मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में नानकसर संप्रदाय के प्रमुख बाबा लखा सिंह से मुलाकात की। बाबा लखा सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन कानून की सराहना करते हुए मान को सिरोपा भेंट किया।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को चंडीगढ़ में नानकसर संप्रदाय के प्रमुख बाबा लखा सिंह जी से मुलाकात की। इस दौरान बाबा लखा सिंह ने पंजाब सरकार की ओर से पारित ‘जागृत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ की सराहना की। मुलाकात के दौरान बाबा लखा सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु घर की ओर से सिरोपा भेंट कर आशीर्वाद दिया।
बाबा लखा सिंह ने कानून की सराहना की
AAP की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, बाबा लखा सिंह ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए कानून को मजबूत करना महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कानून को गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान और पवित्रता की रक्षा से जुड़ा कदम बताया।
यह कानून अप्रैल 2026 में पंजाब विधानसभा से पारित हुआ था और राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे कानून का रूप मिला। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
‘गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा कायम रखना सरकार का फर्ज’
CM @BhagwantMann ਨੇ ਅੱਜ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿਖੇ ਨਾਨਕਸਰ ਸੰਪ੍ਰਦਾਇ ਦੇ ਮੁਖੀ ਬਾਬਾ ਲੱਖਾ ਸਿੰਘ ਜੀ ਨਾਲ਼ ਮੁਲਾਕਾਤ ਕੀਤੀ। ਬਾਬਾ ਜੀ ਨੇ ਮਾਨ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਪਾਸ ਕੀਤੇ ‘ਜਾਗਤ ਜੋਤ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਸਤਿਕਾਰ (ਸੋਧ) ਐਕਟ 2026’ ਦੀ ਸ਼ਲਾਘਾ ਕਰਦਿਆਂ ਗੁਰੂ ਘਰ ਦੀ ਬਖ਼ਸ਼ਿਸ਼ ਸਿਰੋਪਾਓ ਭੇਂਟ ਕਰਕੇ ਆਸ਼ੀਰਵਾਦ ਦਿੱਤਾ।
ਸ਼ਬਦ ਗੁਰੂ, ਸਾਹਿਬ… pic.twitter.com/Yh5V3rswJI
— AAP Punjab (@AAPPunjab) September 29, 2026
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मुलाकात के बाद कहा कि शब्द गुरु, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान, पवित्रता और मर्यादा को बनाए रखना राज्य सरकार का मूल कर्तव्य है। उन्होंने बाबा लखा सिंह की ओर से दिए गए सिरोपे और आशीर्वाद के लिए उनका धन्यवाद किया।
मान ने कहा कि उनकी सरकार पंजाब की तरक्की, शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने के लिए गुरु साहिबानों और पीरों द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कानून को लेकर पहले भी सामने आए थे मतभेद
गौरतलब है कि गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन कानून को लेकर पंजाब में पहले से चर्चा और मतभेद रहे हैं। अकाल तख्त की ओर से कानून की कुछ धाराओं में बदलाव के सुझाव दिए गए थे। जुलाई में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि सरकार ने इन सुझावों पर कानूनी राय लेने के लिए उन्हें पंजाब के एडवोकेट जनरल के पास भेजा है।
सितंबर में सरकार ने इस कानून से संबंधित मामलों के लिए सात सदस्यीय समन्वय समिति भी गठित की। 26 सितंबर को मुख्यमंत्री ने इस समिति की बैठक बुलाई थी।
28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, भगवंत मान ने कहा कि कानून की मूल धाराओं, जिसमें बेअदबी के लिए कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है, को कमजोर नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने सरकार की समिति और अकाल तख्त की ओर से गठित समिति के बीच विस्तृत विचार-विमर्श की बात कही।
पंजाब में शांति और भाईचारे पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की तरक्की के साथ-साथ राज्य में शांति और सामाजिक भाईचारा बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने गुरु साहिबानों और पीरों की शिक्षाओं के अनुरूप राज्य के विकास और लोगों की खुशहाली के लिए काम करने की बात कही।
भगवंत मान और बाबा लखा सिंह की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून के प्रावधानों और उनके क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न पक्षों के बीच चर्चा जारी है। सरकार की ओर से कानून से जुड़े मुद्दों पर संबंधित धार्मिक संस्थाओं के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया भी जारी है।