मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रचा इतिहास, बने उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रचा इतिहास, बने उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 साल 4 महीने 10 दिन का कार्यकाल पूरा कर सबसे लंबे समय तक यूपी का मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना लिया है। जानिए इस ऐतिहासिक उपलब्धि से जुड़ी पूरी जानकारी।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे लंबे समय तक प्रदेश की सत्ता संभालने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। उन्होंने अब तक 8 साल, 4 महीने और 10 दिन का कार्यकाल पूरा कर लिया है, जो अब तक का सबसे लंबा मुख्यमंत्री कार्यकाल है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कब संभाली सत्ता?

19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के एक मजबूत चेहरे बनकर उभरे। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के साथ उन्होंने सत्ता की बागडोर संभाली और आज भी मुख्यमंत्री के पद पर मजबूती से टिके हुए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसका रिकॉर्ड तोड़ा?

योगी आदित्यनाथ से पहले पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने 8 साल 127 दिन तक उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली थी। अब योगी ने यह रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम कई रिकॉर्ड

  • यूपी के पहले ऐसे मुख्यमंत्री जिन्होंने लगातार दो कार्यकाल पूरे किए।

  • 22वें मुख्यमंत्री के तौर पर रिकॉर्ड समय तक सत्ता में रहे।

  • 273 सीटें जीतकर बीजेपी को दोबारा सत्ता दिलाई (2022 चुनाव में)।

अब तक के लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री:

मुख्यमंत्री कार्यकाल
योगी आदित्यनाथ 8 साल, 4 महीने, 10 दिन
गोविंद बल्लभ पंत 8 साल, 127 दिन
मायावती 7 साल, 16 दिन
मुलायम सिंह यादव 6 साल, 274 दिन
डॉ. सम्पूर्णानंद 5 साल, 345 दिन
अखिलेश यादव 5 साल, 4 दिन

साल 1998 में मात्र 26 साल की उम्र में गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद बने योगी आदित्यनाथ, देश के सबसे युवा सांसदों में से एक रहे। इसके बाद उन्होंने पांच बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रतिनिधित्व किया और फिर 2017 में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

गोरखनाथ मठ से राजनीति तक

मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मठ के महंत थे। धार्मिक और सामाजिक कार्यों के जरिए उन्होंने पूर्वांचल में गहरी पैठ बनाई, जो उनके राजनीतिक सफर की मजबूत नींव बनी।

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