CBSE विवाद: अधिकारियों के तबादले को AAP ने बताया ‘लीपापोती’, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

CBSE विवाद: अधिकारियों के तबादले को AAP ने बताया 'लीपापोती', शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

 

CBSE अधिकारियों के तबादले पर AAP का बड़ा हमला।  AAP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। जानें पूरा मामला।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उपजे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए CBSE के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया है। हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस कदम को महज दिखावा और ‘लीपापोती’ करार दिया है।

दिल्ली की वरिष्ठ नेता आतिशी और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कार्रवाई असली दोषियों को बचाने की एक कोशिश मात्र है।

AAP का केंद्र पर सीधा हमला

आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि परीक्षा प्रणाली में हुई भारी गड़बड़ियों और लाखों छात्रों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ की जिम्मेदारी अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार केवल नौकरशाहों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि असली जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों के तबादले भर से छात्रों की समस्याओं का समाधान हो जाएगा? उन्होंने इसे छात्रों और उनके अभिभावकों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है।

क्या हैं AAP की प्रमुख मांगें?

आम आदमी पार्टी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी प्राथमिक मांग बनाया है। पार्टी का तर्क है कि:

  • राजनीतिक जवाबदेही: CBSE की कार्यप्रणाली में हुई खामियों के लिए शिक्षा मंत्री को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हुए उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए।
  • निष्पक्ष जांच: केवल अधिकारियों को हटाना काफी नहीं है; पूरे OSM सिस्टम और टेंडर प्रक्रिया में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक आयोग के माध्यम से होनी चाहिए।
  • परीक्षा तंत्र में सुधार: NEET, SSC और CUET जैसी अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी जिस तरह की अव्यवस्था देखने को मिल रही है, वह केंद्र सरकार के पूरे शिक्षा तंत्र के विफल होने का प्रमाण है।

विवाद का केंद्र: ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली

विगत कुछ हफ्तों से छात्रों और अभिभावकों द्वारा CBSE बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन में तकनीकी खामियों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे थे। मामला तब और गंभीर हो गया जब टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों और सुरक्षा खामियों को उजागर किया गया। अब सरकार ने एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह जांच भी केवल मामले को दबाने के लिए की गई है।

आम आदमी पार्टी ने साफ किया है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और पूरी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा। पार्टी ने इसे छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए देशभर के युवाओं को लामबंद होने का आह्वान किया है।

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