Eye Problems: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 30% बच्चे आंखों की किसी न किसी समस्या से ग्रस्त हैं, जिनमें से आधे मामलों की पहचान देर से हो पाती है। आज की डिजिटल लाइफस्टाइल के कारण बच्चों की आंखों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे मायोपिया और अन्य नेत्र समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
बच्चों में बढ़ती आंखों की समस्याएं
मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की आंखों पर जोर पड़ता है। पिछले दस वर्षों में बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) के मामले दोगुने हो गए हैं, जो उनकी पढ़ाई, खेलकूद और मानसिक विकास को प्रभावित कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं।
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बच्चों की नजर कमजोर होने के संकेत
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बार-बार आंखें मिचमिचाना: बच्चों की आंखें ठीक से फोकस नहीं कर पा रही हैं, जिससे आंखों की थकान और कमजोरी होती है।
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बहुत पास से पढ़ना या टीवी देखना: जब बच्चे किताबें या टीवी बहुत पास से देखते हैं, तो यह नजर कमजोर होने का शुरुआती लक्षण होता है।
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अक्सर सिरदर्द और आंखों में दर्द: लंबे समय तक स्क्रीन देखने या पढ़ाई के बाद सिरदर्द होना डिजिटल आई स्ट्रेन का संकेत है।
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आंखों को बार-बार मलना: यह ड्राई आई सिंड्रोम, एलर्जी या नजर कमजोर होने की तरफ इशारा करता है और इससे गंभीर समस्या हो सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की आंखों में इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। 6 महीने से छोटे बच्चों को खासकर काफ़ी सावधानी की जरूरत होती है। अगर कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बचाव के तरीके
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बच्चों को ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने न बैठने दें।
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रोजाना कम से कम एक घंटे बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
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समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहें।
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बच्चों को पढ़ते या टीवी देखते समय उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दें।