भौम प्रदोष व्रत 2025: 2 दिसंबर को 3 शुभ योगों के साथ मनाया जाएगा, जानें शिव पूजा का मुहूर्त

भौम प्रदोष व्रत 2025: 2 दिसंबर को 3 शुभ योगों के साथ मनाया जाएगा, जानें शिव पूजा का मुहूर्त

भौम प्रदोष व्रत 2025 2 दिसंबर को 3 शुभ योगों के साथ मनाया जाएगा। जानें इस दिन के लिए शिव पूजा का मुहूर्त, शुभ योग और व्रत के महत्व के बारे में।

इस साल भौम प्रदोष व्रत 2 दिसंबर 2025, मंगलवार को मनाया जाएगा, जो कि मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रहा है। इस दिन तीन शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिससे यह व्रत अत्यधिक शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस दिन शिव पूजा के लिए लगभग ढाई घंटे का समय मिलेगा, जो भक्तों के लिए एक विशेष अवसर होगा।

भौम प्रदोष व्रत 2025 का महत्व

भौम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। चूंकि यह व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। मंगल ग्रह से जुड़ा होने के कारण यह दिन विशेष रूप से मार्स (भौम) से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है।

2 दिसंबर को बन रहे 3 शुभ योग

इस वर्ष भौम प्रदोष व्रत पर तीन महत्वपूर्ण शुभ योग बन रहे हैं, जो इस दिन को और भी खास बनाते हैं:

  1. सर्वार्थ सिद्धि योग: यह योग 2 दिसंबर को सुबह 6:57 बजे से रात 8:51 बजे तक रहेगा।

  2. अमृत सिद्धि योग: यह योग भी 2 दिसंबर को सुबह 6:57 बजे से रात 8:51 बजे तक रहेगा।

  3. रवि योग: यह योग 2 दिसंबर को रात 8:51 बजे से रात 1:22 बजे (अगले दिन) तक रहेगा।

इन तीनों शुभ योगों के प्रभाव से यह दिन बहुत ही मंगलकारी और लाभकारी रहेगा।

also read: अन्नपूर्णा जयंती 2025: अन्नपूर्णा जयंती कब और क्यों मनाई…

भौम प्रदोष व्रत 2025 शिव पूजा का समय

2 दिसंबर 2025 को शिव पूजा का सबसे शुभ समय शाम 5:24 बजे से रात 8:07 बजे तक रहेगा। इस समय में कुल 2 घंटे 43 मिनट का पूजन मुहूर्त मिलेगा, जो भक्तों के लिए पूजा करने के लिए उत्तम रहेगा।

प्रदोष व्रत का समय और महत्व

प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, और यह विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद किया जाता है। मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस बार 2 दिसंबर को अपराह्न 3:57 बजे से शुरू होकर 3 दिसंबर को दोपहर 12:25 बजे तक रहेगी। इस समय में, विशेष रूप से प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय से रात के मध्य तक) में पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है।

Related posts

वास्तु शास्त्र 2026: घर की सुख-समृद्धि और धन लाभ के लिए लगाएं ये 6 लकी पौधे, जानें सही दिशा और नियम

अपरा एकादशी 2026: धन-धान्य और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन जरूर करें तुलसी पूजन

वट सावित्री व्रत 2026: 16 मई को रखा जाएगा व्रत; जानें बरगद के पेड़ पर क्यों लपेटा जाता है 7 बार कच्चा सूत

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More