1 मई 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹993 की भारी वृद्धि हुई है। दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर ₹3,071.50 का मिलेगा, जबकि घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं।
1 मई 2026 से आम जनता और व्यापारियों के लिए ईंधन की कीमतों को लेकर मिली-जुली खबरें सामने आई हैं। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹993 की भारी वृद्धि की है। इस बदलाव के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,078.50 से उछलकर ₹3,071.50 पर पहुंच गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा गया है।
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ‘आग’, घरेलू उपभोक्ता सुरक्षित
कीमतों में किया गया यह बड़ा इजाफा केवल कमर्शियल सिलेंडर तक ही सीमित है। होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि इससे बाहर खाना खाना महंगा हो सकता है। दूसरी ओर, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर अभी भी ₹913 पर स्थिर है। सरकार और तेल कंपनियों के इस “कैलिब्रेटेड प्राइसिंग” मॉडल का उद्देश्य वैश्विक बाजार की अस्थिरता से देश के लगभग 90% ईंधन उपभोक्ताओं को बचाना है।
विमान ईंधन (ATF) और केरोसिन के दाम स्थिर
हवाई यात्रा करने वालों के लिए राहत की खबर यह है कि घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ी लागत का बोझ खुद उठाकर उपभोक्ताओं को सुरक्षा प्रदान की है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए एटीएफ के दामों में वृद्धि की गई है। इसके अलावा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले केरोसिन की कीमतों को भी यथावत रखा गया है, ताकि समाज के कमजोर वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
इंडियन ऑयल (IOC) का संतुलित रुख: केवल 16% उत्पादों में तेजी
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 80% पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। केवल 16% उत्पाद—जिनमें मुख्य रूप से कमर्शियल एलपीजी, बल्क डीजल और अंतरराष्ट्रीय एटीएफ जैसे औद्योगिक ईंधन शामिल हैं—महंगे हुए हैं। वहीं, 4% उत्पादों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। आईओसी ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं को वैश्विक उतार-चढ़ाव से दूर रखकर स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया गया है।