अमेरिका और ईरान शांति समझौते से वैश्विक तेल बाजार में बड़ी राहत, लुढ़के कच्चे तेल के दाम; जानें बाजारों पर क्या हुआ असर

अमेरिका और ईरान शांति समझौते से वैश्विक तेल बाजार में बड़ी राहत, लुढ़के कच्चे तेल के दाम; जानें बाजारों पर क्या हुआ असर

 

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के समझौते से तेल की कीमतें 80 डॉलर के करीब आईं। जानें एशियाई शेयर बाजारों का हाल और वैश्विक ऊर्जा स्थिति पर इसका प्रभाव।

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जून 2026 का मध्य एक बड़ी राहत लेकर आया है। फरवरी 2026 के अंत से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया था, लेकिन अब इस स्थिति में एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है, जिसका मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना है। इस समझौते के बाद, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस शिपिंग मार्गों में से एक, ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz), जो महीनों से बंद था, उसके फिर से खुलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस घटनाक्रम का सीधा असर यह हुआ कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें लुढ़ककर 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आसपास आ गई हैं, जो कुछ समय पहले तक 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं।

G7 शिखर सम्मेलन और कूटनीतिक हलचल

फ्रांस के इवियन-लेस-बैन्स में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ी जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ यह सौदा पूरी तरह से हस्ताक्षरित हो चुका है और इसकी औपचारिक पुष्टि 19 जून, 2026 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में होगी, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल होंगे। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे “दुनिया भर में शांति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला” बताया है। इस समझौते के तहत सैन्य अभियानों को स्थायी रूप से रोकने और समुद्री नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक जीवनरेखा साबित होगी।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुझान

शांति वार्ता और तेल की कीमतों में गिरावट का असर एशियाई शेयर बाजारों पर भी देखा गया। हालांकि निवेशकों ने ऊर्जा संकट के कम होने का स्वागत किया, लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया मिश्रित रही।

  • कोरिया और ताइवान में तेजी: दक्षिण कोरिया का KOSPI सूचकांक 1.02% की बढ़त के साथ 8,633.22 पर बंद हुआ, जो व्यापक खरीदारी को दर्शाता है। वहीं, ताइवान का बेंचमार्क TAIEX 0.43% चढ़कर 45,593.14 के स्तर पर पहुँच गया।
  • जापान और हांगकांग की स्थिति: जापान का निक्केई 225 सूचकांक 0.12% की हल्की गिरावट के साथ 69,237.39 पर बंद हुआ, हालांकि सत्र के दौरान इसने 69,620.64 का 52-सप्ताह का उच्च स्तर भी छुआ था। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक दबाव में रहा और 0.99% गिरकर 24,597.92 पर बंद हुआ।

निवेशकों के लिए भविष्य की राह

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में यह गिरावट हालांकि एक राहत है, लेकिन प्री-युद्ध (pre-war) स्तरों पर तुरंत लौटना अभी संभव नहीं है। तेल और गैस की कीमतें अभी भी पिछले साल के औसत 69 डॉलर प्रति बैरल से काफी ऊपर बनी हुई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष के शेष भाग में कीमतें 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने की संभावना है, क्योंकि दुनिया भर के देश अपने खाली हो चुके आपातकालीन तेल भंडार (emergency crude stockpiles) को फिर से भरने की दौड़ में लगे रहेंगे।

कुल मिलाकर, शांति समझौते की यह खबर वैश्विक बाजारों के लिए एक ‘ब्रीदर’ (breather) के समान है। निवेशकों का ध्यान अब इस बात पर है कि क्या ईरान और अमेरिका के बीच यह ‘फ्रेमवर्क समझौता’ केवल सैन्य नाकेबंदी हटाने तक सीमित रहेगा, या परमाणु कार्यक्रम जैसे दीर्घकालिक मुद्दों पर भी कोई ठोस प्रगति होगी। फिलहाल, बाजार ने अनिश्चितता के उस काले दौर से बाहर निकलने का संकेत दे दिया है।

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