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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का वायरल वीडियो फर्जी निकला। सीएम ने इसे कनाडा कनेक्शन और राजनीतिक साजिश करार दिया। जानिए इस विवाद की पूरी सच्चाई।
पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान से जुड़े एक वायरल वीडियो ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने मोहाली में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस पूरे घटनाक्रम को अपने खिलाफ रची गई एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और इसे ‘डीपफेक’ तकनीक या मास्क का उपयोग करके मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
क्या है पूरा मामला और मुख्यमंत्री के दावे
पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत मान जी का फर्जी वीडियो बनाने वाले का वीडियो आपके सामने है।
ED पार्टी और अकाली दल–बादल परिवार द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत मान जी को बदनाम करने की साज़िश बेनकाब हो गई है।
वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति हाथ में सरदार… pic.twitter.com/lVHjMkzkoY
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) June 25, 2026
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 25 जून 2026 को मीडिया के सामने इस मामले का खंडन करते हुए कहा कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति वह खुद नहीं हैं। उन्होंने इसे धार्मिक आधार पर बदनाम करने का एक सुनियोजित प्रयास बताया। अपनी बात को सिद्ध करने के लिए सीएम ने कई ठोस तर्क रखे:
- कनाडा कनेक्शन: मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यह वीडियो कनाडा के एक होटल में फिल्माया गया था, जबकि वह 2016 के बाद से कभी कनाडा नहीं गए हैं।
- शारीरिक पहचान में अंतर: उन्होंने बताया कि वीडियो में दिखने वाले व्यक्ति की शारीरिक बनावट, लंबाई और चलने का तरीका उनसे पूरी तरह भिन्न है। सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि मुख्यमंत्री के गले पर सर्जरी का एक निशान है, जो वीडियो में मौजूद व्यक्ति के नहीं है।
- साजिश का पर्दाफाश: सीएम मान ने इस पूरी साजिश के पीछे कनाडा में बैठे एक व्यक्ति ‘जगमान समरा’ का नाम लिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पंजाब पुलिस इस मामले में इंटरपोल की मदद ले रही है ताकि आरोपी को कानून के दायरे में लाया जा सके।
फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस जांच
यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ‘फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट’ बनाने का भी बड़ा खुलासा हुआ है। गुरुग्राम पुलिस ने इस सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि मुख्यमंत्री के पक्ष में एक जाली रिपोर्ट तैयार करवाने के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत दी गई थी और इसमें धमकियों का भी इस्तेमाल किया गया था। पुलिस अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे कौन से चेहरे और कौन सी ताकतें काम कर रही थीं।
राजनीतिक सरगर्मी और विपक्ष पर निशाना
इस मामले को लेकर पंजाब में राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने इसे ‘झूठ का जाल’ करार देते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि उनके राजनीतिक विरोधी उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव में मात देने में नाकाम रहे हैं, इसलिए अब वे धार्मिक भावनाओं को भड़काकर उनकी छवि को धूमिल करना चाहते हैं।
उन्होंने जनता के प्रति अपना भरोसा जताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा: “जनता फैसला करेगी। धर्म के नाम पर फर्जी वीडियो और झूठा प्रचार मुझे पंजाब के लिए काम करने से नहीं रोक सकता।”
यह मुद्दा अब आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल-बादल परिवार के बीच एक बड़ी राजनीतिक जंग में तब्दील हो चुका है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि वह इस मामले से जुड़े तमाम सबूत और सच्चाई अकाल तख्त के समक्ष भी प्रस्तुत करेंगे ताकि सत्य की जीत हो सके और साजिशकर्ताओं का असली चेहरा जनता के सामने आ जाए।