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देहरादून में मातृ संस्कार समागम का समापन, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माताओं को संस्कारों का निर्माता बताया और सात मातृ शक्तियों को सम्मानित किया।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित मातृ संस्कार समागम के समापन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि माता ही हमारे संस्कारों की निर्माता होती हैं और उनके मार्गदर्शन से ही परिवार और समाज की नींव मजबूत होती है।
कार्यक्रम का उद्देश्य और प्रमुख सत्र
विश्वमांगल्य सभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आधुनिक जीवन और तकनीकी बदलावों के बीच मातृ शक्ति की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। आयोजन में कुछ विशेष सत्र जनप्रतिनिधि परिवार की माताओं के लिए आयोजित किए गए थे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माताओं को भारतीय सनातन संस्कृति के अनुरूप तैयार करना और समाज में परिवारिक मूल्यों के संरक्षण को बढ़ावा देना था।
इस समागम का उत्तराखंड में यह पहला आयोजन था, जिसे सामाजिक चिंतक गीता धामी के प्रयासों से संभव बनाया गया। कार्यक्रम में प्रशांत हरतालकर, वृषाली ताई जोशी, मृदृला धर्मेंद्र प्रधान, रेखा शर्मा, डॉ. अनुराधा यादव, डॉ. पूजा देशमुख सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। संचालन ज्योति कोटिया ने किया।
मुख्यमंत्री धामी के संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संकल्प ही व्यक्तित्व की असली ताकत है। उन्होंने आधुनिकता और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन परिवार की मूल भावना—त्याग, सहयोग और जिम्मेदारी—को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
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मातृ शक्ति सम्मान
समापन सत्र में मुख्यमंत्री धामी ने सात मातृ शक्तियों को सम्मानित किया। सम्मानित महिलाओं में ममता राणा, ममता रावत, शैला ब्रिजनाथ, साध्वी कमलेश भारती, राजरानी अग्रवाल, मंजू टम्टा वसुश्री, कविता मलासी शामिल हैं। ये महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर समाज और परिवार में संस्कारों को बढ़ावा दे रही हैं।
विश्वमांगल्य सभा और भारतीय संस्कार
कार्यक्रम में डा. वृषाली जोशी ने उपस्थित लोगों को छह भ अपनाने की सलाह दी—भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भ्रमण और भवन—जो भारतीय संस्कृति के अनुरूप होने चाहिए। विश्वमांगल्य सभा की स्थापना 2016 में हुई थी और इसका उद्देश्य माताओं को बदलते दौर की चुनौतियों के बीच परिवार और समाज के लिए तैयार करना है।
संगठन का भविष्य
कार्यक्रम में यह तय किया गया कि उत्तराखंड में गीता धामी के नेतृत्व में संगठन की टीमें तैयार की जाएंगी। संगठन की कार्य पद्धति और जनप्रतिनिधि परिवार संपर्क विभाग की जानकारी डा. अनुराधा यादव ने साझा की।
गीता धामी ने कहा कि सामाजिक सेवा ही मानवीय जीवन की नींव है और जब यह सेवा परिवार की परंपरा बन जाती है, तो उसका प्रभाव पूरे समाज में दिखाई देता है।