“मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा को डेंगू मरीजों के लिए नि:शुल्क प्लेटलेट्स उपलब्ध कराने वाला उत्तर भारत का पहला राज्य घोषित किया है। सरकार डेंगू इलाज के लिए 11,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दे रही है।”
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करते हुए राज्य को उत्तरी भारत का नेतृत्व करने वाला प्रदेश बताया है। ‘स्वास्थ्य प्रथम’ की नीति पर चलते हुए, हरियाणा सरकार ने डेंगू के खिलाफ जंग में मरीजों को बड़ी राहत दी है।
डेंगू के खिलाफ हरियाणा का ‘सुरक्षा कवच’: सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क प्लेटलेट्स सेवा शुरू, उत्तर भारत का पहला राज्य बना
कुरुक्षेत्र: मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि हरियाणा उत्तरी भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सरकारी अस्पतालों में डेंगू रोगियों के लिए नि:शुल्क सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (SDP) की सुविधा शुरू की है। मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र के लाडवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि राज्य सरकार डेंगू पीड़ितों के इलाज के लिए न केवल आधुनिक सुविधाएं दे रही है, बल्कि मरीजों को 11,000 रुपये की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) भी प्रदान की जाती है। यह कदम प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को डेंगू जैसी घातक बीमारी के महंगे इलाज से बचाने के लिए उठाया गया है।
उत्तर भारत में नंबर-1: स्वास्थ्य सेवाओं में हरियाणा की ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में प्लेटलेट्स की नि:शुल्क उपलब्धता सुनिश्चित कर हरियाणा ने एक मिसाल कायम की है। आमतौर पर निजी अस्पतालों में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स के लिए मरीजों को भारी रकम चुकानी पड़ती है, जिसे अब सरकार ने पूरी तरह मुफ्त कर दिया है। वर्तमान में राज्य में 154 ब्लड सेंटर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने पिछले वर्ष के 3.3 लाख यूनिट रक्त संग्रह के लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए 4.5 लाख यूनिट से अधिक रक्त एकत्रित किया है, जो जनता के सहयोग और जागरूकता का परिणाम है।
रक्तदान में भी अग्रणी: लगातार दूसरी बार मिला ‘एक्सीलेंस अवार्ड’
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रदेश की सक्रियता का प्रमाण यह है कि भारत सरकार द्वारा हरियाणा को लगातार दूसरे वर्ष (2024-25) सर्वाधिक रक्तदान के लिए ‘ब्लड डोनेशन एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री सैनी ने रक्तदान को ‘महादान’ बताते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान ने चाहे कितनी भी उन्नति कर ली हो, लेकिन रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। एक स्वस्थ व्यक्ति 18 से 65 वर्ष की आयु के बीच नियमित रक्तदान कर सकता है, जिससे न केवल दूसरों की जान बचती है बल्कि शरीर में नए रक्त का निर्माण भी होता है।
निजी अस्पतालों के लिए भी सख्त नियम
डेंगू के दौरान मरीजों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने सख्त रेगुलेशन लागू किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
निजी अस्पताल और लैब डेंगू जांच (ELISA आधारित NS1 और IgM) के लिए 600 रुपये से अधिक चार्ज नहीं कर सकते।
निजी अस्पतालों में सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (SDP) की कीमत अधिकतम 11,000 रुपये तय की गई है।
नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, ताकि आपदा के समय मरीजों का शोषण न हो सके।