गणगौर पूजा 2026: गणगौर पूजा कब है? जानें पूजा समय तारीख, मुहूर्त, विधि और मंत्र जानें कब है?

गणगौर पूजा 2026: गणगौर पूजा कब है? जानें पूजा समय तारीख, मुहूर्त, विधि और मंत्र जानें कब है?

गणगौर पूजा 2026: जानें गणगौर पूजा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र। माता गौरी और भगवान शिव की पूजा के लिए पूरी गाइड, व्रत का महत्व और पारंपरिक रस्में।

गणगौर पूजा 2026: गणगौर पूजा का त्योहार भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के रूप में मनाया जाता है। “गणगौर” शब्द का अर्थ है – गण = शिव, गौर = पार्वती।

यह पर्व विशेष रूप से राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इसे करती हैं।

गणगौर पूजा 2026 की तारीख और तिथि

इस वर्ष गणगौर पूजा 21 मार्च 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि की शुरुआत 21 मार्च 2026 को सुबह 2:30 बजे होगी और यह तिथि रात 11:56 बजे समाप्त होगी।

नोट: कुछ क्षेत्रों में 20 मार्च की रात को पूजा की तैयारी शुरू हो सकती है, लेकिन मुख्य दिन 21 मार्च ही है।

गणगौर पूजा 2026 का मुहूर्त और शुभ समय

शुभ समय / मुहूर्त समय (IST)
ब्रह्म मुहूर्त 05:07 AM — 05:54 AM
प्रातः संध्या 05:31 AM — 06:42 AM
अभिजित मुहूर्त 12:21 PM — 01:10 PM
गोधूलि मुहूर्त 06:48 PM — 07:12 PM
सायाह्न संध्या 06:50 PM — 08:01 PM
अमृत काल 05:58 PM — 07:27 PM

इन समयों का पालन करने से पूजा और व्रत अधिक फलदायी माने जाते हैं।

गणगौर पूजा विधि

गणगौर का मुख्य पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। पूजा विधि इस प्रकार है:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. मिट्टी से ईसर (भगवान शिव) और गौरा (माता पार्वती) की प्रतिमा बनाएं।

  3. प्रतिमा का श्रृंगार करें – कपड़े, आभूषण, फूल और मेहंदी से सजाएँ।

  4. पूजा स्थल पर हल्दी, कुमकुम, चावल और फूल सजाएँ।

  5. घर की दीवार या पूजा स्थान पर सोलह बिंदियां, रोली और मेहंदी लगाएँ।

  6. सुहाग जल तैयार करें — इसमें चांदी का सिक्का, दही, सुपारी, पान, दूध, गंगाजल, हल्दी और दूर्वा डालें।

  7. दूर्वा को हाथ में लेकर सुहाग जल को ईसर‑गौर और परिवार पर छिड़कें।

  8. भगवान शिव और गौरी माता को चूरमे का भोग चढ़ाएँ।

  9. शाम में प्रतिमा को पानी पिलाएँ और सरोवर/तालाब/कुंड में विसर्जन करें।

  10. पूजा के दौरान गणगौर गीत गाएँ और कथा पढ़ें या सुनें।

गणगौर पूजा मंत्र

1. देवी गौरी मंत्र

ॐ ह्रीं गौरीपतये स्वाहा।
फूल, हल्दी, कुमकुम और पवित्र जल अर्पित करते समय जाप करें।

2. विवाह और वैवाहिक सुख मंत्र

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी पतिं मे कुरु ते नमः॥
विवाहित जीवन में खुशहाली और वैवाहिक सुख के लिए यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली है।

गणगौर पूजा का सारांश

  • मुख्य पूजा तिथि: 21 मार्च 2026

  • तृतीया तिथि: सुबह 2:30 बजे से रात 11:56 बजे तक

  • मुख्य मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित, अमृत काल, संध्या

  • पूजा विधि: प्रतिमा निर्माण, श्रृंगार, सुपात्र सामग्री और मंत्र जाप

  • मंत्र: देवी गौरी और भगवान शिव को समर्पित

गणगौर पूजा अपने विधिपूर्वक पालन और भक्ति से मनाने पर अत्यधिक शुभ और फलदायी मानी जाती है।

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