दीया मिर्जा ने अपने परिवार और सौतेली बेटी समायरा के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की। जानें क्यों उनके लिए समायरा की स्वीकृति थी सबसे महत्वपूर्ण।
बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा अपनी सहजता और संवेदनशीलता के लिए जानी जाती हैं। निजी जीवन की बात करें तो दीया अपने पति वैभव रेखी, बेटे अव्यान और सौतेली बेटी समायरा के साथ एक खुशहाल और प्रेरक ‘ब्लेंडेड फैमिली’ में रहती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में दीया ने अपने निजी जीवन के उन पहलुओं पर खुलकर बात की, जो बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने बताया कि किस तरह पिता की मृत्यु ने उनके जीवन के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया और क्यों उनके वैवाहिक जीवन में सौतेली बेटी समायरा की स्वीकृति सबसे अधिक महत्वपूर्ण थी।
पिता की मृत्यु ने बदल दी जीवन की दिशा
दीया मिर्जा ने अपने जीवन के शुरुआती वर्षों में ही अपने जैविक पिता और सौतेले पिता, दोनों को खोने का दुखद अनुभव झेला है। इन गहराइयों को साझा करते हुए दीया ने बताया कि कम उम्र में मौत को करीब से देखने से उनके जीवन की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने कहा, “जब आप जीवन की शुरुआत में ही मृत्यु को देखते हैं, तो आपको भौतिक सुखों की निरर्थकता का अहसास होता है। जब आप अपने माता-पिता को मृत देखते हैं, तो आपको समझ आता है कि वे अपने साथ कुछ नहीं ले जा सकते।”
दीया के अनुसार, किसी के चले जाने के बाद केवल उनकी यादें और उनके साथ बिताए गए जज्बात ही शेष बचते हैं। अभिनेत्री ने बताया कि 9 साल की उम्र में जैविक पिता को और 23 साल की उम्र में अपने ‘अब्बा’ को खोने की घटनाओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इन दो बड़ी घटनाओं ने उनके जीवन के फैसलों और उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया, जिससे वह आज एक अधिक परिपक्व और संवेदनशील इंसान बनी हैं।
समायरा की स्वीकृति थी विवाह की शर्त
वैभव रेखी के साथ अपने रिश्ते के बारे में बात करते हुए, दीया ने बताया कि उनके लिए सौतेली बेटी समायरा का साथ और उसकी खुशी सबसे महत्वपूर्ण थी। उन्होंने वैभव की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही समायरा को इस रिश्ते में शामिल किया था। वैभव ने समायरा को यह तय करने की पूरी आजादी दी कि क्या वह दीया को अपने परिवार का हिस्सा बनाना चाहती है।
दीया ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि समायरा की ओर से उन्हें स्वीकार्यता न मिलती या कोई बड़ा विरोध होता, तो वह वैभव के साथ इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ातीं। “उसकी (समायरा) स्वीकृति मेरे लिए बहुत मायने रखती थी। अगर शुरुआती दिनों में उसने मुझे स्वीकार नहीं किया होता या हमें लगा होता कि कोई तनाव है, तो हम इस रिश्ते को उस तरह आगे कभी नहीं बढ़ाते,” दीया ने बताया। यह बयान उनकी उस संवेदनशीलता को दर्शाता है, जिसके साथ उन्होंने एक नई पारिवारिक व्यवस्था को अपनाया।
‘मां’ नहीं, ‘दीया’ कहलाने में है सहजता
दीया का अपनी सौतेली बेटी के साथ रिश्ता किसी थोपे हुए नाम या रिश्ते से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान से बना है। पिछले साल एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया था कि समायरा उन्हें ‘मां’ या ‘मम्मा’ कहकर नहीं बुलाती, और न ही उन्हें ऐसी कोई अपेक्षा है। दीया ने कहा, “समायरा की अपनी मां है जिन्हें वह ‘मम्मा’ कहती है। वह मुझे प्यार से ‘दीया’ बुलाती है।”
यह स्वीकार्यता आज के दौर में सौतेले माता-पिता और बच्चों के रिश्ते के लिए एक मिसाल है। दीया मानती हैं कि रिश्तों को उन पर कोई ठप्पा लगाए बिना, जैसे वे स्वाभाविक रूप से विकसित हो रहे हैं, वैसे ही स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि एक स्वस्थ परिवार की नींव आपसी विश्वास और सम्मान पर टिकी होती है, न कि सामाजिक परंपराओं पर।
एक खुशहाल परिवार और करियर का सफर
दीया और व्यवसायी वैभव रेखी फरवरी 2021 में शादी के बंधन में बंधे और उसी साल मई में उनके बेटे अव्यान का जन्म हुआ। दीया अपने परिवार की झलक अक्सर सोशल मीडिया पर साझा करती हैं, जहां सहानुभूति, धैर्य और भावनात्मक ईमानदारी साफ झलकती है। अपने करियर के मोर्चे पर, दीया जल्द ही नेटफ्लिक्स की आगामी कोर्टरूम ड्रामा ‘इक्का’ में नजर आएंगी, जिसमें उनके साथ सनी देओल और अक्षय खन्ना भी मुख्य भूमिकाओं में हैं।
दीया मिर्जा का जीवन यह सिखाता है कि परिवार केवल विवाह या खून के रिश्तों से नहीं बनता, बल्कि इसे स्वीकार्यता, यादों और एक-दूसरे के प्रति सम्मान से बुना जाता है। वह एक ऐसी अभिनेत्री हैं जो स्क्रीन के बाहर भी अपनी सादगी और विचारों की परिपक्वता से लाखों लोगों को प्रेरित कर रही हैं।