आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि E20 पेट्रोल नीति के विरोध में 2.33 लाख लोगों की हस्ताक्षर याचिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दी गई है। उन्होंने सरकार से वाहन मालिकों की चिंताओं पर जवाब देने की मांग की।
E20 पेट्रोल नीति को लेकर सियासी बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि E20 पेट्रोल के विरोध में 2 लाख 33 हजार से अधिक लोगों द्वारा हस्ताक्षरित याचिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि यह याचिका देशभर के लाखों वाहन मालिकों की चिंताओं और आशंकाओं का प्रतिनिधित्व करती है।
पीएम मोदी को सौंपी गई 2.33 लाख लोगों की याचिका
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि E20 नीति के विरोध में 2.33 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षरों वाली याचिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचा दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब यह देखना होगा कि क्या केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी लाखों वाहन मालिकों की आवाज सुनेंगे या नहीं।
केजरीवाल के अनुसार, यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि करोड़ों वाहन चालकों और उपभोक्ताओं की चिंता का विषय है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
E20 नीति को लेकर जताई चिंता
E20 के खिलाफ़ 2 लाख 33 हज़ार से ज़्यादा लोगों की Signed Petition की Copy @ArvindKejriwal जी ने प्रधानमंत्री मोदी जी तक पहुंचा दी है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी जी करोड़ों वाहन मालिकों की आवाज़ सुनेंगे?#MarchAgainstForcedE20 pic.twitter.com/kOxVDuTe5N
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 4, 2026
अरविंद केजरीवाल का कहना है कि E20 ईंधन नीति को लेकर बड़ी संख्या में वाहन मालिकों के मन में कई सवाल और आशंकाएं हैं। उनका आरोप है कि यदि इस नीति को बिना पर्याप्त तैयारी और व्यापक चर्चा के लागू किया गया तो इसका असर आम लोगों और उनके वाहनों पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस तरह की महत्वपूर्ण नीति लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों, वाहन निर्माताओं, उपभोक्ता संगठनों और आम जनता की राय को प्राथमिकता देनी चाहिए।
‘जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए’
केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि लाखों लोग किसी नीति को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं, तो सरकार का दायित्व है कि उनकी बात सुने और पारदर्शिता के साथ जवाब दे।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि E20 नीति से जुड़े सभी तकनीकी, आर्थिक और उपभोक्ता हितों से संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए ताकि लोगों के बीच मौजूद भ्रम और आशंकाएं दूर हो सकें।
E20 पेट्रोल को लेकर क्यों हो रही है बहस?
E20 पेट्रोल यानी ऐसा ईंधन जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण में कमी आएगी और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय मिलेगी।
हालांकि विपक्ष और कुछ उपभोक्ता संगठनों का दावा है कि सभी पुराने वाहन E20 ईंधन के अनुकूल नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि पर्याप्त तैयारी के बिना इसे लागू किया गया तो कई वाहन मालिकों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
E20 नीति को लेकर बहस के बीच अब सभी की नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर है। यदि सरकार इस हस्ताक्षर अभियान और याचिका पर कोई आधिकारिक जवाब देती है या नीति को लेकर अतिरिक्त स्पष्टीकरण जारी करती है, तो इससे इस पूरे विवाद को नई दिशा मिल सकती है।
फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक विमर्श दोनों में प्रमुख विषय बना रह सकता है।