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मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा: जनहित और विकास योजनाओं से जुड़े प्रकरणों की न्यायालय में प्राथमिकता से पैरवी करें, संबंधित विभागों को आपसी सहयोग और निरंतर समन्वय के साथ काम करें, ताकि आम जनता को समय पर राहत मिले, सरकार पर उनका भरोसा मजबूत हो।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार राज्य के आठ करोड़ लोगों के सर्वोत्तम कल्याण के लिए पूरी तरह से काम कर रही है। हम जनकल्याणकारी विकास कार्यक्रमों का अनवरत कार्यान्वयन सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे राज्य की समग्र प्रगति होगी। राज्य सरकार न्यायालयों में लंबित मामलों में प्रभावी रूप से पक्ष रखती है, ताकि इनमें विधिक कारणों से किसी प्रकार की रूकावट न हो। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने कर्तव्यों को जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करें, ताकि आम जनता को समय पर राहत मिले और सरकार पर उनका भरोसा और अधिक मजबूत हो। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार विधिक कार्यों में संसाधन नहीं छोड़ेगी।
रविवार को मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री आवास पर न्यायालयों में लंबित कई विभागों से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा की। उनका कहना था कि आम जनहित सबसे महत्वपूर्ण है। जनकल्याण से जुड़े मामले न्यायालयों में प्राथमिकता से प्रस्तुत किए जाएँ। ऐसे महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अतिरिक्त महाधिवक्ता स्तर पर नियुक्त किया जाए। उनका कहना था कि राज्य सरकार जिन प्रकरणों में उच्चस्थ अदालतों में अपील की जरूरत हो, उनमें समय पर अपील करेगी।
लंबित प्रकरणों की प्रगति को नियमित रूप से देखा जाना चाहिए-
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विभाग की तरफ से नियुक्त अधिकारीगण न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों की प्रगति की नियमित जांच करें। ताकि इन प्रकरणों को शीघ्र निस्तारित किया जा सके, ये अधिकारी न्यायालय में पैरवी के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के साथ निरंतर संपर्क में रहें। उन्हें विभागों के शासन सचिवों को निर्देश दिए कि इस काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उच्चाधिकारी स्वयं भी अधिवक्ताओं के साथ नियमित रूप से चर्चा कर प्रकरण से संबंधित विभिन्न पहलुओं से उन्हें अवगत कराएं।
पेंडेंसी को कम करने के लिए एक समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करें और इसके लिए कार्रवाई करें—
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि न्यायालय में विचाराधीन ऐसे मामले जो एक से अधिक विभागों से संबंधित हैं, उनके लिए संबंधित विभाग आपसी सहयोग और निरंतर समन्वय के साथ विधिक कार्यवाही करें। इसके लिए एक सक्षम नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जो इन विभागों और राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के साथ काम करें और काम को गति दें। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने भी अधिकारियों को मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर समन्वय करने के लिए नियुक्त करने का निर्देश दिया। उनका अनुरोध था कि कोर्ट केसेज की पेंडेंसी को कम करने के लिए एक समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करके कार्रवाई की जाए। विभाग के पेंडिंग केसेज को प्राथमिकता के आधार पर श्रेणीवार विभाजित करें और अधिक महत्वपूर्ण मामलों पर तुरंत कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विभागीय अधिकारी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन प्रकरणों में संबंधित अधिवक्ताओं से नियमित रूप से वीसी के माध्यम से मिलकर चर्चा करें और उन्हें पूरा सहयोग करें।
भर्ती प्रक्रियाओं का विधिक परीक्षण कर शीघ्र निस्तारण करें—
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार देना है। इसलिए लंबित भर्ती प्रकरणों का न्यायालय में विधिवत परीक्षण करवाकर उनका शीघ्र समाधान करवाया जाए। उन्होंने कहा, नियम बनाते समय विभागीय स्तर पर भी विस्तृत विधिक परामर्श लिया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया निर्बाध रूप से पूरी हो सके। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विकास योजनाओं से संबंधित भूमि के लंबित प्रकरणों में अदालतों से हुए स्थगन आदेशों को प्रभावी पैरवी के साथ निरस्त करवाया जाए, ताकि इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके।
मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत, पुलिस महानिदेशक श्री यू आर साहू, महाधिवक्ता श्री राजेन्द्र प्रसाद, अनेक अतिरिक्त महाधिवक्तागण और संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे। राज्य सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी कर रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता वीसी के माध्यम से बैठक से जुड़े।
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