक, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी कदम भी उठाए जा रहे हैं। दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न पूजा पंडालों में पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ का प्रबंधन, प्रवेश और निकास के उचित रास्ते, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं तथा सुरक्षा इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन में प्रशासन के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रहे और आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किए जा सकें। सरमा ने इस घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के उपचार और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों का उल्लेख किया। हालांकि, घटना में घायल लोगों की संख्या और भगदड़ के विस्तृत कारणों के संबंध में उन्होंने इस बातचीत में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।
बीजेपी नेता हरीश द्विवेदी के परिवार से मिलने पहुंचे सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी के परिवार से मिलने पहुंचे थे। वह अयोध्या से सड़क मार्ग के जरिए बस्ती जिले के तेलियाजोत गांव स्थित द्विवेदी के आवास पहुंचे। यहां उन्होंने हरीश द्विवेदी की दिवंगत मां के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने समान नागरिक संहिता, विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों और कोलकाता की भगदड़ की घटना से जुड़े सवालों पर अपनी राय रखी। उनके बयान में जहां यूसीसी को देशभर में लागू करने की मांग प्रमुख रही, वहीं विपक्ष की राजनीति और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। कुल मिलाकर, बस्ती में दिया गया सरमा का यह बयान सामाजिक कानूनों, चुनावी राजनीति और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर चर्चा में है।