अब हर मैच हमारे लिए फाइनल की तरह है”; लखनऊ से हार के बाद CSK के बैटिंग कोच माइकल हसी का बड़ा बयान, टीम के सामने ‘करो या मरो’ की स्थिति

अब हर मैच हमारे लिए फाइनल की तरह है"; लखनऊ से हार के बाद CSK के बैटिंग कोच माइकल हसी का बड़ा बयान, टीम के सामने 'करो या मरो' की स्थिति

लखनऊ से हार के बाद चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए प्लेऑफ की राह मुश्किल हो गई है। बैटिंग कोच माइकल हसी ने कहा कि अब टीम के लिए हर मुकाबला फाइनल की तरह ‘करो या मरो’ का है।

“इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) के प्लेऑफ की रेस अब अपने सबसे रोमांचक और कांटे के मोड़ पर पहुंच चुकी है। पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) इस समय बेहद मुश्किल स्थिति में खड़ी नजर आ रही है। लखनऊ सुपर जाइंट्स (LSG) के खिलाफ मिली करारी शिकस्त के बाद चेन्नई का प्लेऑफ का सफर अब एक-एक रन के लिए तरसता दिख रहा है। इस हार के बाद रुतुराज गायकवाड़ की कप्तानी वाली सीएसके 13 मैचों में केवल 12 अंकों पर ठिठक गई है, जिसने उसके आखिरी दो लीग मैचों को ‘अघोषित नॉकआउट’ मुकाबलों में तब्दील कर दिया है।

मैच के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेन्नई सुपर किंग्स के बल्लेबाजी कोच माइकल हसी ने टीम की स्थिति को लेकर बेबाक सच्चाई सामने रखी। हालांकि, इस ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने घबराने के बजाय इस दबाव वाली स्थिति का स्वागत किया है। हसी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर टीम को टूर्नामेंट में जिंदा रहना है, तो उसे अब मैदान पर उतरते ही हर मुकाबले को आईपीएल फाइनल की तरह खेलना होगा।

गणितीय जाल में फंसी चेन्नई: दो जीत और किस्मत का सहारा

लीग चरण में केवल दो मैच बचे होने और खाते में महज 12 अंक होने के कारण, ‘येलो आर्मी’ के लिए टॉप-4 में जगह बनाने की राह बेहद संकरी और कठिन हो गई है। चेन्नई को प्लेऑफ का टिकट पक्का करने के लिए अब एक बेहद कड़े समीकरण से गुजरना होगा। टीम को अपने बचे हुए दोनों मैच हर हाल में जीतने होंगे ताकि वह 16 अंकों के जादुई आंकड़े तक पहुंच सके।

लेकिन, केवल जीत ही काफी नहीं होगी। इस सीजन में टीमों के बीच चल रही कड़ी टक्कर को देखते हुए, चेन्नई को अपनी नेट रन रेट (NRR) को भी काफी मजबूत रखना होगा और साथ ही अंक तालिका के मध्य में बैठी अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा कि वे उनके पक्ष में जाएं।

माइकल हसी ने ईमानदारी से स्वीकार किया, “हमें अपने पिछले दो मैच जीतने ही होंगे। मैंने अंक तालिका का बहुत बारीकी से अध्ययन नहीं किया है, लेकिन हाँ, कई टीमें टॉप-4 में आखिरी के कुछ स्थानों के लिए आपस में लड़ रही हैं। हम अब ऐसी स्थिति में हैं जहाँ गलती की कोई गुंजाइश नहीं है।”

दबाव के इस माहौल को पसंद करते हैं हसी: ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामे के लिए तैयार

जहां एक तरफ क्रिकेट पंडित और फैंस चेन्नई के क्वालीफाई करने की संभावनाओं को लेकर गुणा-भाग कर रहे हैं और तनाव में हैं, वहीं माइकल हसी ने खुलासा किया कि आईपीएल का यह ‘करो या मरो’ वाला फेज असल में टूर्नामेंट का उनका सबसे पसंदीदा हिस्सा है। वे चाहते हैं कि खिलाड़ी इस दबाव को बोझ मानने के बजाय बेहतर प्रदर्शन करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करें।

तनाव के बीच सकारात्मक रुख अपनाते हुए हसी ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मुझे टूर्नामेंट का यह समय बहुत पसंद है क्योंकि अब हर मैच एक फाइनल की तरह है, और हम अभी उसी स्थिति में खड़े हैं।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मनोवैज्ञानिक दबाव केवल चेन्नई के ड्रेसिंग रूम पर नहीं है। आईपीएल जैसे बड़े और प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में जब आखिरी स्पॉट की लड़ाई होती है, तो कई फ्रेंचाइजी एक जैसा ही तनाव महसूस करती हैं। हसी ने कहा, “यह टूर्नामेंट का वह पड़ाव है जहां दबाव वास्तव में हर किसी पर है, न केवल हम पर, बल्कि अन्य सभी टीमों पर भी। और इस अंतिम चरण में आप कुछ भी अप्रत्याशित या क्रेजी होते हुए देख सकते हैं।”

कप्तान की शांति और टीम का अटूट विश्वास

लखनऊ के खिलाफ मिली निराशाजनक हार के बाद भी चेन्नई सुपर किंग्स के खेमे में मायूसी का माहौल नहीं है। मैच के बाद कप्तान रुतुराज गायकवाड़ ने जिस तरह शांत और संयमित चेहरा दिखाया था और कहा था कि प्लेऑफ की राह अभी भी उनके नियंत्रण में है, उसी सुर में हसी ने भी टीम के अटूट भरोसे को दोहराया।

एमएस धोनी के बाद रुतुराज गायकवाड़ के हाथों में आई कप्तानी की इस कमान को कई रणनीतिक परीक्षाओं से गुजरना पड़ा है, लेकिन युवा कप्तान की यह शांति पूरी टीम में भी दिखाई दे रही है। चेन्नई का इतिहास रहा है कि जब भी उनकी पीठ दीवार से लगती है, वे सबसे खतरनाक बनकर उभरते हैं और कई सीजनों में उन्होंने इतिहास पलटा है।

बैटिंग कोच ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि टीम पैनिक (घबराने) होने के बजाय अपनी पूरी ऊर्जा को लीग चरण के इस रोमांचक अंत के लिए लगा रही है। उन्होंने कहा, “तो हमारे पास अभी भी मौका है… हमें अभी भी पूरा विश्वास है कि हम प्लेऑफ का सफर तय कर लेंगे।”

चेन्नई सुपर किंग्स के लिए अब प्रयोगों और गलतियों का समय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। आने वाले दो मैचों में उनके शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को क्लीनिकल प्रदर्शन करना होगा और डेथ ओवरों के गेंदबाजों को कड़े दबाव में सधी हुई गेंदबाजी करनी होगी। अब देखना होगा कि डिफेंडिंग चैंपियन इस संकट से उबरकर मुख्य टेबल पर अपनी जगह सुरक्षित रख पाती है या नहीं।

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