ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल पर श्री राम और हनुमान जी की अटूट भक्ति का संगम। लखनऊ में ‘बड़ा मंगल’ के इस पावन पर्व पर जानिए आस्था और सेवा का अनूठा स्वरूप।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों भक्ति की एक ऐसी लहर चल रही है, जो न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक समरसता की एक मिसाल भी है। ज्येष्ठ माह का ‘चौथा बड़ा मंगल’ (26 मई 2026) इस बार एक विशेष उत्साह लेकर आया है। हनुमान जी को समर्पित यह पर्व भारत के कई हिस्सों में मनाया जाता है, लेकिन लखनऊ में ‘बड़ा मंगल’ का स्वरूप अत्यंत अनूठा है। यहाँ का बड़ा मंगल न केवल एक त्योहार है, बल्कि यह लखनऊ की मशहूर ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ और प्रभु श्री राम के प्रति हनुमान जी की अटूट निष्ठा का प्रतीक भी है।
वर्ष 2026 की विशिष्टता: 8 मंगल का संयोग
सामान्यतः ज्येष्ठ माह में चार या पांच मंगलवार ही आते हैं, लेकिन हिंदू पंचांग के दुर्लभ संयोग और अधिक मास के कारण, वर्ष 2026 में भक्तों को ‘बड़ा मंगल’ मनाने के लिए आठ मंगलवार मिल रहे हैं। यह एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है जो पिछले 19 वर्षों में पहली बार आया है। यही कारण है कि इस साल लखनऊ के मंदिरों में भक्तों की भीड़ और भंडारों का आयोजन पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है।
श्री राम और हनुमान जी: भक्ति का दिव्य आधार
बड़ा मंगल की सार्थकता भगवान श्री राम के प्रति हनुमान जी के अनन्य प्रेम में निहित है। हनुमान जी को ‘राम-भक्त शिरोमणि’ कहा जाता है। भक्त मानते हैं कि हनुमान जी की पूजा करने का सबसे संक्षिप्त और प्रभावी मार्ग है—प्रभु श्री राम का स्मरण करना। कहा जाता है कि जहाँ-जहाँ राम कथा होती है या जहाँ राम का नाम लिया जाता है, वहाँ हनुमान जी अदृश्य रूप में अवश्य उपस्थित होते हैं। बड़ा मंगल के दिन हनुमान मंदिरों में गूँजते ‘जय श्री राम’ के नारे इस बात के प्रमाण हैं कि हनुमान जी की शक्ति का स्रोत स्वयं प्रभु श्री राम हैं। हनुमान जी की सेवा ही राम तक पहुँचने का सुगम मार्ग है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: नवाबों और हनुमान का संबंध
बड़ा मंगल का इतिहास सदियों पुराना है। जनश्रुतियों के अनुसार, अवध के नवाबों के शासनकाल में इस पर्व को विशेष संरक्षण मिला था। अलीगंज के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर की स्थापना के पीछे बेगम जनाब-ए-आलिया की अटूट श्रद्धा थी। एक मुस्लिम शासिका द्वारा प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी के मंदिर के प्रति दिखाई गई यह निष्ठा, अवध की उस साझा संस्कृति को दर्शाती है जहाँ धर्म इंसानियत के रंग में रंगा हुआ था।
भक्ति और सेवा का महापर्व
बड़ा मंगल के दिन का मुख्य आकर्षण ‘भंडारा’ और ‘प्याऊ’ हैं। लखनऊ की सड़कों पर भंडारे का आयोजन करना हनुमान जी को प्रसन्न करने का एक तरीका माना जाता है। भक्त मानते हैं कि जब वे किसी भूखे को भोजन कराते हैं, तो वे वास्तव में हनुमान जी की सेवा कर रहे होते हैं, जो सदैव ‘राम-काज’ में लगे रहते हैं। इन भंडारों में बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों का मिलना लखनऊ की संस्कृति की असली पहचान है।
पूजा विधि और महत्व
बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी को ‘चोला’ अर्पित करना अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। श्री राम का नाम जपते हुए हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों को असीम मानसिक शांति और साहस प्राप्त होता है। ज्योतिष अनुसार, मंगलवार को हनुमान जी की आराधना से कुंडली में मंगल के दुष्प्रभाव समाप्त होते हैं और व्यक्ति के जीवन में श्री राम की कृपा से कल्याणकारी परिवर्तन आते हैं।
एक सामाजिक उत्सव
आज बड़ा मंगल केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर का सबसे बड़ा सामुदायिक उत्सव बन चुका है। अलीगंज के हनुमान मंदिर से लेकर गोमती किनारे स्थित ‘हनुमान सेतु’ तक, पूरा शहर राम-भक्त हनुमान जी के जयघोष से गूँज उठता है। लोग इस दिन अपनी बाधाओं को दूर करने और आत्मिक शक्ति पाने के लिए बजरंगबली की शरण में आते हैं।
चौथा बड़ा मंगल हमें सिखाता है कि हनुमान जी की भक्ति का अर्थ है—सेवा और निस्वार्थ प्रेम। जब हम दूसरों को भोजन कराते हैं या किसी की सहायता करते हैं, तो हम प्रभु श्री राम के ‘राम-राज्य’ के आदर्शों को ही जी रहे होते हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती और जब हम मिल-जुलकर रहते हैं, तो ईश्वर का आशीर्वाद और अधिक फलीभूत होता है।
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