भाई दूज 2025: यमलोक के भय से मुक्ति के लिए मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना स्नान का करें पावन कर्म

भाई दूज 2025: यमलोक के भय से मुक्ति के लिए मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना स्नान का करें पावन कर्म

भाई दूज 2025 पर मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना स्नान का विशेष महत्व है। इस पावन दिन भाई-बहन साथ स्नान कर तिलक करते हैं, जिससे पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और यमलोक के भय से मुक्ति मिलती है।

भाई दूज के पावन अवसर पर मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना नदी में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन भाई-बहन साथ मिलकर यमुना स्नान करते हैं और बहन द्वारा भाई को तिलक लगाने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

यमुना स्नान और भाई दूज की धार्मिक महत्ता

धर्मशास्त्रों में वर्णित है कि भाई दूज के दिन यमुना नदी में स्नान करने से पितृ ऋण मुक्ति होती है और भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और सौहार्द स्थायी होता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक कृत्य है बल्कि आत्मिक शुद्धि और जागरूकता का भी प्रतीक है। कहा जाता है कि इस दिन यमराज का भय समाप्त हो जाता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पौराणिक कथा: यमराज और यमुना का प्रेम

स्कंद पुराण, पद्म पुराण और गरुड़ पुराण जैसी धार्मिक ग्रंथों में यमराज और यमुना देवी के बीच की कथा मिलती है। यमुना अपनी बहन की तरह यमराज को बार-बार बुलाती थीं, लेकिन यमराज अपने कार्यों में व्यस्त रहते थे। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन के घर पहुंचे, जहां यमुना ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया, स्नान कराया, तिलक लगाया और भोजन करवाया। यमराज ने आशीर्वाद दिया कि जो भाई-बहन इस दिन यमुना में स्नान करें और तिलक करें, उन्हें यमलोक के भय से मुक्ति मिलती है। तब से यह परंपरा चली आ रही है।

also read: दिवाली 2025: क्यों की जाती है लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी…

विश्राम घाट: मथुरा का पवित्र स्थल

मथुरा का विश्राम घाट यमुना स्नान के लिए सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध के बाद यहीं विश्राम किया था, इसलिए इसे ‘विश्राम घाट’ नाम मिला। भाई दूज के दिन हजारों श्रद्धालु यहीं स्नान के लिए जुटते हैं, क्योंकि यह यमराज और यमुना के प्रेम का प्रतीक स्थल है।

शास्त्रों में यमुना स्नान का महत्व

पुराणों में कहा गया है, “यमुना स्नानं तु द्वितीयायां कृतं येन तेन मुक्तिः सर्वपापेभ्यः।” अर्थात, कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना में स्नान करने वाला सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भाई दूज और यमुना स्नान

कार्तिक माह में जब मौसम ठंडा होना शुरू होता है, तब यमुना जैसे स्वच्छ जल में स्नान करना शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। भाई-बहन का साथ स्नान करना परिवार में एकता, प्रेम और पवित्रता का प्रतीक है। यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि प्रकृति, परिवार और रिश्तों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संदेश भी देता है।

Related posts

वास्तु शास्त्र 2026: घर की सुख-समृद्धि और धन लाभ के लिए लगाएं ये 6 लकी पौधे, जानें सही दिशा और नियम

अपरा एकादशी 2026: धन-धान्य और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन जरूर करें तुलसी पूजन

वट सावित्री व्रत 2026: 16 मई को रखा जाएगा व्रत; जानें बरगद के पेड़ पर क्यों लपेटा जाता है 7 बार कच्चा सूत

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More