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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विजन-2047 के तहत शिक्षा विभाग को नई शिक्षा नीति लागू करने के निर्देश दिए। 2028 तक मॉडर्न संस्कृति कॉलेज और 50% स्किल कोर्स का लक्ष्य।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ‘हरियाणा विजन-2047’ के रोडमैप पर मुहर लगा दी है। चंडीगढ़ में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि वे नई शिक्षा नीति (NEP-2020) को आधार बनाकर अगले 5 वर्षों के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करें।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित हरियाणा’ के सपने को साकार करने में शिक्षा विभाग की भूमिका सबसे अहम होगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ 5-वर्षीय कार्यान्वयन रोडमैप (Roadmap) की समीक्षा करते हुए उच्चतर शिक्षा पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि युवाओं को गुणवत्तायुक्त और रोजगारपरक शिक्षा सुलभ कराना है।
50 प्रतिशत सकल नामांकन (GER) का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि वर्तमान में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrollment Ratio) को बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 50 प्रतिशत किया जाए। वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 31 प्रतिशत है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया जाएगा।
2028 तक तैयार होंगे मॉडर्न संस्कृति महाविद्यालय
नई शिक्षा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वर्ष 2028 तक प्रदेश के सभी जिलों में मॉडर्न संस्कृति महाविद्यालयों के कैंपस तैयार कर लिए जाएंगे। ये संस्थान आधुनिक शिक्षण उपकरणों और तकनीक से लैस होंगे। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 4 नए पॉलिटेक्निक संस्थान खोलने के भी निर्देश दिए।
कौशल विकास और विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहन
रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव के निर्देश दिए हैं। अब 50 प्रतिशत कोर्स कौशल विकास (Skill-based) से संबंधित होंगे, ताकि शिक्षा पूरी करने के बाद युवाओं को सीधे रोजगार मिल सके। साथ ही, बेहतर प्रदर्शन करने वाले और नवाचार को बढ़ावा देने वाले विश्वविद्यालयों को 5-5 करोड़ रुपए की विशेष ग्रांट देने का भी निर्णय लिया गया है।
छात्राओं की ड्रॉपआउट दर में आएगी कमी
बेटियों की शिक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्राओं की ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। शिक्षा संस्थानों में छात्राओं के लिए सुरक्षित परिवहन, छात्रावास और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया है ताकि कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे।