Gift Nifty Today 7 August: 0.39% टूटा Gift Nifty, कमजोर शुरुआत के संकेत; US NFP डेटा पर बाजार की नजर

Gift Nifty Today 7 August: 0.39% टूटा Gift Nifty, कमजोर शुरुआत के संकेत; US NFP डेटा पर बाजार की नजर

 

Gift Nifty Today 7 August: Gift Nifty 97.5 अंक गिरकर 24,650.5 पर पहुंचा। West Asia तनाव, बढ़ते क्रूड ऑयल और US NFP डेटा के बीच भारतीय शेयर बाजार में सतर्क शुरुआत के संकेत।

भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार, 7 अगस्त का कारोबारी सत्र सतर्क शुरुआत के संकेत दे रहा है। ग्लोबल बाजारों से मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू निवेशकों का रुख भी सावधानी भरा रहने की संभावना है। बाजार खुलने से पहले Gift Nifty में कमजोरी देखने को मिली, जो भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के लिए कमजोर शुरुआत का संकेत माना जाता है। सुबह 7:55 बजे Gift Nifty 24,650.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा था और इसमें 97.5 अंक यानी करीब 0.39 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में शुक्रवार को घरेलू इक्विटी बाजार में कारोबार की शुरुआत दबाव के साथ होने की संभावना जताई जा रही है।

Gift Nifty में गिरावट से मिले कमजोर संकेत

Gift Nifty भारतीय शेयर बाजार के शुरुआती रुझान का एक अहम संकेतक माना जाता है। शुक्रवार सुबह इसमें करीब 0.39 फीसदी की गिरावट ने संकेत दिया कि बाजार खुलने से पहले निवेशकों में ज्यादा उत्साह नहीं है। ग्लोबल संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।

हालांकि Gift Nifty की दिशा बाजार की वास्तविक शुरुआत की पूरी तरह गारंटी नहीं देती, लेकिन इससे शुरुआती कारोबारी धारणा का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत हल्की कमजोरी के साथ हो सकती है।

पश्चिम एशिया का तनाव बना चिंता का कारण

निवेशकों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंताओं में से एक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है। क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ता है। तनाव बढ़ने की स्थिति में निवेशक आमतौर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।

इसका असर शेयर बाजारों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ता है। पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसलिए किसी भी बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम से तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है और कीमतों में तेजी आ सकती है।

बढ़ते कच्चे तेल के दाम से दबाव

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण चिंता का विषय हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारतीय रुपये, कंपनियों की लागत और देश के चालू खाते की स्थिति पर भी असर डाल सकती है। खासतौर पर एयरलाइंस, ऑटोमोबाइल, पेंट, केमिकल और अन्य ऊर्जा-निर्भर क्षेत्रों के शेयरों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, तेल एवं गैस क्षेत्र की कुछ कंपनियों को ऊंची कीमतों से लाभ भी हो सकता है।

अमेरिकी NFP डेटा पर बाजार की नजर

शुक्रवार के कारोबार के लिए एक और महत्वपूर्ण घटना अमेरिका के Non-Farm Payrolls (NFP) आंकड़ों का जारी होना है। अमेरिकी रोजगार बाजार की स्थिति से जुड़े ये आंकड़े दुनिया भर के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनका सीधा संबंध अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से है।

अमेरिका में रोजगार बाजार मजबूत रहने पर फेड के लिए ब्याज दरों में जल्द कटौती करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, अगर रोजगार आंकड़े कमजोर आते हैं तो बाजार में ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ सकती है। इसी वजह से NFP डेटा आने से पहले निवेशक अपनी पोजीशन को लेकर सतर्क रह सकते हैं।

ब्याज दरों की दिशा पर पड़ेगा असर

अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का प्रभाव सिर्फ अमेरिकी बाजारों तक सीमित नहीं रहता। फेड के फैसलों का असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और उभरते बाजारों पर भी पड़ता है। भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी अमेरिकी मौद्रिक नीति से प्रभावित हो सकती हैं।

अगर अमेरिकी रोजगार आंकड़े मजबूत आते हैं और इससे ऊंची ब्याज दरों की संभावना बढ़ती है, तो डॉलर मजबूत हो सकता है और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बन सकता है। इसके विपरीत कमजोर डेटा से दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है, जिससे शेयर बाजारों को राहत मिल सकती है।

निवेशकों की नजर किन संकेतों पर?

शुक्रवार को निवेशकों की नजर Gift Nifty के अलावा वैश्विक शेयर बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर-रुपये की चाल और पश्चिम एशिया से आने वाली खबरों पर रहेगी। इसके अलावा अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

घरेलू स्तर पर भी कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और सेक्टर आधारित गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे माहौल में बाजार में किसी एक दिशा में तेज चाल के बजाय उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

बाजार के लिए सतर्क रहने का दिन

कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए कई महत्वपूर्ण वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होने जा रहा है। Gift Nifty में 0.39 फीसदी की गिरावट, बढ़ते कच्चे तेल के दाम, पश्चिम एशिया का तनाव और अमेरिकी NFP डेटा से पहले की अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

बाजार की शुरुआती दिशा Gift Nifty और एशियाई बाजारों से संकेत ले सकती है, लेकिन दिन के कारोबार में अमेरिकी रोजगार आंकड़े सबसे बड़ा ट्रिगर साबित हो सकते हैं। ऐसे में निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए शुक्रवार का दिन खासा महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि रोजगार डेटा के बाद वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और जोखिम वाली परिसंपत्तियों को लेकर बाजार की धारणा में बड़ा बदलाव आ सकता है।

 

 

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