अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन में बॉन्ड यील्ड कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। महंगाई, सरकारी उधारी और ब्याज दरों की अनिश्चितता बनी चिंता।
निवेशकों की चिंता हाल ही में वैश्विक बॉन्ड बाजारों में हुई हलचल से बढ़ी है। बॉन्ड यील्ड अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन में लगातार ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ रहा है। यह स्थिति वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है क्योंकि इससे शेयर बाजार, करेंसी, कर्ज की दरें और केंद्रीय बैंकों की नीतियां प्रभावित हो सकती हैं। अब निवेशक अधिक रिटर्न की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वे महंगाई, सरकारों की बढ़ती उधारी और ब्याज दरों की भविष्यवाणी को देखते हैं। यही कारण है कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड ने कई वर्षों (कुछ मामलों में कई दशकों) का ऊंचा स्तर हासिल किया है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर सबसे अधिक ध्यान
वैश्विक निवेशकों के लिए आज अमेरिका का बॉन्ड बाजार सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक है। Reuters के अनुसार, मंगलवार को अमेरिकी लॉन्ग-डेट बॉन्ड की यील्ड ने करीब 20 वर्षों का उच्चतम स्तर हासिल किया। अमेरिकी लॉन्ग बॉन्ड यील्ड 5.3371 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद लगभग 5.27% पर स्थिर हुई। वहीं, अमेरिकी दस वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.68 प्रतिशत है। यील्ड में इस तरह की तेजी से पता चलता है कि निवेशक अमेरिकी सरकारी कर्ज को लंबे समय तक रखने के बदले अधिक रिटर्न चाहते हैं। इससे दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में जोखिम की धारणा प्रभावित हो सकती है।
महंगाई की आशंका ने महत्वपूर्ण कारण बनाया
बॉन्ड यील्ड में वृद्धि का एक बड़ा कारण महंगाई है। वर्तमान बॉन्ड पर मिलने वाले फिक्स्ड रिटर्न को निवेशकों को कम आकर्षक लग सकता है जब वे सोचते हैं कि महंगाई भविष्य में बढ़ सकती है। इसके बदले वे अधिक जमीन की मांग करते हैं। यील्ड और बॉन्ड कीमतों के बीच विपरीत संबंध है, इसलिए यील्ड बढ़ने से अक्सर बॉन्ड कीमतों पर दबाव होता है। वर्तमान में बाजार यह निर्धारित करने में व्यस्त है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को कितने समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकते हैं।
सरकारों की बढ़ती उधारी भी चिंता का विषय है
सरकारों की बढ़ती उधारी भी बढ़ने का दूसरा महत्वपूर्ण कारण है। सरकारों का कर्ज बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका सहित कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को बजट और अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में बॉन्ड जारी करने पड़ रहे हैं। सरकारी बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ने पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अधिक जमीन की आवश्यकता हो सकती है। यदि निवेशकों को सरकारों की वित्तीय स्थिति पर चिंता होती है, तो वे अधिक जोखिम प्रीमियम की मांग कर सकते हैं। इससे लंबी अवधि की बंधन की अवधि बढ़ सकती है।
जर्मनी और फ्रांस में भी दबाव बढ़ा
यूरोपीय बॉन्ड बाजारों में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। हाल ही में जर्मनी और फ्रांस के सरकारी बॉन्ड फ्यूचर्स में स्थिरता दिखाई दी, लेकिन 2011 के बाद जर्मनी की 10 वर्षीय और 30 वर्षीय बॉन्ड यील्ड अपने सबसे ऊंचे स्तरों तक पहुंच गई थी। जून के बाद से फ्रांस में 30 वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 50 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि हुई है। इससे पता चलता है कि बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी केवल अमेरिका में नहीं हुई है; वैश्विक स्तर पर लंबी अवधि के सरकारी कर्ज को लेकर निवेशकों का रवैया बदल रहा है।
जापान और ब्रिटेन भी
ब्रिटेन और जापान के बॉन्ड बाजार भी इस विश्वव्यापी बदलाव में शामिल हैं। जापान में लंबे समय तक कम ब्याज दरों के दौर के बाद वैश्विक निवेशकों के लिए बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी महत्वपूर्ण है। वहीं, ब्रिटेन में महंगाई और सरकारी वित्तीय स्थिति की चिंताएं बॉन्ड बाजार पर प्रभाव डाल सकती हैं। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती हुई बॉन्ड यील्ड का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह पर पड़ सकता है, क्योंकि निवेशक उभरते बाजारों से कुछ पूंजी निकालकर विकसित बाजारों की ओर जा सकते हैं।
शेयर बाजारों के लिए बॉन्ड यील्ड क्यों महत्वपूर्ण है?
शेयर बाजार को बॉन्ड यील्ड की तेज वृद्धि चुनौती दे सकती है। जब सरकारी बॉन्ड पर अपेक्षाकृत अधिक और सुरक्षित रिटर्न मिलने लगता है, तो कुछ निवेशकों को शेयरों में जोखिम लेना कम आकर्षक लग सकता है। ऊंची बॉन्ड यील्ड भी उपभोक्ताओं और कंपनियों के लिए कर्ज की लागत बढ़ा सकती है। इससे निवेश, मुनाफा और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसका अधिक प्रभाव ऊंची वैल्यूएशन वाले शेयरों पर हो सकता है।
भारत जैसे बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं
वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से भारतीय बाजार भी प्रभावित हो सकता है। डॉलर आधारित परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है अगर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगातार ऊंची रहती है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश निर्णय इससे प्रभावित होंगे। भारत में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ने पर रुपये और शेयर बाजार पर दबाव डाला जा सकता है। यद्यपि, आर्थिक वृद्धि, मजबूत घरेलू निवेश और कंपनियों की कमाई जैसे कारक भारतीय बाजार को कुछ सहारा दे सकते हैं।
ब्याज दरें अगले बड़े संकेत बन जाएंगी
आने वाले समय में बॉन्ड बाजार का रुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति से प्रभावित होगा। निवेशक महंगाई के दबाव को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती कब और कितनी तेजी से होगी, यह जानना चाहते हैं। लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड ऊंची रह सकती है अगर महंगाई स्थिर रहती है और केंद्रीय बैंक दरों में कमी नहीं करते हैं। इसके विपरीत, आर्थिक वृद्धि कमजोर होने और महंगाई में स्पष्ट गिरावट आने पर क्षेत्र में नरमी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों की अधिक सावधानी
कुल मिलाकर, अमेरिका, यूरोप और एशिया में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी वैश्विक निवेशकों को चेतावनी देती है। महंगाई, सरकारी उधारी दरों और अनिश्चितता ने लंबी अवधि के बॉन्ड पर दबाव बढ़ा दिया है। निवेशकों को वैश्विक बाजारों में गिरावट के लिए तैयार रहना होगा, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.68 प्रतिशत और अमेरिकी लॉन्ग बॉन्ड यील्ड लगभग 5.27% के आसपास रहेंगे। केंद्रीय बैंकों के संकेत, महंगाई के आंकड़े और बॉन्ड यील्ड आने वाले दिनों में शेयर बाजारों का रुख निर्धारित करेंगे।