CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर AAP नेता प्रवीण कुमार ने निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट चोरी और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में AAP नेता प्रवीण कुमार ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोटों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब जनता पूरे मामले का संज्ञान ले रही है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति कथित तौर पर वोट चोरी और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है, उसे पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
AAP की ओर से लगातार CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। पार्टी का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। AAP ने इसे मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जोड़ते हुए आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।
‘जनता अब ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का संज्ञान लेगी’
प्रवीण कुमार ने अपने बयान में कहा कि अब जनता ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के मुद्दे को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति पर वोटों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, उसे मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर नहीं बने रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव और वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। हालांकि, ये आरोप AAP और विपक्षी दलों की राजनीतिक आपत्तियों का हिस्सा हैं, जबकि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने चुनावी प्रक्रिया में किसी राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
AAP लगातार उठा रही ‘वोट चोरी’ का मुद्दा
इस्तीफा तो जनता लेकर रहेगी 🔥
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) October 7, 2026
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ AAP का विरोध पिछले कुछ समय से लगातार तेज हुआ है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी CEC के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। AAP के मुताबिक, देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर लोगों के बीच सवाल और चिंता है। पार्टी का आरोप है कि वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
AAP नेता मनीष सिसोदिया भी पहले ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। पार्टी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर मुद्दा बनाया है। AAP ने लोगों से जंतर-मंतर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की थी।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। AAP दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी इस आंदोलन को लेकर पार्टी की तैयारियों की जानकारी दी है। पार्टी ने संभावित हिरासत या गिरफ्तारी की स्थिति में वैकल्पिक नेतृत्व व्यवस्था तक तैयार करने की बात कही है।
वहीं, 7 अक्टूबर को भी AAP कार्यकर्ताओं और अन्य दलों के समर्थकों ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट चोरी नहीं चलेगी’ और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए।
चुनाव आयोग की भूमिका पर विपक्ष के सवाल
SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही रखने और अयोग्य या डुप्लीकेट नामों को हटाने के लिए पुनरीक्षण प्रक्रिया जरूरी है।
इस पूरे विवाद के बीच AAP और अन्य विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जोर दे रहे हैं। प्रवीण कुमार का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग और उसके प्रमुख के खिलाफ पार्टी के आरोपों को दोहराया है।
‘लोकतंत्र की रक्षा’ को लेकर AAP का आंदोलन
AAP का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ी है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि अगर किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से हटाया जाता है तो इससे उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ता है।
फिलहाल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन इस मुद्दे पर AAP और अन्य संगठनों के आंदोलन का अगला बड़ा चरण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इन राजनीतिक आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और विरोध प्रदर्शन के बाद यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।