दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला: लग्जरी होटलों पर MCD का टैक्स बढ़ाना कानूनी रूप से सही

दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला: लग्जरी होटलों पर MCD का टैक्स बढ़ाना कानूनी रूप से सही

दिल्ली हाई कोर्ट ने लग्जरी होटलों पर MCD द्वारा बढ़ाए गए प्रॉपर्टी टैक्स को कानूनी और तर्कसंगत माना। अदालत ने कहा कि प्रीमियम सेवाएं देने वाले होटलों पर अधिक टैक्स लगाना न्यायसंगत है। जानिए पूरी जानकारी इस फैसले के बारे में।

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा लग्जरी होटलों पर बढ़ाए गए प्रॉपर्टी टैक्स को कानूनी और तर्कसंगत करार दिया। अदालत ने कहा कि प्रीमियम सेवाएं प्रदान करने वाले होटलों पर अधिक टैक्स लगाया जाना उचित है। कोर्ट ने यह फैसला इस आधार पर दिया कि इन होटलों की स्टार रेटिंग और उच्चतर मूल्य वाले ग्राहक उन्हें अधिक कर योग्य बनाते हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला: MCD का टैक्स बढ़ाना सही

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के लग्जरी होटलों पर MCD द्वारा बढ़ाई गई प्रॉपर्टी टैक्स दर पूरी तरह से कानूनी है। कोर्ट का यह भी मानना है कि जिन होटलों की रेटिंग फाइव स्टार है और जो अमीर ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करते हैं, उन पर अधिक टैक्स लगाना न्यायसंगत है। अदालत ने यह भी माना कि जिन लोगों के पास अधिक संपत्ति और आमदनी होती है, उन्हें सार्वजनिक खजाने में अधिक योगदान देना चाहिए।

होटल मालिकों ने किया था टैक्स बढ़ाने का विरोध

कुछ लग्जरी होटलों ने MCD के फैसले को चुनौती दी थी, जिनका कहना था कि उनकी फाइव स्टार रेटिंग को 4 स्टार में बदल दिया गया और यूज़र फैक्टर को 8 से बढ़ाकर 10 कर दिया गया। इसके साथ ही टैक्स भी 10% से बढ़ाकर 20% कर दिया गया था। होटल मालिकों ने इसे अनुचित मानते हुए अदालत से इसे रद्द करने की अपील की थी।

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हाई कोर्ट ने MCD के फैसले को सही ठहराया

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली नगर निगम के फैसले को सही ठहराया। जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि होटल्स की स्टार रेटिंग के आधार पर उन्हें अलग-अलग वर्गीकृत करना तर्कसंगत है। उन्होंने यह भी माना कि फाइव स्टार और लग्जरी होटलों को प्रीमियम सुविधाएं जैसे बड़े बैंक्वेट हॉल, स्पा, फाइन डाइनिंग और कंसीयर्ज सेवाएं प्रदान की जाती हैं, जो इन्हें सामान्य होटलों से अलग करती हैं।

उच्चतर रेटिंग वाले होटलों पर टैक्स बढ़ाना उचित

दिल्ली हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ये होटल खुद ही प्रीमियम सेगमेंट में आते हैं और अमीर ग्राहकों को अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। इस कारण से टैक्स बढ़ाना मनमाना नहीं है। कोर्ट ने यह भी बताया कि स्टार रेटिंग के आधार पर होटलों की वर्गीकरण एक सरल और स्पष्ट तरीका है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रेटिंग का असर

अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे मेकमायट्रिप और गोइबिबो भी होटलों को उनकी स्टार रेटिंग के अनुसार दिखाते हैं, जिससे ग्राहक आसानी से उच्च गुणवत्ता वाले होटल का चयन कर सकते हैं। इस प्रकार, होटल मालिकों को इस नए कर प्रणाली का पालन करना ही पड़ेगा।

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