हरतालिका तीज व्रत पारण 2026: 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद खोलें व्रत, जानें सही विधि और जरूरी नियम

हरतालिका तीज व्रत पारण 2026: 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद खोलें व्रत, जानें सही विधि और जरूरी नियम

 

हरतालिका तीज व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। जानें व्रत खोलने का सही समय, पूजा विधि, पारण में क्या खाएं और किन नियमों का पालन करें।

हिंदू धर्म में हरतालिका तीज व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह कठिन व्रत रखती हैं। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। इस साल हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को रखा जा रहा है। इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि कई महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। यानी व्रत के दौरान अन्न तो दूर, जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती। धार्मिक मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद विधि-विधान से खोला जाता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पारण की सही विधि और नियम जानना बेहद जरूरी हो जाता है।

15 सितंबर को होगा हरतालिका तीज व्रत का पारण

हरतालिका तीज का व्रत 15 सितंबर 2026 को सूर्योदय के बाद खोला जाएगा। इस दिन सूर्योदय सुबह करीब 5 बजकर 54 मिनट पर होने की संभावना है। ऐसे में व्रती महिलाएं सूर्योदय के बाद पूजा-अर्चना पूरी करके व्रत का पारण कर सकती हैं। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित माना जाता है।

व्रत का पारण केवल भोजन ग्रहण करना नहीं माना जाता, बल्कि इससे पहले कुछ धार्मिक परंपराओं और पूजा विधियों का पालन किया जाता है। इसलिए महिलाओं को जल्दबाजी में व्रत नहीं खोलना चाहिए।

पारण से पहले करें स्नान और पूजा

हरतालिका तीज के अगले दिन व्रती महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन लाल, पीले या हरे जैसे शुभ रंग के वस्त्र पहनना मंगलकारी माना जाता है। इसके बाद महिलाएं पूरे 16 श्रृंगार कर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करती हैं।

पूजा के दौरान माता पार्वती को सिंदूर अर्पित किया जाता है। इसके बाद महिलाएं माता को चढ़ाए गए सिंदूर में से थोड़ा सिंदूर लेकर अपनी मांग में लगाती हैं। इसे अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से जोड़ा जाता है।

मिट्टी या रेत से बनी प्रतिमाओं का करें विसर्जन

हरतालिका तीज की पूजा में कई स्थानों पर रेत या मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। व्रत के अगले दिन पूजा पूरी करने के बाद इन प्रतिमाओं का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।

पूजा में अर्पित की गई सामग्री को भी श्रद्धापूर्वक समेटना चाहिए। इसके बाद व्रती महिलाएं घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर व्रत खोलती हैं। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का आशीर्वाद लेना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

किस चीज से करें हरतालिका तीज व्रत का पारण?

निर्जला व्रत के बाद अचानक भारी भोजन करना उचित नहीं माना जाता। धार्मिक परंपरा के अनुसार हरतालिका तीज का पारण सबसे पहले पूजा में चढ़ाए गए भोग से किया जाता है। इसमें भीगे हुए काले चने, गुड़ और फल शामिल किए जा सकते हैं।

कई क्षेत्रों में खीरा खाकर व्रत खोलने की भी विशेष परंपरा है। इसके बाद धीरे-धीरे जल और फलाहार ग्रहण किया जाता है। कुछ समय बाद सामान्य भोजन किया जा सकता है। लंबे समय तक निर्जला व्रत रखने के बाद शरीर को अचानक भारी भोजन देने से परेशानी हो सकती है, इसलिए पारण हल्के आहार से करना बेहतर माना जाता है।

पारण के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान

हरतालिका तीज व्रत का पारण करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले व्रत खोलने के तुरंत बाद भारी, तला-भुना, बहुत तीखा या मसालेदार भोजन करने से बचना चाहिए। पहले पानी और फल जैसे हल्के पदार्थ लेने चाहिए। इसके बाद ही सामान्य भोजन करना उचित माना जाता है।

मान्यता है कि हरतालिका तीज का पारण नमक वाली चीजों से नहीं करना चाहिए। इसलिए शुरुआत में पूजा का भोग, फल, गुड़ या अन्य सात्विक सामग्री ग्रहण करने की परंपरा है। अलग-अलग क्षेत्रों में पारण की परंपराओं में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।

श्रद्धा और विधि से करें व्रत का समापन

हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण सुहागिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की लंबी उम्र की कामना से यह व्रत करती हैं।

इसलिए व्रत का पारण भी पूजा और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। सूर्योदय के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें, पूजा पूरी करें, बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और फिर हल्के एवं सात्विक भोजन से व्रत खोलें। इससे व्रत की धार्मिक परंपरा भी पूरी होती है और लंबे निर्जला उपवास के बाद शरीर को भी धीरे-धीरे भोजन ग्रहण करने का अवसर मिलता है।

 

 

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