मई 2026 से भारत में सिगरेट की कीमतें 17% तक बढ़ सकती हैं। आईटीसी और गॉडफ्रे फिलिप्स उत्पाद शुल्क के बोझ को कम करने के लिए दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
भारत में सिगरेट पीने वालों की जेब पर एक बार फिर बड़ा बोझ पड़ने वाला है। बजट और उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में बढ़ोतरी के बाद अब देश की दिग्गज तंबाकू कंपनियां ITC लिमिटेड और गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड मई 2026 से अपनी कीमतों में भारी इजाफा करने की तैयारी में हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स और NDTV प्रॉफिट के ‘चैनल चेक्स’ (वितरकों के साथ बातचीत) के अनुसार, तंबाकू कंपनियां मई 2026 से सिगरेट की कीमतों में लगभग 17 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती हैं। यह बढ़ोतरी इस साल की शुरुआत में उत्पाद शुल्क में हुई वृद्धि के बाद कीमतों में संशोधन का दूसरा दौर होगा। यदि यह निर्णय लागू होता है, तो लोकप्रिय ब्रांडों के प्रति पैकेट और प्रति स्टिक की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल आएगा।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
कीमतों में इस संभावित वृद्धि का मुख्य कारण सरकार द्वारा टैक्स ढांचे में किया गया बदलाव है। 1 फरवरी 2026 से सरकार ने सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में 30% से 40% तक की बढ़ोतरी लागू की थी। इसके अलावा, मौजूदा 40% जीएसटी (GST) का बोझ पहले से ही कंपनियों पर है।
वितरकों के अनुसार, फरवरी में हुए टैक्स इजाफे के बाद कंपनियों ने कुछ हद तक बोझ ग्राहकों पर डाला था, लेकिन अब परिचालन मार्जिन (Operating Margins) को बचाने के लिए कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी अनिवार्य हो गई है।
बिक्री में गिरावट और ‘डाउन-ट्रेडिंग’ का खतरा
टैक्स बढ़ने के बाद फरवरी और मार्च में सिगरेट की कीमतों में जो वृद्धि हुई, उसका असर अब बाजार पर दिखने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2026 में सिगरेट की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- बिक्री में कमी: खुदरा स्तर पर बिक्री में लगभग 20% की कमी आई है।
- उपभोक्ताओं का व्यवहार: कीमतें बढ़ने के कारण उपभोक्ता अब महंगे ब्रांडों को छोड़कर सस्ते विकल्पों या ‘डीलक्स’ सिगरेट की ओर रुख कर रहे हैं, जिसे व्यापारिक भाषा में ‘डाउन-ट्रेडिंग’ कहा जाता है। प्रीमियम किंग-साइज सेगमेंट, जो कंपनियों के राजस्व का बड़ा हिस्सा है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
अवैध बाजार (Illicit Trade) की चुनौती
तंबाकू उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी से अवैध सिगरेट के बाजार को बढ़ावा मिलता है। भारत में बिकने वाली लगभग 26.1% सिगरेट पहले से ही अवैध या तस्करी के माध्यम से आती हैं। कानूनी सिगरेट के दाम बढ़ने से लोग बिना टैक्स वाली सस्ती सिगरेट की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे सरकार को सालाना ₹21,000–₹23,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होता है।
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों का शेयर बाजार पर सकारात्मक असर दिखा। बुधवार को ITC के शेयरों में 4% की तेजी देखी गई, वहीं गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर 7% से ज्यादा उछल गए। निवेशकों को उम्मीद है कि कीमतों में वृद्धि से कंपनियों के मुनाफे में सुधार होगा, हालांकि लंबी अवधि में बिक्री की मात्रा (Volume) में गिरावट एक चिंता का विषय बनी हुई है।