गंगा सप्तमी 2026 कब है? जानें गंगा जन्मोत्सव की तिथि, दोपहर का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की पौराणिक कथा
हिंदू धर्म में मां गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्षदायिनी और पापों का नाश करने वाली देवी माना गया है। हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ‘गंगा सप्तमी’ के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में उतरी थीं, इसलिए इसे ‘गंगा जन्मोत्सव’ के रूप में भी जाना जाता है।
गंगा सप्तमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2026 में गंगा सप्तमी 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मध्याह्न काल (दोपहर का समय) में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- सप्तमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026 को रात 08:45 बजे से।
- सप्तमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026 को रात 10:12 बजे तक।
- पूजा का शुभ मुहूर्त: दोपहर 10:58 से दोपहर 01:38 तक (24 अप्रैल)।
गंगा सप्तमी का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरीं, तो उनके वेग को संभालने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में स्थान दिया। वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही शिवजी ने अपनी एक जटा खोली थी और गंगा जी का पृथ्वी पर प्राकट्य हुआ था। वहीं, एक अन्य कथा के अनुसार, जब गंगा के वेग से महर्षि जह्नु का आश्रम बहने लगा, तो वे क्रोधित हो गए और गंगा को पी गए। बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने अपने कान से गंगा को बाहर निकाला, इसलिए गंगा को ‘जाह्नवी’ भी कहा जाता है।
कैसे करें पूजा? (पूजन विधि)
यदि आप किसी कारणवश गंगा किनारे नहीं जा सकते, तो घर पर ही रहकर इस विधि से पूजा कर सकते हैं:
- गंगा स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठें। यदि संभव हो तो पास की किसी नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा ‘गंगाजल’ मिलाकर स्नान करें।
- संकल्प: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां गंगा का ध्यान करते हुए व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।
- कलश स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गंगाजल से भरा कलश स्थापित करें।
- पूजन: मां गंगा की प्रतिमा या कलश का षोडशोपचार पूजन करें। उन्हें सफेद फूल, अक्षत, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें।
- आरती और दान: पूजा के बाद गंगा चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, इसलिए ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार दान दें।
इस दिन क्या करें और क्या न करें?
- करें: गंगा अष्टक का पाठ करें। दीपदान करें। गायत्री मंत्र या “ॐ नमो भगवत्यै ह्रीं श्रीं हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा” मंत्र का जाप करें।
- न करें: गंगा तट पर गंदगी न फैलाएं। अपशब्दों का प्रयोग न करें और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
गंगा सप्तमी पर दान का महत्व
मान्यता है कि गंगा सप्तमी के दिन दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन सत्तू, घड़ा, पंखा और मौसमी फलों का दान करना जातक के जीवन से कुंडली के दोषों को कम करता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है।