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भ्रामरी प्राणायाम से तनाव और मानसिक बेचैनी से तुरंत राहत पाएं। जानें सही तरीका, फायदे और कैसे यह नर्वस सिस्टम को संतुलित करता है।
आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में तनाव और मानसिक बेचैनी आम बात हो गई है। ऐसे में योग और प्राणायाम का अभ्यास हमारी सेहत और मानसिक शांति के लिए बेहद उपयोगी है। इनमें भ्रामरी प्राणायाम एक लोकप्रिय और प्रभावशाली तरीका है, जो मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट के जरिए दिमाग और नर्वस सिस्टम को शांत करता है।
भ्रामरी प्राणायाम क्या है?
भ्रामरी प्राणायाम केवल सांस लेकर गुनगुनाने तक सीमित नहीं है। इसमें सही बॉडी पोस्चर, सांस पर नियंत्रण, हाथों की स्थिति और पूर्ण एकाग्रता शामिल होती है। ये सभी तत्व मिलकर नर्वस सिस्टम और मानसिक स्थिति पर गहरा असर डालते हैं। अक्सर लोग इसे अधूरे तरीके से करते हैं, जिससे इसके फायदे कम हो जाते हैं।
एक्सपर्ट का कहना
योग और ध्यान के विशेषज्ञ हिमालयन सिद्धा अक्षर के अनुसार, भ्रामरी प्राणायाम सिर्फ रिलैक्सेशन नहीं बल्कि मूड और ऊर्जा को संतुलित करने वाला अभ्यास है। उन्होंने बताया कि यह बिखरी हुई मानसिक स्थिति को शांत कर वर्तमान में केंद्रित करती है और अंदरूनी बेचैनी को कम करती है।
नर्वस सिस्टम के लिए फायदेमंद
भ्रामरी प्राणायाम में ध्वनि और कंपन को शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सांस से उत्पन्न कंपन खोपड़ी, साइनस और आसपास के टिश्यूज़ तक फैलती है, जिससे नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह अभ्यास वागल टोन बढ़ाता है और पैरासिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे शरीर “रेस्ट एंड डाइजेस्ट” मोड में चला जाता है और तनाव हार्मोन का स्तर घटता है।
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सेहत पर प्रभाव
भ्रामरी प्राणायाम नियमित करने से:
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तनाव और चिंता कम होती है
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मन की स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है
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हार्ट रेट स्थिर रहता है और नर्वस सिस्टम संतुलित होता है
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सिर और चेहरे के आसपास के टिश्यूज़ को राहत मिलती है
भ्रामरी प्राणायाम कैसे करें?
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किसी शांत जगह पर आराम से बैठें, रीढ़ सीधी रखें और आंखें बंद करें।
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नाक से गहरी सांस लें।
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सांस छोड़ते समय होंठ बंद रखें और मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट करें।
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कंपन को सिर और चेहरे में महसूस करें।
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इसे 6-10 बार दोहराएं और अंत में कुछ मिनट शांत बैठकर अनुभव को महसूस करें।
नियमित अभ्यास से तनाव में कमी, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता महसूस होती है। यह न केवल बाहरी शोर को कम करता है, बल्कि अंदर की मानसिक शांति और संतुलन भी बढ़ाता है।