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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात में ओपी राजभर ने OBC-SC आरक्षण में ‘कोटे के भीतर कोटा’ लागू करने की मांग दोहराई। पंचायत चुनाव से पहले उठी पुरानी रिपोर्ट की बात।
आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए आज सुभासपा प्रमुख एवं प्रदेश के सह मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। इस अवसर पर उनसे OBC–SC आरक्षण में ‘कोटे के भीतर कोटा’ लागू करने की मांग दोहराई। बैठक में सुभासपा महासचिव अरुण राजभर भी मौजूद रहे।
राजभर का कहना – आरक्षण में असंतुलन दूर हो
राजभर ने कहा कि अल्पसंख्यक पिछड़ी और अति-पिछड़ी जातियों को आरक्षण का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि कुछ ताकतवर जातियां इससे पूरी तरह लाभान्वित हो रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही हुई पुलिस भर्ती में 27% OBC आरक्षण में से 19,000 से अधिक लाभार्थी एक ही मजबूत जाति से आए, जिससे आरक्षण प्रणाली की खामी उजागर हुई।
सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट: कोटे के भीतर कोटा की संरचना
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2001: मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के दौरान सामाजिक न्याय समिति (हुकुम सिंह अध्यक्षता में) ने पिछड़ी जातियों के अंदर उपवर्गीकरण की सिफारिश की थी, लेकिन राजनीतिक बदलाव के कारण रिपोर्ट लागू नहीं हो सकी।
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2017: न्यायमूर्ति राघवेन्द्र सिंह की अध्यक्षा में गठित समिति ने 27% OBC आरक्षण को निम्नलिखित हिस्सों में विभाजित करने का सुझाव दिया:
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पिछड़ा वर्ग (16 जातियां): 7%
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अति पिछड़ा वर्ग (32 जातियां): 9%
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सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग (57 जातियां): 11%
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राजभर ने कहा कि इस रिपोर्ट को सरकार को सौंप दिया गया था और मुख्यमंत्री ने इसे विधानसभा में लागू करने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राज्य सरकार का दृष्टिकोण और प्रवर्तक राज्यों की मिसाल
राजभर ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उपवर्गीकरण के पक्ष में दिए गए निर्देशों का हवाला दिया और बताया कि हरियाणा समेत नौ अन्य राज्यों में ‘कोटे के भीतर कोटा’ व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सिफारिश की कि यूपी में भी इस नीति को अपनाया जाए।
आगे की रणनीति: पीएम से भी उठाएंगे मुद्दा
ओम प्रकाश राजभर ने यह भी संकेत दिया कि इस मांग को लेकर वह जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे और जोर देंगे कि आगामी पंचायत चुनाव ‘कोटे के भीतर कोटा’ व्यवस्था के आधार पर हुए, ताकि सभी वर्गों—विशेषकर शर्मगीन और पिछड़ी जातियों—को न्याय, प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण मिले।
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