क्या आप भी देर रात तक जागते हैं या लगातार स्क्रीन देखते हैं? जानिए कौन सी 8 दैनिक आदतें आपके दिमाग को नुकसान पहुँचा रही हैं और इनसे बचने के आसान तरीके।
आपका मस्तिष्क चौबीसों घंटे बिना रुके काम करता है। यह आपको सोचने, याद रखने, शारीरिक गतिविधियों को संचालित करने, सोने, निर्णय लेने और यहाँ तक कि अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करता है। शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र (Command Centre) होने के बावजूद, अक्सर मस्तिष्क के स्वास्थ्य को तब तक नजरअंदाज किया जाता है जब तक कि कोई गंभीर समस्या सामने न आ जाए। यह एक चिंताजनक स्थिति है, खासकर ऐसे समय में जब न्यूरोलॉजिकल यानी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में तीन में से एक से अधिक लोग स्ट्रोक, डिमेंशिया (मनोभ्रंश), माइग्रेन और मिर्गी जैसे मस्तिष्क संबंधी विकारों से प्रभावित हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि मस्तिष्क स्वास्थ्य के अधिकांश जोखिम धीरे-धीरे विकसित होते हैं और हमारी दैनिक जीवनशैली से जुड़े होते हैं, जिसका अर्थ है कि सही आदतें अपनाकर इनसे बचा जा सकता है।
राजीव गांधी कैंसर संस्थान और अनुसंधान केंद्र (RGCIRC), दिल्ली के ब्रेन एंड स्पाइन सर्जन डॉ. ईश्वर चंद्र प्रेमसागर का कहना है, “एक ब्रेन और स्पाइन सर्जन के रूप में, मैं अक्सर लोगों को लक्षण दिखाई देने के बाद ही मस्तिष्क स्वास्थ्य पर ध्यान देते हुए देखता हूँ। वास्तव में, दिमाग की सुरक्षा हमारे द्वारा रोज लिए जाने वाले छोटे-छोटे फैसलों और आदतों से शुरू होती है।” आइए जानते हैं उन दैनिक आदतों के बारे में जो आपके दिमाग को चुपचाप नुकसान पहुँचा सकती हैं और उनके बेहतर विकल्प क्या हैं।
1. पर्याप्त और सही समय पर नींद न लेना
नींद के दौरान मस्तिष्क खुद की मरम्मत करता है, दिनभर की यादों को व्यवस्थित करता है और अगले दिन के लिए ऊर्जा को पुनर्जीवित करता है। लगातार कम सोने से एकाग्रता, याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक संतुलन प्रभावित होता है। बहुत से लोग देर रात तक काम करने, वेब सीरीज देखने या सोशल मीडिया स्क्रॉल करने के कारण कम सोते हैं और सोचते हैं कि वे बाद में इसकी भरपाई कर लेंगे, लेकिन यह पैटर्न दिमाग को नुकसान पहुँचाता है। डॉ. प्रेमसागर बताते हैं कि सबसे आरामदायक और मस्तिष्क को तरोताजा करने वाली नींद रात 10 बजे से सुबह 4 बजे के बीच होती है।
बचाव के उपाय:
- सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें।
- सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें।
- रात में देर से भारी भोजन करने से बचें।
यदि आप बहुत तेज़ खर्राटे लेते हैं या दिन भर अत्यधिक थकान महसूस करते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि यह स्लीप एप्निया का लक्षण हो सकता है।
2. घंटों लगातार बैठकर काम करना
डेस्क जॉब आपके करियर के लिए अच्छी हो सकती है, लेकिन यह आपके दिमाग के लिए उतनी अनुकूल नहीं है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से शरीर में रक्त का संचार कम हो जाता है। इसके अलावा, इससे मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ता है, जो आगे चलकर दिमाग की कार्यप्रणाली को सीधे प्रभावित करते हैं।
बचाव के उपाय:
- काम के दौरान हर एक घंटे में उठकर थोड़ा स्ट्रेचिंग करें।
- फोन पर बात करते समय टहलने की आदत डालें।
- लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
- अपनी साप्ताहिक दिनचर्या में वॉक, साइकिल चलाना या तैराकी जैसे व्यायाम शामिल करें।
3. अत्यधिक स्क्रीन टाइम और डिजिटल थकान
सोशल मीडिया, काम के ईमेल या वीडियो स्ट्रीमिंग—आज के समय में स्क्रीन जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है। लेकिन बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम मानसिक थकान, ध्यान की कमी और नींद में खलल का कारण बनता है। लगातार मल्टीटास्किंग और सूचनाओं के भारी प्रवाह (Information Overload) से दिमाग के लिए किसी एक चीज़ पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है।
बचाव के उपाय:
- सुबह उठते ही सबसे पहले अपना फोन देखने से बचें।
- काम के दौरान नियमित अंतराल पर डिजिटल ब्रेक लें।
- स्क्रीन पर लगातार काम करते समय हर घंटे आँखों के व्यायाम (Eye Exercises) करें।
- एक समय में कई काम करने के बजाय एक ही काम पर अपना ध्यान केंद्रित करें।
4. खराब खान-पान और पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
मस्तिष्क को ठीक से काम करने के लिए निरंतर ऊर्जा और सही पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा (Unhealthy Fats) वाला आहार दिमाग में सूजन (Inflammation) को बढ़ा सकता है और याददाश्त को कमजोर कर सकता है। इसके साथ ही, डिहाइड्रेशन या शरीर में पानी की कमी से सिरदर्द, मूड में बदलाव और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है।
बचाव के उपाय:
- अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे (Walnuts/Almonds), फल, बीज और साबुत अनाज शामिल करें।
- अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों और जंक फूड का सेवन सीमित करें।
- दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर और दिमाग हाइड्रेटेड रहें।