हरियाणा की पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना के तहत 31 अगस्त 2026 तक 19.91 लाख पशुओं का बीमा हुआ। 32,679 दावों में ₹123.68 करोड़ का भुगतान किया गया।
हरियाणा सरकार पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाने के लिए लगातार योजनाओं का विस्तार कर रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना पशुपालकों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत पशुधन का बीमा कराकर पशुपालकों को अप्रत्याशित नुकसान की स्थिति में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सामान्य वर्ग के पशुपालकों को 85% सहायता
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, योजना के तहत सामान्य वर्ग के पशुपालकों को बीमा प्रीमियम राशि पर 85 प्रतिशत सरकारी सहायता दी जा रही है। वहीं, अनुसूचित जाति परिवारों के लिए बीमा प्रीमियम पर 100 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है। इससे पशुपालकों पर बीमा कराने का आर्थिक बोझ कम होता है और पशुधन से जुड़े जोखिमों के खिलाफ उन्हें सुरक्षा मिलती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक हरियाणा में 19.91 लाख पशुओं का बीमा किया जा चुका है। वहीं, वर्ष 2018-19 से 31 अगस्त 2026 तक 32,679 पशुधन बीमा दावों का निपटारा किया गया है। इन दावों के तहत पशुपालकों को कुल ₹123.68 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई है।
पशुपालन को लाभकारी स्वरोजगार बनाने पर जोर
“हरियाणा में ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना’ पशुपालकों के लिए बड़ी आर्थिक सुरक्षा बनकर उभरी है। इसके तहत सामान्य श्रेणी के पशुपालकों के लिए प्रीमियम राशि पर 85 प्रतिशत, जबकि अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए 100 प्रतिशत सहायता सरकार द्वारा दी जा रही है।
31…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) September 19, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य केवल पशुपालकों की आय बढ़ाना नहीं है, बल्कि पशुधन की उत्पादकता, स्वास्थ्य और नस्ल सुधार को भी बढ़ावा देना है। सरकार पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण परिवारों के लिए नए स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दे रही है।
राज्य में पशुपालन को आर्थिक गतिविधि के रूप में मजबूत करने के लिए बीमा के साथ-साथ पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड, बेहतर पशु चिकित्सा सेवाओं और नस्ल सुधार से जुड़ी पहलों पर भी काम किया जा रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 तक हरियाणा में 2.31 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए थे और करीब ₹3,478 करोड़ की राशि वितरित की गई थी।
पशुधन की उत्पादकता और स्वास्थ्य पर फोकस
हरियाणा सरकार पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ पशुओं के स्वास्थ्य और नस्ल सुधार को भी प्राथमिकता दे रही है। बेहतर नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने, पशु चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने जैसी गतिविधियों को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
सरकार की ओर से पशुपालन क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य पशुपालकों को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अधिक उत्पादक और टिकाऊ आय के अवसर उपलब्ध कराना है।
ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार का अवसर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। बीमा सुरक्षा मिलने से पशुपालकों को पशुधन से जुड़े जोखिमों का सामना करने में आर्थिक सहारा मिलता है। वहीं, वित्तीय सहायता, क्रेडिट सुविधा और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।
हरियाणा सरकार की रणनीति में पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने, पशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने और नस्ल सुधार के जरिए डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर फोकस है। इस दिशा में बीमा योजना को पशुपालकों की वित्तीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने की कोशिश
पंडित दीन दयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना के तहत अब तक हुए बीमा और दावों के निपटारे के आंकड़े बताते हैं कि योजना का दायरा काफी बड़ा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार का लक्ष्य पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देना भी है।
इस पहल के जरिए हरियाणा में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के अधिक संगठित और रोजगारपरक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। सरकार का जोर पशुपालकों की आय, पशुधन की उत्पादकता, स्वास्थ्य और नस्ल सुधार को एक साथ आगे बढ़ाने पर है।