पूर्व भारतीय क्रिकेटर Farokh Engineer का दावा है कि Padma Shri की घोषणा के 53 साल बाद भी उन्हें सम्मान नहीं मिला। जानिए पूरा मामला और उनका क्रिकेट करियर।
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज फारुख इंजीनियर ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने खेल जगत और देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंजीनियर के मुताबिक, सरकार द्वारा उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुए 53 साल बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें आज तक यह सम्मान प्राप्त नहीं हुआ है। फारुख इंजीनियर उस समय भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे थे और उनकी उम्र लगभग 30 के दशक के मध्य में थी, जब उन्हें पता चला कि देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री के लिए उनका नाम घोषित किया गया है। हालांकि इतने लंबे समय के बाद भी उनका कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से इस सम्मान को लेकर कोई आधिकारिक सूचना या पत्र नहीं मिला। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि उस समय उन्हें टीम मैनेजर हेमू अधिकारी ने बताया था कि अखबारों में उनके पद्म श्री मिलने की खबर छपी है।
इंग्लैंड में खेल रहे थे जब मिली खबर
फारुख इंजीनियर ने बताया कि जब पद्म श्री से सम्मानित किए जाने की खबर सामने आई, तब वह इंग्लैंड में भारतीय टीम के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। टीम मैनेजर हेमू अधिकारी ने उन्हें बताया कि उन्हें पद्म श्री दिया जा रहा है और यह खबर उस समय अखबारों में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इंजीनियर के लिए यह स्वाभाविक रूप से गर्व और खुशी का क्षण रहा होगा, क्योंकि पद्म श्री देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक है। लेकिन उनके अनुसार, उस शुरुआती घोषणा के बाद मामला आगे नहीं बढ़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से आज तक कोई आधिकारिक संचार या सूचना नहीं मिली और वह तब से इस सम्मान का इंतजार कर रहे हैं।
53 साल का इंतजार बना सवाल
किसी नागरिक सम्मान के लिए 53 वर्षों तक इंतजार करना अपने आप में असाधारण स्थिति है। फारुख इंजीनियर के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वास्तव में उनके नाम की पद्म श्री के लिए घोषणा हुई थी, तो उसके बाद सम्मान औपचारिक रूप से उन्हें क्यों नहीं दिया गया। इंजीनियर का कहना है कि उन्हें उस समय अखबारों के माध्यम से पुरस्कार की घोषणा के बारे में जानकारी मिली थी, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें कोई औपचारिक पत्र या संपर्क नहीं किया गया। इतने लंबे अंतराल के बाद उनका यह दावा एक ऐसे प्रशासनिक रहस्य की ओर इशारा करता है, जिसका जवाब संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों से ही मिल सकता है।
फारुख इंजीनियर का शानदार क्रिकेट करियर
फारुख इंजीनियर भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने देश के लिए एक महत्वपूर्ण दौर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। उन्होंने 1961 से 1975 के बीच भारत के लिए 46 टेस्ट और पांच वनडे मुकाबले खेले। विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और तेजतर्रार विकेटकीपिंग ने उन्हें अपने दौर का खास खिलाड़ी बनाया। इंजीनियर उस समय भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा थे जब टेस्ट क्रिकेट में भारत धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा था। उनकी शैली पारंपरिक विकेटकीपर की छवि से अलग थी और वह बल्लेबाजी में भी टीम को तेजी से रन बनाने में मदद कर सकते थे।
भारतीय क्रिकेट में यादगार योगदान
फारुख इंजीनियर का करियर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं था। उन्होंने ऐसे दौर में भारत का प्रतिनिधित्व किया जब विदेशी परिस्थितियों में टेस्ट क्रिकेट खेलना भारतीय टीम के लिए बड़ी चुनौती माना जाता था। इंग्लैंड जैसे देशों में खेलते हुए उन्होंने अपनी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग से पहचान बनाई। उनकी क्रिकेट यात्रा भारतीय टीम के विकास के उस दौर से जुड़ी है, जब खिलाड़ियों को सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी जगह बनानी पड़ती थी। यही वजह है कि इंजीनियर का नाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सम्मान के साथ लिया जाता है।
पद्म श्री को लेकर अब भी उम्मीद कायम
53 साल बीत जाने के बाद भी फारुख इंजीनियर का कहना है कि वह अपने सम्मान का इंतजार कर रहे हैं। उनका बयान यह सवाल भी उठाता है कि क्या उस समय पद्म श्री की घोषणा किसी प्रशासनिक कारण से पूरी नहीं हो सकी थी या फिर प्रक्रिया में कोई अन्य समस्या आ गई थी। हालांकि इंजीनियर ने इस मामले में किसी तरह का आरोप लगाने के बजाय अपने अनुभव को साझा किया है। उनका कहना है कि उन्हें पुरस्कार की घोषणा की जानकारी मिली थी, लेकिन उसके बाद सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक संवाद नहीं हुआ। अब इतने वर्षों बाद यह मामला सामने आने से क्रिकेट प्रशंसकों और खेल जगत की नजरें भी इस दावे पर टिक गई हैं।
सरकार के रिकॉर्ड से मिल सकता है जवाब
फारुख इंजीनियर के दावे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए उस समय के सरकारी रिकॉर्ड, पद्म पुरस्कारों की आधिकारिक सूची और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी। यदि उनका नाम वास्तव में पद्म श्री के लिए घोषित किया गया था, तो पुरस्कार प्रक्रिया के अगले चरण में क्या हुआ, इसका पता आधिकारिक दस्तावेजों से लगाया जा सकता है। इतने पुराने मामले में रिकॉर्ड की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि पांच दशक से अधिक समय बीत चुका है। इंजीनियर का बयान फिलहाल उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है और इस पूरे मामले का अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही निकाला जा सकता है।
एक क्रिकेट दिग्गज और अधूरा सम्मान
फारुख इंजीनियर ने भारतीय क्रिकेट के लिए करीब डेढ़ दशक तक योगदान दिया और अपने दौर में देश के प्रमुख विकेटकीपर-बल्लेबाजों में अपनी जगह बनाई। पद्म श्री जैसे सम्मान की घोषणा से जुड़ी उनकी याद आज भी उनके मन में बनी हुई है। 53 साल बाद उनका यह दावा निश्चित रूप से असामान्य है और इससे उस दौर की पुरस्कार प्रक्रिया को लेकर जिज्ञासा पैदा होती है। यदि आधिकारिक रिकॉर्ड उनके दावे की पुष्टि करते हैं, तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि सम्मान उन्हें क्यों नहीं मिल पाया। फिलहाल फारुख इंजीनियर की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के लंबे करियर की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे सम्मान के इंतजार की कहानी भी है, जिसके बारे में उन्हें पांच दशक से अधिक पहले जानकारी मिली थी। अब देखना यह होगा कि उनके इस दावे पर सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।