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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल कब तक है? जानें CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया, महाभियोग के नियम और 2027, 2028 व 2029 के चुनावों की पूरी जानकारी।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इन दिनों विपक्ष के निशाने पर हैं। विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष की ओर से संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग जैसी कार्रवाई की चर्चा भी हो रही है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है और ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल कब तक है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया बेहद कठिन रखी गई है। उन्हें उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरीके और आधार पर सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है। यानी केवल राजनीतिक विरोध या सरकार के आदेश से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता।
मुख्य चुनाव आयुक्त को कौन हटा सकता है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का अधिकार संसद की संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए किसी एक सदन में सामान्य प्रस्ताव पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संविधान में निर्धारित विशेष प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में प्रस्ताव को सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत के साथ-साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित होना जरूरी होता है। इसलिए केवल विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या होने से ही मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना संभव नहीं है। जब तक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद पर बने रहते हैं। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त स्वयं राष्ट्रपति को लिखित इस्तीफा देकर पद छोड़ सकते हैं।
ज्ञानेश कुमार कब बने मुख्य चुनाव आयुक्त?
ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। इससे पहले वह चुनाव आयुक्त के तौर पर काम कर रहे थे। जनवरी 2024 में वह सिविल सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे और इसके बाद उन्हें चुनाव आयोग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। फरवरी 2025 में राजीव कुमार के बाद ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला। उनके नेतृत्व में चुनाव आयोग ने कई महत्वपूर्ण चुनावों की प्रक्रिया संचालित की है। अब SIR जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव भी देखने को मिल रहा है।
ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल कितने समय का है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल केवल किसी तय कैलेंडर वर्ष तक सीमित नहीं होता। मौजूदा कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, रहता है। इसलिए ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल का आकलन उनकी नियुक्ति की तारीख और आयु दोनों के आधार पर किया जाता है। 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद छह साल की अवधि फरवरी 2031 में पूरी होती, लेकिन 65 वर्ष की आयु की सीमा पहले आने पर कार्यकाल उससे पहले समाप्त हो सकता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उनका कार्यकाल निश्चित रूप से जनवरी 2029 में समाप्त हो जाएगा।
2027 में कई राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव
मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश का चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसका राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक असर पड़ता है। इन चुनावों के दौरान चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर उसकी भूमिका पर विशेष नजर रहेगी। इसी अवधि में राष्ट्रपति चुनाव भी प्रस्तावित है, जिसकी संवैधानिक प्रक्रिया में चुनाव आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
2028 में इन राज्यों में होंगे चुनाव
वर्ष 2028 भी चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, कर्नाटक, मिजोरम और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण हैं और कई जगहों पर चुनावी मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में चुनाव आयोग के सामने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। मतदाता सूची में बदलाव, चुनावी आचार संहिता और मतदान प्रक्रिया जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
2029 में भी कई राज्यों के चुनाव
वर्ष 2029 में भी चुनावी गतिविधियां काफी व्यस्त रहने वाली हैं। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 2029 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। हालांकि ज्ञानेश कुमार उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर होंगे या नहीं, यह उनकी आयु और उस समय लागू कार्यकाल संबंधी कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगा। इसलिए अभी से यह निश्चित रूप से कहना उचित नहीं है कि वही 2029 का लोकसभा चुनाव कराएंगे।
SIR को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं ज्ञानेश कुमार
फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का सबसे बड़ा हमला SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग लगातार इस प्रक्रिया को मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की कवायद के तौर पर पेश करता रहा है। इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों का विरोध तेज हुआ है और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राजनीतिक दबाव बढ़ा है। हालांकि संवैधानिक रूप से केवल विरोध प्रदर्शन या इस्तीफे की मांग से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया नहीं जा सकता। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए संसद में संविधान के तहत निर्धारित कठिन प्रक्रिया को पूरा करना होगा।