गंगा सप्तमी पर करें ये 5 अचूक काम, जन्मों के पापों से मिलेगी मुक्ति और चमकेगा भाग्य

गंगा सप्तमी पर करें ये 5 अचूक काम, जन्मों के पापों से मिलेगी मुक्ति और चमकेगा भाग्य

गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) के दिन स्नान, दान और शिव पूजा का विशेष महत्व है। जानें कैसे इस दिन गंगाजल के प्रयोग से आप अपने जीवन के दुखों से मुक्ति पा सकते हैं।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में उतरी थीं, इसलिए इसे ‘गंगा जयंती’ भी कहा जाता है।

माना जाता है कि गंगा सप्तमी के दिन किए गए कुछ विशेष कार्य व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों और कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं। यहाँ एक विस्तृत लेख है जो आपको इस दिन के महत्व और किए जाने वाले उपायों के बारे में बताएगा।

गंगा सप्तमी का दिन आध्यात्मिक शुद्धि और सौभाग्य प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि आप लंबे समय से मानसिक तनाव, आर्थिक तंगी या शारीरिक कष्टों से घिरे हैं, तो इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए ये कार्य आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

1. ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र स्नान

गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि गंगा तट पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती’ मंत्र का जाप करें। यह आपके शरीर और मन की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।

2. भगवान शिव का जलाभिषेक

चूंकि मां गंगा भगवान शिव कीजटाओं में विराजती हैं, इसलिए इस दिन महादेव की पूजा का विशेष फल मिलता है। शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएं और बेलपत्र अर्पित करें। ऐसा करने से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

3. दीपदान का विशेष महत्व

शाम के समय किसी नदी के किनारे या घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं। गंगा सप्तमी पर दीपदान करने से जीवन का अंधकार दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। पितरों की शांति के लिए भी इस दिन दीपदान करना शुभ माना जाता है।

4. दान-पुण्य से मिटेंगे कष्ट

शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा सप्तमी पर किया गया दान अक्षय फल देता है। इस दिन अपनी क्षमता अनुसार अन्न, जल, वस्त्र या सत्तू का दान गरीबों को जरूर करें। जल का दान (जैसे प्याऊ लगवाना या मटका दान करना) इस दिन सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।

5. श्री गंगा सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ

यदि आप शत्रुओं से परेशान हैं या कार्यों में बार-बार बाधा आ रही है, तो गंगा सप्तमी के दिन ‘गंगा सहस्रनाम स्तोत्र’ या ‘गंगा चालीसा’ का पाठ करें। इससे मानसिक शांति मिलती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

गंगा सप्तमी 2026 शुभ मुहूर्त

साल 2026 में गंगा सप्तमी 24 अप्रैल को मनाई जा रही है।

  • सप्तमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026 की रात से।
  • सप्तमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026 की शाम तक।

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