Baglamukhi Jayanti 2026: कब है माँ बगलामुखी जयंती? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Baglamukhi Jayanti 2026: कब है माँ बगलामुखी जयंती? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

साल 2026 में माँ बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। जानें पीतांबरा देवी की पूजा विधि, मंत्र और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली इस विशेष तिथि का महत्व।

शत्रुओं पर विजय और वाक-सिद्धि की अधिष्ठात्री देवी माँ बगलामुखी की जयंती हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। दसों महाविद्याओं में से एक, माँ बगलामुखी को ‘पीतांबरा’ भी कहा जाता है क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। साल 2026 में माँ बगलामुखी जयंती कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन का क्या महत्व है, आइए विस्तार से जानते हैं।

माँ बगलामुखी जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, माँ बगलामुखी जयंती प्रतिवर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।

  • तारीख: साल 2026 में माँ बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
  • अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 24 अप्रैल 2026 को दोपहर 12:45 बजे से।
  • अष्टमी तिथि का समापन: 25 अप्रैल 2026 को दोपहर 01:10 बजे तक।

चूंकि अष्टमी तिथि का सूर्योदय और मुख्य पूजन काल 24 अप्रैल को प्राप्त हो रहा है, इसलिए इसी दिन जयंती मनाई जाएगी। शुक्रवार का दिन होने के कारण इस बार यह जयंती और भी शुभ हो गई है, क्योंकि शुक्रवार देवी साधना के लिए विशेष माना जाता है।

माँ बगलामुखी का स्वरूप और प्राकट्य कथा

माँ बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और तेजस्वी है। वे सुनहरे सिंहासन पर विराजमान हैं और उनके शरीर का वर्ण (रंग) भी स्वर्ण के समान पीला है। पौराणिक कथा के अनुसार, सत्ययुग में एक बार ब्रह्मांड को नष्ट करने वाला भीषण तूफान आया। चराचर जगत की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर सौराष्ट्र (गुजरात) की ‘हरिद्रा सरोवर’ से माता बगलामुखी प्रकट हुईं और उन्होंने उस विनाशकारी तूफान को स्तंभित (रोक) कर दिया। इसी कारण उन्हें ‘स्तंभन की देवी’ भी कहा जाता है।

पूजन विधि: पीले रंग का महत्व

माँ बगलामुखी की पूजा में पीला रंग अनिवार्य माना गया है। पूजन की संक्षिप्त विधि इस प्रकार है:

  • स्वच्छता और संकल्प: प्रातः काल स्नानादि के बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • चौकी स्थापना: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर माँ बगलामुखी का चित्र या यंत्र स्थापित करें।
  • पीली सामग्री: देवी को पीला चंदन, पीले फूल, पीली हल्दी की गांठें और पीले फल (जैसे केला) अर्पित करें।
  • भोग: माँ को पीले रंग की मिठाई या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
  • मंत्र जाप: हल्दी की माला से माँ के मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी होता है।

जयंती का महत्व और लाभ

माँ बगलामुखी की साधना शत्रुओं का नाश करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए अचूक मानी जाती है। जयंती के दिन पूजा करने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

  • शत्रु विजय: कोर्ट-कचहरी के मामलों और गुप्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए माँ की साधना सर्वोत्तम है।
  • वाक-सिद्धि: जो लोग राजनीति या प्रशासन के क्षेत्र में हैं, उनके लिए माँ का आशीर्वाद वाणी में प्रभाव और विजय लेकर आता है।
  • स्तंभन शक्ति: माँ बगलामुखी बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा को स्तंभित (रोक) देती हैं।
  • आर्थिक उन्नति: पीतांबरा स्वरूप की सेवा से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

सावधानी और नियम

माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत उग्र और शक्तिशाली मानी जाती है। इसलिए जयंती के दिन भक्तों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • पूजा के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • किसी के प्रति मन में द्वेष या बुरा विचार न रखें।
  • तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) का त्याग करें।
  • यदि संभव हो, तो किसी अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में ही विशेष अनुष्ठान करें।

 

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