फ्लाईदुबई FZ1073 हमले में घायल कैप्टन स्मित मच्छार ने पीएम मोदी को बताया कि संकट के दौरान वह हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। जानें पूरी घटना।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुए भयावह कॉकपिट हमले के बाद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिससे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने का मौका मिला। 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अबू धाबी के अस्पताल में इलाज करा रहे कैप्टन स्मित से वीडियो कॉल पर बातचीत की। इस दौरान पायलट ने प्रधानमंत्री को बताया कि हमले के दौरान वह हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुश्किल और डरावने क्षणों में यह प्रार्थना उन्हें मानसिक रूप से संभालने में मदद करती है।
हमले के बीच हनुमान चालीसा का लिया सहारा
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत में कैप्टन स्मित ने उस भयावह समय को याद किया, जब वह घायल अवस्था में कॉकपिट के फर्श पर थे और विमान तेजी से नीचे जा रहा था। उन्होंने बताया कि जब उन्हें डर महसूस होता है तो वह हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। घटना के दौरान भी उन्होंने लगातार हनुमान चालीसा का पाठ किया। कैप्टन स्मित ने इसे अपने लिए आस्था और मानसिक संबल का माध्यम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि ईश्वर की कृपा उनके साथ थी।
कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि वह अपने दो साल के बेटे के साथ भी हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। विदेश में रहते हुए भी वह अपने परिवार के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने की कोशिश करते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि संकट की उस घड़ी में प्रार्थना उनके लिए भावनात्मक सहारे का काम कर रही थी।
घायल होने के बाद भी कॉकपिट का दरवाजा खोला
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में अचानक कॉकपिट के अंदर स्थिति बिगड़ गई। रिपोर्टों के मुताबिक, ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर हमला कर दिया। इसके बाद विमान ने बेहद तेजी से ऊंचाई खोनी शुरू कर दी। विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था और कुछ ही समय में हजारों फीट नीचे चला गया। रॉयटर्स के अनुसार, विमान लगभग 30 सेकंड में 16 हजार फीट से ज्यादा नीचे गिर गया था।
इस दौरान कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो चुके थे, लेकिन उन्होंने विमान की स्थिति को समझा और किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने का प्रयास किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि उन्हें पता था कि अगर उन्होंने कार्रवाई नहीं की तो विमान में मौजूद सभी लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। आखिरकार वह दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर को काबू करने में मदद की।
174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका
फ्लाईदुबई की यह उड़ान दुबई से तेल अवीव जा रही थी और इसमें 174 लोग सवार थे। घटना के दौरान विमान की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। कॉकपिट में हुए संघर्ष के बाद यात्रियों और चालक दल के लोगों ने हमलावर को काबू किया। विमान को सऊदी अरब के तबूक की ओर मोड़ा गया, जहां उसे सुरक्षित उतारा गया। बाद में यात्रियों को दूसरे विमान से तेल अवीव पहुंचाया गया।
कैप्टन स्मित के अलावा विमान में मौजूद अन्य लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। रिपोर्टों के अनुसार, यात्रियों में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की। इस पूरे घटनाक्रम ने एक संभावित बड़ी विमान दुर्घटना को टालने में कई लोगों के सामूहिक प्रयास की भूमिका को सामने रखा है।
PM मोदी ने की कैप्टन स्मित की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉल के दौरान कैप्टन स्मित की बहादुरी, धैर्य और सूझबूझ की प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा कि संकट के समय उन्होंने बेहद कम समय में महत्वपूर्ण फैसले लिए और अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों की सुरक्षा में योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की।
बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक भी हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि उनसे बात करना उनके लिए बहुत खास पल है। उन्होंने पीएम मोदी को अपना “सबसे बड़ा आदर्श” बताया और कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री से बातचीत करने का अवसर मिलेगा। प्रधानमंत्री ने भी उन्हें आश्वस्त किया कि जब भी उन्हें किसी मदद की जरूरत हो, वह संपर्क कर सकते हैं।
17 साल का उड़ान अनुभव आया काम
कैप्टन स्मित मच्छार के पास करीब 17 साल का उड़ान अनुभव है, जिसमें लगभग 11 साल उन्होंने कप्तान के रूप में बिताए हैं। प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि घायल होने के बावजूद उनका अनुभव उन्हें यह समझने में मदद कर रहा था कि विमान तेजी से नीचे जा रहा है। उन्होंने अपनी आंखें बंद होने की स्थिति में भी विमान के उतरने का एहसास किया और इसके बाद कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की।
रिपोर्टों के अनुसार, हमले के बाद कैप्टन स्मित को पहले सऊदी अरब में चिकित्सा सहायता दी गई और बाद में उन्हें अबू धाबी ले जाया गया। फिलहाल उनका इलाज जारी है और उनके स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी सामने आई है। वहीं, घटना की जांच भी जारी है और हमले के पीछे के मकसद को लेकर अधिकारियों की जांच चल रही है।
देशभर में हो रही बहादुरी की चर्चा
फ्लाईदुबई की इस घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की भारत और विदेशों में चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई नेताओं ने उनके साहस की सराहना की है। घटना ने यह भी दिखाया कि विमान में अचानक पैदा हुए गंभीर संकट के दौरान पायलट के अनुभव, यात्रियों की तत्परता और चालक दल की सामूहिक कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। कैप्टन स्मित फिलहाल अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं और उनके परिवार तथा भारत सरकार की ओर से उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है।