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सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट आई। मिड-ईस्ट युद्ध और बढ़ते आयात बिल के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह किया है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे।
मिड-ईस्ट में तनाव और वैश्विक राजनीतिक उठापटक के बीच सोमवार को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराए जाने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रभावी रूप से बंद होने की खबरों ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इस बीच, घरेलू मोर्चे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नागरिकों से एक विशेष अपील की है।
बाजार अपडेट: ट्रंप के फैसले से कीमतों पर दबाव
मिड-ईस्ट में पिछले 10 हफ्तों से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान द्वारा रखे गए शांति प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद युद्धविराम की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं, जिससे सोने ने पिछले सप्ताह की अपनी बढ़त खो दी है।
- MCX का हाल: शुरुआती कारोबार में एमसीएक्स (MCX) पर सोने की कीमतें 0.35 प्रतिशत गिरकर 1,51,989 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गईं। इसके विपरीत, चांदी में 0.36 प्रतिशत की मामूली तेजी देखी गई और यह 2,62,866 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
- मुंबई स्पॉट प्राइस: मुंबई के हाजिर बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,130 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट सोना 1,39,450 रुपये के स्तर पर उपलब्ध था। ध्यान रहे कि इन कीमतों में जीएसटी और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील: ‘एक साल तक न खरीदें सोना’
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) की सुरक्षा और सोने के आयात बिल को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक महत्वपूर्ण आह्वान किया है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचें।
पीएम मोदी की यह अपील ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर बाहरी दबाव बढ़ गया है। सरकार का लक्ष्य घरेलू मांग को कम करके डॉलर की निकासी को रोकना है ताकि अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल सके।
भारत की सोने पर निर्भरता: आयात का रिकॉर्ड स्तर
भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, लेकिन विडंबना यह है कि यहाँ घरेलू उत्पादन बहुत ही कम है।
- खपत बनाम उत्पादन: भारत हर साल लगभग 700-800 टन सोने की खपत करता है, जबकि घरेलू स्तर पर उत्पादन मात्र 1-2 टन ही होता है। इसका अर्थ है कि भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है।
- आयात बिल में भारी उछाल: वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का स्वर्ण आयात रिकॉर्ड 72 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जो कि वित्त वर्ष 2024-25 (58 बिलियन डॉलर) की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ता आयात बिल देश के व्यापार घाटे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आर्थिक परिप्रेक्ष्य: क्यों जरूरी है यह अपील?
जब भारत बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है, तो उसे भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। आयात बिल में 24 प्रतिशत की वृद्धि सीधे तौर पर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को प्रभावित करती है। वर्तमान में वैश्विक अनिश्चितताओं और युद्ध की स्थिति के कारण विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत रहना राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। पीएम की अपील का उद्देश्य नागरिकों को भौतिक सोने के बजाय अन्य निवेश विकल्पों की ओर प्रोत्साहित करना है ताकि देश की वित्तीय नींव कमजोर न हो।