FSSAI ने कंपनियों को 90 दिनों के भीतर ‘Energy Drink’ शब्द हटाने का निर्देश दिया है। जानिए एनर्जी ड्रिंक्स में क्या होता है, इनमें मौजूद कैफीन और शुगर शरीर पर क्या असर डालते हैं और नए नियम क्या हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों को कथित तौर पर 90 दिनों के भीतर अपने प्रोडक्ट लेबल से “एनर्जी ड्रिंक” शब्द हटाने का निर्देश दिया है। रेगुलेटर का कहना है कि भारत के फूड स्टैंडर्ड्स के तहत “एनर्जी ड्रिंक” नाम की कोई अलग कैटेगरी मौजूद नहीं है।
इस फैसले के बाद बाजार में बिकने वाले कई लोकप्रिय पेय पदार्थों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले 1 जुलाई को FSSAI ने छह पेय कंपनियों को कथित गलत ब्रांडिंग और भ्रामक दावों को लेकर नोटिस जारी किए थे। रेगुलेटर ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य उत्पादों पर “ऊर्जा बढ़ाता है”, “शरीर और दिमाग को सक्रिय करता है” या “फोकस बढ़ाता है” जैसे दावे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत अनुमत नहीं हैं।
इस कार्रवाई ने उपभोक्ताओं के बीच एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जिन्हें हम एनर्जी ड्रिंक कहते हैं, उनमें वास्तव में क्या होता है और ये हमारे शरीर पर किस तरह असर डालते हैं।
क्या होता है एनर्जी ड्रिंक?
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अनुसार, एनर्जी ड्रिंक ऐसे पेय पदार्थ होते हैं जिनमें आमतौर पर कैफीन मौजूद होता है और इनके साथ अन्य अतिरिक्त सामग्री भी मिलाई जा सकती है।
इन ड्रिंक्स में अक्सर कैफीन के अलावा चीनी, टॉरिन, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, हर्बल एक्सट्रैक्ट और अन्य उत्तेजक तत्व शामिल होते हैं। कंपनियां इन्हें अक्सर थकान कम करने, सतर्कता बढ़ाने और तुरंत ऊर्जा महसूस कराने वाले उत्पाद के रूप में पेश करती हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इनसे मिलने वाली “ऊर्जा” वास्तव में शरीर में नई ताकत पैदा नहीं करती, बल्कि इनमें मौजूद कैफीन और शुगर की वजह से कुछ समय के लिए व्यक्ति अधिक एक्टिव महसूस कर सकता है।
कैफीन कैसे करता है शरीर पर असर?
एनर्जी ड्रिंक का सबसे प्रमुख घटक कैफीन होता है। यह एक स्टिमुलेंट है जो दिमाग में एडेनोसिन नामक रसायन के प्रभाव को रोकता है। एडेनोसिन शरीर में थकान का संकेत देने में भूमिका निभाता है।
जब कैफीन एडेनोसिन के असर को कम करता है, तो व्यक्ति को कुछ समय के लिए ज्यादा जागरूकता, बेहतर ध्यान और कम थकान महसूस हो सकती है। यही वजह है कि कई लोग परीक्षा, लंबी ड्राइव या ज्यादा काम के दौरान कैफीन वाले पेय पदार्थों का सेवन करते हैं।
लेकिन ज्यादा मात्रा में कैफीन लेने से बेचैनी, नींद में परेशानी, दिल की धड़कन तेज होना और चिंता जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
शुगर की अधिक मात्रा भी बन सकती है चिंता का कारण
कई एनर्जी ड्रिंक्स में काफी मात्रा में चीनी मौजूद होती है। ज्यादा चीनी का सेवन शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ा सकता है और लंबे समय तक अधिक सेवन वजन बढ़ने, ब्लड शुगर असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
कुछ कंपनियां अब शुगर-फ्री या लो-कैलोरी विकल्प भी पेश कर रही हैं, लेकिन उनमें भी कैफीन और अन्य कृत्रिम स्वीटनर की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।
टॉरिन और अन्य सामग्री की भूमिका
एनर्जी ड्रिंक्स में टॉरिन, बी विटामिन और हर्बल सामग्री जैसे ग्वाराना या जिनसेंग भी मिलाए जाते हैं। टॉरिन शरीर में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक अमीनो एसिड है, जो कई जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।
हालांकि, इन अतिरिक्त सामग्रियों को लेकर यह दावा कि वे सीधे ऊर्जा का स्तर बहुत बढ़ा देती हैं, वैज्ञानिक रूप से हमेशा साबित नहीं हुआ है। कई बार इनका प्रभाव कैफीन और शुगर के प्रभाव के कारण महसूस होता है।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों और कैफीन के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों को एनर्जी ड्रिंक का सेवन सावधानी से करना चाहिए।
इसके अलावा, एनर्जी ड्रिंक को शराब के साथ मिलाकर पीना भी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि कैफीन व्यक्ति को ज्यादा सतर्क महसूस करा सकता है जबकि शराब शरीर पर अलग प्रभाव डालती है।